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राहुल गांधी vs अमित शाह-पीएम मोदी: बहस की चुनौतियां और सियासी घमासान

Anam Fatima
Last updated: November 3, 2026 1:27 pm
Anam Fatima
6 hours ago
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राहुल गांधी और अमित शाह के बीच बहस की चुनौती पर सियासी घमासान
राहुल गांधी की पीएम मोदी को खुली बहस की चुनौती और अमित शाह के जवाब से गरमाई देश की राजनीति।
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अपनी भाषा चुने।

Contents
राहुल गांधी का सीधा हमलाअमित शाह का जवाबी वारजयराम रमेश की शर्तसियासी माहौल और आगे की राह

देश की राजनीति एक बार फिर आमने-सामने की टक्कर में उलझ गई है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुली बहस की चुनौती दी है। जवाब में गृह मंत्री अमित शाह ने SIR और EVM मुद्दे पर संसद का विशेष सत्र बुलाकर चर्चा करने की पेशकश की है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने बीच में स्पष्ट शर्त रख दी है कि पहले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा हो, उसके बाद ही किसी सत्र की बात हो।

यह पूरा मामला SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिविजन और कथित “वोट चोरी” के आरोपों से जुड़ा है। विपक्ष लगातार चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहा है, जबकि सत्ता पक्ष इसे घुसपैठियों को हटाने की कवायद बता रहा है। दोनों तरफ से चुनौतियां आ रही हैं, लेकिन असल में बहस अभी सिर्फ सोशल मीडिया और रैलियों तक सीमित है।

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तीन चेहरे, तीन सियासी दांव

राहुल गांधी

खुली बहस की चुनौती

अमित शाह

संसद में चर्चा का प्रस्ताव

जयराम रमेश

CEC के इस्तीफे की शर्त

राहुल गांधी का सीधा हमला

2 नवंबर को राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके प्रधानमंत्री पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा, “मिस्टर मोदी, इस देश से झूठ बोलना बंद करो। आप विदेशी मदद से प्रधानमंत्री बने। आप विदेशी मदद से ही प्रधानमंत्री बने हुए हैं। आपका वित्तीय सिस्टम पूरी तरह विदेशियों के नियंत्रण और समर्थन में है। विदेशी सोशल मीडिया पूरी तरह आपका साथ देता है।”

राहुल गांधी की खुली बहस की चुनौती

“मैं आपको इस पर खुली बहस की चुनौती देता हूं। कोई भी मंच, कोई भी समय। हिम्मत है तो आओ। आप आ नहीं पाएंगे, क्योंकि आप इस बात से डरते हैं कि मुझे आपके बारे में क्या पता है।”

यह बयान प्रधानमंत्री के उस भाषण के जवाब में आया था, जिसमें उन्होंने विपक्ष को “अवरोधक पक्ष” बताया था और सोशल मीडिया के जरिए अफवाहें फैलाने का आरोप लगाया था। राहुल ने प्रधानमंत्री के बयान का स्क्रीनशॉट भी शेयर किया और सीधे उन पर विदेशी समर्थन का आरोप ठोक दिया।

अमित शाह का जवाबी वार

इसी बीच गृह मंत्री अमित शाह हैदराबाद में भाजपा की “लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ” पदयात्रा का नेतृत्व कर रहे थे। वहां उन्होंने राहुल गांधी को संसद में बहस की चुनौती दी। उन्होंने कहा कि राहुल संविधान हाथ में लेकर घूमते हैं, लेकिन उसका सम्मान नहीं करते। संसद चलने नहीं देते।

अमित शाह की संसद में बहस की पेशकश

“ईवीएम हो, SIR हो या घुसपैठिए, मैं हैदराबाद की धरती से आपको चुनौती देता हूं। हम संसद का विशेष सत्र बुलाने को तैयार हैं। आओ बहस करो।”

शाह ने स्पष्ट कहा, “ईवीएम हो, SIR हो या घुसपैठिए, मैं हैदराबाद की धरती से आपको चुनौती देता हूं। हम संसद का विशेष सत्र बुलाने को तैयार हैं। आओ बहस करो।” उन्होंने जोड़ा कि अगर संसद में चर्चा हुई तो प्रधानमंत्री मोदी कांग्रेस के तर्कों को ध्वस्त कर देंगे।

शाह ने विपक्ष के दिल्ली रैली को “घुसपैठिया बचाओ रैली” बताया और आरोप लगाया कि कांग्रेस SIR का विरोध इसलिए कर रही है क्योंकि उसमें से घुसपैठियों के नाम हटने का खतरा है। उन्होंने पूछा कि अगर ईवीएम खराब है तो तेलंगाना, केरल, तमिलनाडु और हिमाचल में कांग्रेस की सरकारें कैसे बनीं।

जयराम रमेश की शर्त

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इस पूरे आदान-प्रदान पर अपनी बात रखी। उन्होंने अमित शाह के विशेष सत्र वाले प्रस्ताव पर कहा कि पहले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा हो। रमेश लंबे समय से ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सक्रिय हैं और उन्हें चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल का केंद्र बताते रहे हैं।

कांग्रेस की प्रमुख शर्त

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा।

विपक्ष का पूरा अभियान SIR प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर नाम हटने और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर केंद्रित है। वहीं सत्ता पक्ष इसे मतदाता सूची की सफाई और अवैध प्रविष्टियों को हटाने का काम बता रहा है। दोनों तरफ से आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।

सियासी माहौल और आगे की राह

यह टकराव सिर्फ बयानबाजी नहीं है। यह SIR, ईवीएम और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद का नया अध्याय है। विपक्ष ने पहले भी रामलीला मैदान में बड़ा प्रदर्शन किया और ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रतीकात्मक महाभियोग भी किया। भाजपा ने जवाब में देशभर में पदयात्राएं निकालीं।

अभी दोनों तरफ से चुनौतियां दी जा रही हैं, लेकिन असल बहस कब होगी, यह साफ नहीं है। राहुल गांधी किसी भी मंच पर बहस के लिए तैयार बता रहे हैं, तो अमित शाह संसद के विशेष सत्र की बात कर रहे हैं। जयराम रमेश ने CEC के इस्तीफे को पूर्व शर्त बना दिया है।

देश की राजनीति इस मुद्दे पर गरम है। आम जनता देख रही है कि आखिरकार यह चुनौती सिर्फ शब्दों तक सीमित रहती है या संसद के अंदर असली बहस का रूप लेती है। फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने तर्क दोहरा रहे हैं और सियासी तापमान बढ़ा रहे हैं।

इस मुद्दे से जुड़ी अन्य खबरें और आधिकारिक जानकारी

• रामलीला मैदान में INDIA ब्लॉक की रैली और SIR विवाद

• भारत निर्वाचन आयोग – आधिकारिक वेबसाइट

• भारतीय संसद – आधिकारिक वेबसाइट

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