अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर भारत और चीन के बीच तनाव अब कोई छिपी बात नहीं रही। आईटीबीपी के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने खुद मुंह खोल दिया है। उन्होंने साफ कहा है कि अरुणाचल में कई जगहों पर चीनी सैनिकों के साथ आमना-सामना जारी है। यह बयान आते ही कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर सवालों की बौछार कर दी है।
आईटीबीपी डीजी का बड़ा बयान
गुरुवार को राजस्थान के अलवर में आईटीबीपी के हिमवीर सम्मान समारोह में महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने कहा—
“पिछले कुछ दिनों में अरुणाचल में कई स्थानों पर face-off हुआ है और यह अभी भी जारी है। वहां हमारे शौर्य कमांडो टीमों ने बेहतरीन भूमिका निभाई है।”
यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि जुलाई से अरुणाचल के ऊपरी सुबनसिरी जिले के तक्षिंग और असाफिला इलाके में तनाव की खबरें आ रही थीं, लेकिन सरकार की तरफ से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी। आईटीबीपी प्रमुख का यह बयान पहली बार आधिकारिक रूप से इस तनाव को स्वीकार करता है।
सूत्रों के मुताबिक, चीनी सैनिकों ने भारत की एलएसी की धारणा से 6-7 किलोमीटर अंदर तंबू लगा रखे हैं। जुलाई में नियमित गश्त के दौरान दोनों पक्ष आमने-सामने आए थे। उसके बाद चीनी सैनिक बड़ी संख्या में लौटे और अपनी पोजीशन मजबूत कर ली।
सितंबर में हुई थी बातचीत, लेकिन तनाव बरकरार
सितंबर में दोनों देशों के बीच कोर कमांडर स्तर की बातचीत वाचा-दमाई पॉइंट पर हुई थी। लेकिन आईटीबीपी प्रमुख के बयान से साफ है कि बातचीत के बावजूद स्थिति सामान्य नहीं हुई है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान दिल्ली आने के समय भी यह तनाव जारी रहा।
आईटीबीपी प्रमुख ने शौर्य कमांडो की तारीफ करते हुए कहा कि बल को अपनी मूल जिम्मेदारी नहीं छोड़नी चाहिए। उन्होंने चीन को भारत का “सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी” बताया और कहा कि पारंपरिक हथियारों से मुकाबला अब मुश्किल है। ड्रोन और भूमिगत बंकरों पर जोर देने की बात भी कही गई।
कांग्रेस का तीखा हमला
इस बयान के आते ही कांग्रेस सक्रिय हो गई। पार्टी के महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर लिखा—
“खुद को विश्वगुरु कहने वाले चीन को छूट दे रहे हैं। आईटीबीपी के डीजी ने अरुणाचल में चीनी सेना के साथ हालिया झड़पों में जवानों के प्रदर्शन की सही तारीफ की है। लेकिन इस पूरे मामले पर प्रधानमंत्री और उनकी व्यवस्था की तरफ से सन्नाटा पसरा हुआ है।”
कांग्रेस का आरोप है कि जुलाई से चल रहे इस तनाव पर न तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोई बयान दिया, न ही गृह मंत्री अमित शाह ने। पार्टी ने पूछा कि जब सीमा पर स्थिति इतनी गंभीर है तो सरकार चुप क्यों है?
कांग्रेस सांसद जेबी माथर ने भी कहा कि जुलाई से अक्टूबर तक देश को इस बात का पता ही नहीं चला। अब जब आईटीबीपी प्रमुख ने खुद बताया तो सरकार को जवाब देना चाहिए।
क्या है पूरी पृष्ठभूमि?
अरुणाचल प्रदेश में चीन के साथ तनाव कोई नई बात नहीं है। लेकिन इस बार की स्थिति इसलिए अलग है क्योंकि आधिकारिक स्तर पर इसे स्वीकार किया गया है। स्थानीय लोगों की शिकायत है कि कुछ गश्ती बिंदुओं पर पहुंच बाधित हो गई है। चीन अरुणाचल के कुछ इलाकों के नाम बदलने और बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं का निर्माण भी कर रहा है, जिससे भारत की जल सुरक्षा पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
सरकार की तरफ से अभी तक इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने पहले कहा था कि अरुणाचल में कोई नया कब्जा नहीं हुआ है, लेकिन स्थानीय लोगों की चिंताओं को स्वीकार किया था।
राजनीतिक सरगर्मि
यह मुद्दा अब राजनीतिक रंग ले चुका है। विपक्ष इसे सीमा सुरक्षा पर सवाल के रूप में उठा रहा है, जबकि सत्ता पक्ष अब तक चुप है। आईटीबीपी प्रमुख का बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सेना या पुलिस बल के मुखिया की तरफ से आया है, न कि किसी राजनीतिक नेता की तरफ से।
अरुणाचल की सीमा पर चल रहा यह तनाव एक बार फिर याद दिलाता है कि भारत-चीन संबंधों में कितनी जटिलताएं बाकी हैं। बातचीत के बावजूद जमीन पर स्थिति सामान्य न होना सवाल खड़े करता है। अब देखना होगा कि सरकार इस आधिकारिक खुलासे पर क्या रुख अपनाती है।
संबंधित खबर
संबंधित बाहरी स्रोत
The Indian Express की अरुणाचल प्रदेश में भारत-चीन सीमा पर फेस-ऑफ से संबंधित रिपोर्ट पढ़ें
देश की राजनीति, चुनाव और जनहित से जुड़े मुद्दों पर भरोसेमंद खबरें और विस्तृत रिपोर्ट Akhandrashtra.com पर पढ़ सकते हैं। ऐसी ही खबरों के लिए हमारी वेबसाइट पर विज़िट करें।


