नई दिल्ली: चुनावी निष्पक्षता और ‘वोट चोरी’ के दावों को लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल चुका विपक्षी गठबंधन अब तक की सबसे आक्रामक राजनीतिक चाल चलने जा रहा है। 10, राजाजी मार्ग पर ‘मॉडल पार्लियामेंट’ (प्रतीकात्मक संसद) बनाकर CEC ज्ञानेश कुमार पर जन-महाभियोग चलाने की तैयारी पूरी हो चुकी है। हालांकि, सत्ताधारी बीजेपी ने भी विपक्ष के इस ‘सियासी ड्रामे’ का तोड़ निकालने के लिए अपनी रणनीति धारदार कर ली है।
‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान से जवाब देगी BJP
विपक्ष द्वारा चुनाव आयोग और केंद्र सरकार की छवि धूमिल करने के प्रयासों को नाकाम करने के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान चलाने का ऐलान किया है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि चुनावों में बार-बार मिल रही हार से बौखलाया विपक्ष संवैधानिक संस्थाओं पर हमला कर देश में अराजकता का माहौल पैदा करना चाहता है, जिसे जनता के सामने बेनकाब किया जाएगा।
“60 साल की संपत्तियों को मुनाफे का औजार बनाकर बेच दिया”—इमरान मसूद
कार्यक्रम से ठीक पहले कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने केंद्र सरकार पर देश की सार्वजनिक संपत्तियों को बेचने का सनसनीखेज आरोप लगाया। राहुल गांधी के ट्वीट का समर्थन करते हुए मसूद ने कहा, “जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और मनमोहन सिंह की सरकारों ने देश के विकास और युवाओं को रोजगार देने के लिए जो रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट, बैंक और PSUs बनाए थे, यह सरकार उन्हें सिर्फ मुनाफे का साधन मानकर बेच रही है। इन्होंने खुद क्या बनाया?” मसूद ने दावा किया कि पिछले 12 सालों में देश पर राष्ट्रीय कर्ज पिछले 60 सालों की तुलना में चार गुना बढ़ गया है।
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1 नवंबर की रामलीला मैदान महारैली से पहले बड़ा शक्ति प्रदर्शन
जयराम रमेश का आरोप है कि मुख्य चुनाव आयुक्त निष्पक्ष रहने के बजाय सत्ताधारी दल के एजेंट की तरह काम कर रहे हैं। विपक्षी खेमे के अनुसार, शुक्रवार का यह जन-महाभियोग 1 नवंबर को रामलीला मैदान में होने वाली विशाल ‘वोट बचाओ महारैली’ के लिए माहौल तैयार करने का काम करेगा। एक तरफ जहां विपक्ष ‘वोट चोरी’ और ‘महंगाई-निजीकरण’ को मुद्दा बनाकर सड़कों पर है, वहीं दूसरी तरफ बीजेपी इसे संस्थाओं पर हमला बताकर विपक्ष को घेरने में जुट गई है।


