Indian Rail के इतिहास में आज एक ऐतिहासिक और तकनीकी महाक्रांति की शुरुआत हो गई है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने जींद में देश की पहली हाइड्रोजन-चालित ट्रेन (India’s First Hydrogen-Powered Train) के औपचारिक शुभारंभ का जोरदार जश्न मनाया। इस उद्घाटन को भारतीय रेल और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बहुत लंबी छलांग माना जा रहा है।
इस ऐतिहासिक मौके पर रेल मंत्री ने देश के दूरदर्शी नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि भारत ने पूरी तरह स्वदेशी प्रयासों से हाइड्रोजन तकनीक पर महारत हासिल की है। इसके साथ ही भारत अब दुनिया के उन चुनिंदा देशों की कतार में शामिल हो गया है जिनके पास इस तरह की उन्नत और आधुनिक तकनीक मौजूद है।
आत्मनिर्भर भारत और तकनीकी कौशल का प्रतीक: अश्विनी वैष्णव
उद्घाटन समारोह के दौरान रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भारत की बढ़ती तकनीकी आत्मनिर्भरता पर विशेष जोर दिया:
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ऐतिहासिक उपलब्धि: रेल मंत्री ने कहा, “आज का दिन हमारे लिए बेहद ऐतिहासिक है। देश के शीर्ष नेतृत्व की प्रेरणा से हमने भारत में ही हाइड्रोजन तकनीक विकसित कर एक बड़ी तकनीकी सफलता हासिल की है।”
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ग्लोबल क्लब में एंट्री: उन्होंने आगे कहा कि भारत अब उन बेहद गिने-चुने देशों में शामिल है, जिनके पास हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेनों के निर्माण और संचालन की पूरी स्वदेशी तकनीक मौजूद है। यह सफलता रेल क्षेत्र में देश की आत्मनिर्भरता और ग्लोबल लीडरशिप को साबित करती है।
विकास यात्रा का ‘स्वर्णिम अध्याय’: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस ऐतिहासिक परियोजना की मेजबानी का अवसर मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त की और इसे मीडिया के सामने विस्तार से साझा किया:
“आज का यह पावन अवसर महज एक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह ‘विकसित भारत’ के संकल्प, ‘आत्मनिर्भर भारत’ के आत्मविश्वास और राष्ट्र-निर्माण की सामूहिक चेतना का एक महा-उत्सव है। जींद की इस पवित्र धरा से आज देश के विकास का एक नया स्वर्णिम अध्याय शुरू हो रहा है।” — नायब सिंह सैनी, मुख्यमंत्री (हरियाणा)
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए कहा कि उनके विजनरी नेतृत्व और हरित ऊर्जा (Green Energy) के प्रति प्रतिबद्धता के कारण ही हरियाणा और विशेष रूप से जींद को देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन की मेजबानी का गौरव मिला है। उन्होंने कहा कि भावी पीढ़ियां इस तारीख को इतिहास के पन्नों में एक बड़े मील के पत्थर के रूप में याद रखेंगी।
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भविष्य की ग्रीन रेल का ब्लूप्रिंट
यह हाइड्रोजन ट्रेन परियोजना सिर्फ एक नई ट्रेन चलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भविष्य की भारतीय रेल का एक पूरा खाका (Framework) तैयार कर रही है:
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बुनियादी ढांचे का विकास: इस प्रोजेक्ट के जरिए देश में हाइड्रोजन-आधारित रेल संचालन के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑपरेटिंग सिस्टम और मेंटेनेंस (रखरखाव) की संस्थागत क्षमता को विकसित और टेस्ट किया जा रहा है।
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नेट-जीरो का लक्ष्य: यह पूरी पहल भारत सरकार के ‘नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन’ (National Green Hydrogen Mission) और रेलवे के ‘नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन’ (Net-Zero Carbon Emission) के लक्ष्य को समय से पहले हासिल करने में रीढ़ की हड्डी साबित होगी।

