Ram Mandir में चढ़ावे और चंदे (दान) के पैसे में कथित हेराफेरी की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) अगले 24 से 48 घंटों (गुरुवार या शुक्रवार) के भीतर अपनी अंतिम रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप सकती है। सूत्रों के मुताबिक, जांच के लिए एसआईटी को दिया गया समय अब आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।
इससे पहले, 1 जुलाई को यूपी सरकार ने जांच का दायरा बढ़ाने और सभी पहलुओं को गहराई से खंगालने के लिए एसआईटी का कार्यकाल 15 दिनों के लिए बढ़ा दिया था, जिसकी अवधि अब पूरी होने जा रही है।
शुरुआती रिपोर्ट में सीसीटीवी (CCTV) फुटेज से हुए बड़े खुलासे
एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में मंदिर परिसर के भीतर लापरवाही और गड़बड़ी के कई गंभीर सबूत सामने आए हैं:
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संदेहास्पद गतिविधियां: 27 अप्रैल से 5 जून, 2026 के बीच सीसीटीवी कैमरों में करीब 70 संदिग्ध घटनाएं दर्ज की गईं। फुटेज में पैसे गिनने वाला स्टाफ कथित तौर पर नोटों की गड्डियां छिपाते हुए दिखाई दिया।
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सुरक्षा में बड़ी चूक: रिपोर्ट में बताया गया कि कैश काउंटिंग (पैसे गिनने वाले) रूम में आते-जाते समय कर्मचारियों की कोई तलाशी (Frisking) नहीं ली जाती थी। साथ ही, कर्मचारियों के निजी सामान पर कोई नियंत्रण नहीं था और कई दान पेटियों के पैसों को एक साथ मिलाकर गिना जा रहा था, जिससे हेराफेरी आसान हो गई।
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लाखों की बरामदगी: जांच शुरू होने से ठीक पहले कुछ कर्मचारियों से लगभग ₹78.94 लाख बरामद किए गए थे। इसके अलावा, 4 जून, 2026 को काउंटिंग रूम से जुड़े वॉशरूम (शौचालय) से ₹2.25 लाख अतिरिक्त बरामद किए गए थे।
महत्वपूर्ण तथ्य: एसआईटी की शुरुआती रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि सोशल मीडिया पर चल रहे उन दावों का कोई सबूत नहीं मिला है, जिनमें चांदी की ईंटें या अन्य कीमती चढ़ावे के गायब होने की बात कही जा रही थी।
आरोपियों की हिरासत बढ़ी, मुख्य पदाधिकारियों के इस्तीफे
इस पूरे विवाद के सामने आने के बाद कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर कई बड़े कदम उठाए गए हैं:
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14 दिन की न्यायिक हिरासत: अयोध्या की एक स्थानीय अदालत ने सोमवार को इस मामले के सभी आठ आरोपियों की न्यायिक हिरासत 14 दिनों के लिए बढ़ा दी है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए इन आरोपियों की अगली पेशी अब 27 जुलाई को होगी।
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ट्रस्ट में बड़े इस्तीफे: भ्रष्टाचार के आरोप सामने आने के बाद राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कई शीर्ष पदाधिकारियों के इस्तीफे स्वीकार किए जा चुके हैं। इनमें ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय, सदस्य अनिल मिश्रा और गोपाल राव शामिल हैं।
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सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला, केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस
इस मामले की गूंज अब देश की सबसे बड़ी अदालत तक पहुंच चुकी है:
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स्वतंत्र जांच की मांग: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को नोटिस जारी किया है, जिनमें इस कथित घोटाले की कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई है।
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स्टेटस रिपोर्ट तलब: मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहन की पीठ ने यूपी सरकार द्वारा गठित एसआईटी को अपनी टीम की संरचना (Composition) और अब तक की प्रगति की पूरी स्टेटस रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। कोर्ट इस मामले पर अगले सोमवार को फिर सुनवाई करेगा।

