India का Electronics मैन्युफैक्चरिंग (विनिर्माण) क्षेत्र देश में औद्योगिक नौकरियों का सबसे बड़ा और सबसे तेज जरिया बनकर उभरा है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक दशक में इस सेक्टर ने देश के युवाओं के लिए करीब 25 लाख रोजगार के नए अवसर पैदा किए हैं।
‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ (Atmanirbhar Bharat) जैसी बड़ी पहलों के दम पर इस क्षेत्र ने न सिर्फ रोजगार बढ़ाए हैं, बल्कि महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाने में भी सबसे बड़ी भूमिका निभाई है। मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग के सीधे कार्यबल (Direct Workforce) में लगभग 70 प्रतिशत हिस्सेदारी महिलाओं की है।
1. रोजगार के आंकड़ों में ऐतिहासिक उछाल
मंत्रालय के मुताबिक, मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़े पूरे इकोसिस्टम ने नौकरियों के मामले में नए रिकॉर्ड बनाए हैं:
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कुल रोजगार (डायरेक्ट व इनडायरेक्ट): मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग की पूरी वैल्यू चेन इस समय देश में करीब 12 लाख नौकरियों को सपोर्ट कर रही है।
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PLI स्कीम का असर: बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के लिए शुरू की गई पीएलआई (Production Linked Incentive) योजना से लगभग 1.8 लाख लोगों को सीधे रोजगार मिला है।
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अन्य सरकारी योजनाएं: सरकार की बाकी नीतियों और पहलों के चलते इस क्षेत्र में 3.5 लाख और नई नौकरियां पैदा हुई हैं।
दक्षिण भारत के तीन बड़े इंडस्ट्रियल हब — होसुर (Hosur), श्रीपेरंबुदूर (Sriperumbudur) (तमिलनाडु) और बेंगलुरु (Bengaluru) (कर्नाटक) मिलकर इस सेक्टर में 1 लाख से अधिक लोगों को बेहतरीन और गुणवत्तापूर्ण रोजगार दे रहे हैं, जिससे देश में एक कुशल वर्कफोर्स तैयार हो रही है।
2. महिला सशक्तिकरण का नया मॉडल बना इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर
इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग आज के समय में समावेशी विकास (inclusive development) का सबसे बड़ा उदाहरण बन चुका है।
“इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र देश में समावेशी औद्योगिक विकास का एक बेजोड़ उदाहरण बनकर उभरा है, जिसमें महिलाओं की भागीदारी और उनका योगदान सबसे खास है।”
— इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY)
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कुल भागीदारी: बीते 10 वर्षों में इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में पैदा हुए कुल रोजगारों में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 30 फीसदी रही है।
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मोबाइल निर्माण में दबदबा: सीधे असेंबली लाइन और मोबाइल निर्माण से जुड़े कामों में यह आंकड़ा लगभग 70 प्रतिशत तक पहुंच जाता है।
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PLI स्कीम में योगदान: अकेले लार्ज स्केल इलेक्ट्रॉनिक्स पीएलआई स्कीम के तहत ही 90,000 से अधिक महिलाओं को रोजगार मिला है।
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3. उत्पादन और निर्यात में रिकॉर्ड तोड़ बढ़त (10 वर्षों का सफर)
पिछले एक दशक में भारत ने न सिर्फ अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा किया है, बल्कि वह दुनिया के लिए एक बड़ा एक्सपोर्टर बनकर भी उभरा है।
| पैमाना | वित्तीय वर्ष 2014-15 | वित्तीय वर्ष 2025-26 (अनुमानित) | कुल विकास रफ्तार |
| कुल इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन | ₹1.90 लाख करोड़ | ₹13.11 लाख करोड़ | लगभग 7 गुना बढ़ोतरी |
| कुल इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात (Export) | ₹38,263 करोड़ | ₹4.24 लाख करोड़ | 11 गुना बढ़ोतरी |
| मोबाइल फोन उत्पादन | ₹18,900 करोड़ | ₹6.27 लाख करोड़ | लगभग 33 गुना बढ़ोतरी |
| मोबाइल फोन निर्यात (Export) | ₹1,566 करोड़ | ₹2.60 लाख करोड़ | 165 गुना की रिकॉर्ड ऐतिहासिक वृद्धि |
‘विकसित India’ की ओर बढ़ते कदम
वित्त वर्ष 2025-26 में मोबाइल फोन भारत के सबसे बड़े निर्यात आइटम (Largest Export Item) के रूप में उभरे हैं। इसके साथ ही भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता देश बन गया है। डोमेस्टिक वैल्यू एडिशन (घरेलू मूल्य संवर्धन) को मजबूत करके और अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को बढ़ाकर यह सेक्टर भारत को ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स हब बनाने और ‘विकसित भारत’ के संकल्प को पूरा करने में सबसे आगे है।

