गोरखपुर: उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी कड़ी में 4 नवंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन गोरखपुर में ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा में शामिल हुए। इस कार्यक्रम में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे।
गोरखपुर से पदयात्रा के जरिए दिया राजनीतिक संदेश
भाजपा की यह पदयात्रा गोरखपुर स्थित महाराणा प्रताप इंटर कॉलेज से शुरू हुई। इसके बाद यात्रा कचहरी चौराहा, गोलघर और गणेश चौक होते हुए सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा तक पहुंची। प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ पदयात्रा का समापन हुआ। इस दौरान पार्टी की ओर से बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और समर्थकों के शामिल होने का लक्ष्य रखा गया था।
योगी और नितिन नवीन ने किया नेतृत्व
इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की मौजूदगी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों नेताओं ने पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ पदयात्रा में हिस्सा लिया। भाजपा ने इस अभियान को लोकतंत्र और संविधान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता से जोड़कर पेश किया है।
2027 के विधानसभा चुनाव पर भाजपा का फोकस
पदयात्रा के साथ ही भाजपा का ध्यान आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति पर भी है। पार्टी नेतृत्व गोरखपुर में संगठनात्मक बैठकों के जरिए प्रदेश की राजनीतिक स्थिति और चुनावी तैयारियों की समीक्षा कर रहा है। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की मौजूदगी में वरिष्ठ नेताओं और जनप्रतिनिधियों के साथ बैठकें भी निर्धारित की गई हैं।
इन बैठकों में संगठन की स्थिति, सरकार और संगठन के बीच तालमेल तथा आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर चर्चा होनी है। प्रदेश कोर कमेटी की बैठक भी इस दौरे का अहम हिस्सा है।
5 नवंबर को भी जारी रहेगा बैठकों का दौर
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन 5 नवंबर को भी गोरखपुर में रहेंगे। इस दौरान वह गोरखनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन करेंगे। इसके बाद पार्टी के पूर्व और वर्तमान पदाधिकारियों तथा जनप्रतिनिधियों के साथ अलग-अलग बैठकें होंगी।
गोरखपुर से पूर्वांचल पर नजर
गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गृह क्षेत्र है। ऐसे में यहां राष्ट्रीय अध्यक्ष की पदयात्रा और संगठनात्मक बैठकों को पूर्वांचल में पार्टी की तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भाजपा इस कार्यक्रम के जरिए कार्यकर्ताओं के साथ संवाद और संगठनात्मक समन्वय को मजबूत करने पर जोर दे रही है।
अब देखना होगा कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा की ये संगठनात्मक गतिविधियां प्रदेश की राजनीति और चुनावी रणनीति में क्या भूमिका निभाती हैं।


