हैदराबाद: सोशल मीडिया पर इन दिनों एक जांबाज महिला अधिकारी की तस्वीर और कहानी तेजी से वायरल हो रही है। यह कहानी है IPS B Sumathi की, जिन्होंने बंद कमरों में रिपोर्ट पढ़ने के बजाय खुद जमीन पर उतरकर महिलाओं की सुरक्षा का ‘रियलिटी चेक’ करने का फैसला किया।
मई 2026 में मल्कजगिरी की पहली महिला पुलिस कमिश्नर के रूप में कार्यभार संभालने वाली B Sumathi ने जो साहस दिखाया, उसने पूरे देश का ध्यान खींचा है।
आधी रात का वो ‘अंडरकवर’ ऑपरेशन
रात के 12:30 बज रहे थे। दिलसुख नगर का एक सुनसान बस स्टॉप। न कोई पुलिस वर्दी, न सरकारी गाड़ी और न ही कोई गनर। B Sumathi एक साधारण सलवार-सूट पहने मोबाइल हाथ में लिए बस का इंतजार कर रही थीं।
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खौफनाक मंजर: वहां मौजूद लोगों को अंदाजा भी नहीं था कि यह कोई साधारण महिला नहीं, बल्कि जिले की सबसे बड़ी पुलिस अधिकारी है। चंद मिनटों में ही वहां मौजूद पुरुषों ने उन्हें घेरना शुरू कर दिया।
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हकीकत सामने आई: रिपोर्ट्स के अनुसार, उस रात करीब 40 पुरुषों ने किसी न किसी बहाने उनसे बात करने या उनके करीब आने की कोशिश की। कुछ लोग नशे में थे और कुछ अभद्र टिप्पणियां कर रहे थे।
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एक्शन मोड: जैसे ही स्थिति असहज हुई, सादे कपड़ों में दूर तैनात पुलिस की टीम हरकत में आई और कई लोगों को मौके पर ही दबोच लिया गया। B Sumathi ने खुद अनुभव किया कि एक साधारण महिला के लिए रात में अकेले बाहर निकलना आज भी कितना बड़ा जोखिम है।]
कलुगोटला से IPS बनने तक का गौरवशाली सफर
IPS B Sumathi की कहानी केवल इस एक ऑपरेशन तक सीमित नहीं है। उनका जीवन संघर्ष और सफलता की मिसाल है:
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ग्रामीण पृष्ठभूमि: तेलंगाना के एक छोटे से गाँव कलुगोटला में जन्मी B Sumathi के पिता गाँव के सरपंच थे। संसाधनों की कमी के बावजूद उन्होंने बड़े सपने देखे।
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शिक्षा: उन्होंने एग्रीकल्चर साइंस की पढ़ाई की, उस्मानिया यूनिवर्सिटी से MBA किया और NALSAR से लॉ की डिग्री ली।
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करियर: 25 साल की उम्र में ग्रुप-I परीक्षा पास कर वह पहली महिला DySP बनीं और 2006 में IPS कैडर जॉइन किया।
माओवादी मोर्चे पर भी मनवाया लोहा
IPS B Sumathi केवल कानून-व्यवस्था ही नहीं, बल्कि खुफिया अभियानों में भी माहिर मानी जाती हैं। उनके नेतृत्व में करीब 591 माओवादियों ने आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में वापसी की। उनके काम करने का तरीका हमेशा से ही ‘फील्ड-हेवी’ रहा है, यानी वे दफ्तर के बजाय फील्ड में रहकर काम करना पसंद करती हैं।
क्यों जरूरी है B Sumathi जैसी अधिकारी?
आज जब महिलाएं अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित रहती हैं, तब B Sumathi जैसे अधिकारी उम्मीद जगाते हैं। उन्होंने साबित किया कि पुलिसिंग का मतलब केवल सत्ता का प्रदर्शन नहीं, बल्कि जनता के बीच उनकी समस्याओं को महसूस करना भी है। उनके इस कदम ने यह संदेश दिया है कि सुरक्षित समाज के लिए पुलिस को सड़कों पर सक्रिय रहना ही होगा।
