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Instagram प्राइवेसी में बड़ा फेरबदल: अब ‘End-to-End Encryption’ का साथ छोड़ रही है कंपनी; आपकी चैटिंग पर क्या होगा असर?

Digital Desk - Lucknow
Last updated: May 9, 2026 7:08 pm
Digital Desk - Lucknow
2 months ago
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Instagram: सोशल मीडिया की दुनिया में डेटा प्राइवेसी को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई है। दिग्गज टेक कंपनी मेटा (Meta) ने Instagram के लिए अपनी सुरक्षा नीति में एक चौंकाने वाला बदलाव करते हुए ‘एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन’ (E2EE) फीचर को पूरी तरह बंद कर दिया है। यह कदम मेटा की उस पुरानी प्रतिबद्धता के बिल्कुल विपरीत है, जिसमें कंपनी ने डिजिटल प्राइवेसी को “संचार का भविष्य” बताया था।

Contents
क्या है ‘एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन’ और इसके हटने के मायने?मेटा के इस फैसले के पीछे का तर्कबाल सुरक्षा बनाम व्यक्तिगत प्राइवेसी: एक नई जंगरिसर्च: सोशल मीडिया और बच्चों का गिरता मानसिक स्वास्थ्य

क्या है ‘एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन’ और इसके हटने के मायने?

सरल शब्दों में कहें तो एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन एक ऐसा डिजिटल लॉक था, जिसकी चाबी केवल भेजने वाले और प्राप्त करने वाले के पास होती थी। मेटा या कोई भी तीसरी संस्था इन संदेशों को सर्वर पर नहीं पढ़ सकती थी।

अब क्या बदलेगा? अब इंस्टाग्राम ‘स्टैंडर्ड एन्क्रिप्शन’ पर स्विच कर रहा है। इसका मतलब है कि:

  • सर्वर एक्सेस: मैसेज भेजने के दौरान तो सुरक्षित रहेंगे, लेकिन इंस्टाग्राम के सर्वर पर मेटा के पास उन्हें एक्सेस करने की तकनीकी क्षमता होगी।

  • डेटा शेयरिंग: कानूनी जांच या सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत, मेटा अब आपके निजी चैट, साझा किए गए फोटो, वीडियो और वॉयस नोट्स को देख और अधिकारियों के साथ साझा कर सकेगा।

  • मीडिया अलर्ट: मेटा ने उन यूजर्स को चेतावनी दी है जिन्होंने पहले से एन्क्रिप्टेड चैट्स का उपयोग किया है, कि वे अपनी जरूरी मीडिया फाइल्स और मैसेज डाउनलोड कर लें, क्योंकि यह फीचर अब पूरी तरह हटाया जा रहा है।

मेटा के इस फैसले के पीछे का तर्क

मेटा ने इस फीचर को वापस लेने के पीछे मुख्य रूप से ‘लो अडॉप्शन’ (कम उपयोग) का हवाला दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इंस्टाग्राम के बहुत ही कम प्रतिशत यूजर्स ने इस फीचर को मैन्युअल रूप से ऑन किया था। हालांकि, प्राइवेसी एक्सपर्ट्स का तर्क है कि चूंकि यह ‘बाय डिफॉल्ट’ ऑन नहीं था, इसलिए आम यूजर्स को इसके बारे में जानकारी ही नहीं थी।

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बाल सुरक्षा बनाम व्यक्तिगत प्राइवेसी: एक नई जंग

दिलचस्प बात यह है कि मेटा के इस कदम का NSPCC (National Society for the Prevention of Cruelty to Children) जैसे अंतरराष्ट्रीय बाल सुरक्षा संगठनों ने स्वागत किया है।

  • अपराधों पर लगाम: इन संगठनों का मानना है कि एन्क्रिप्शन की आड़ में अपराधी और बाल शोषण करने वाले लोग सुरक्षित बच निकलते थे।

  • डिटेक्शन: अब एन्क्रिप्शन हटने से एआई टूल्स और सुरक्षा टीमें संदिग्ध गतिविधियों और हानिकारक कंटेंट को आसानी से ट्रैक कर पाएंगी।

रिसर्च: सोशल मीडिया और बच्चों का गिरता मानसिक स्वास्थ्य

आर्टिकल के इस हिस्से में एक हालिया रिसर्च के डराने वाले आंकड़े भी सामने आए हैं, जो 8,000 बच्चों (10-14 वर्ष) के व्यवहार पर आधारित है:

  1. एकाग्रता में गिरावट: प्रतिदिन 30 मिनट से अधिक इंस्टाग्राम या स्नैपचैट का इस्तेमाल करने वाले बच्चों की ‘कंसंट्रेशन पावर’ में भारी कमी देखी गई है।

  2. स्क्रीन टाइम का जाल: शोध के अनुसार, 9 साल की उम्र में जो बच्चा 30 मिनट स्क्रीन पर बिताता है, 13 साल की उम्र तक वह प्रतिदिन 2.5 घंटे सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेम्स की गिरफ्त में आ जाता है।

यह भी पढ़े: AI और आपकी नौकरी: क्या सिर्फ तकनीक के बहाने आपको निकाला जा सकता है? चीन की अदालत ने तय किए नए नियम

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