विपक्षी दलों द्वारा चुनाव आयोग, ईवीएम और मतदाता सूचियों में कथित धांधली को लेकर बनाए जा रहे माहौल के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सीधे जनता की अदालत में जाकर जवाब देने का बड़ा रणनीतिक फैसला लिया है। हरियाणा के करनाल से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अगुवाई में निकली ‘Loktantra Bachao, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा केवल एक सामान्य राजनीतिक जुलूस नहीं है, बल्कि इसके पीछे मतदाताओं को जागरूक करने और विपक्षी नैरेटिव को काटने की एक सोची-समझी रणनीति काम कर रही है।
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर ध्यान केंद्रित
अक्सर देखा जाता है कि चुनाव प्रक्रिया, मतदाता सूची के पुनरीक्षण और फॉर्म भरने जैसे तकनीकी मुद्दों पर राजनीतिक दल केवल चुनाव के दौरान ही सक्रिय होते हैं। लेकिन बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के दिशा-निर्देशों के तहत शुरू किया गया यह दो-चरणीय अभियान सीधे तौर पर स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़ा हुआ है।
पार्टी कार्यकर्ताओं को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे गांव-गांव और मोहल्ले-मोहल्ले जाकर लोगों को वोटर लिस्ट की शुद्धता, नए मतदाताओं के नाम जोड़ने और फर्जी अथवा दोहरे नामों को हटवाने की संवैधानिक प्रक्रियाओं के बारे में शिक्षित करें। बीजेपी का मानना है कि पारदर्शी और सटीक मतदाता सूची ही मजबूत लोकतंत्र की सबसे पहली शर्त है।
विपक्षी आरोपों को बेअसर करने की सोची-समझी रणनीति
पिछले कुछ समय से कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल मतदाता सूचियों में वोटों की हेराफेरी और संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव के आरोप लगातार लगा रहे हैं। करनाल में हरियाणा बीजेपी अध्यक्ष अर्चना गुप्ता द्वारा राहुल गांधी पर बोला गया हमला इसी रणनीति का हिस्सा है। बीजेपी यह संदेश देना चाहती है कि वह रक्षात्मक रवैया अपनाने के बजाय आक्रामक तरीके से सच को जनता के सामने रखेगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकास एजेंडे और महिलाओं, युवाओं व किसानों के लिए चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं को इस अभियान के जरिए सीधे रेखांकित किया जा रहा है, ताकि विपक्ष के आरोपों की हवा निकाली जा सके।
बूथ स्तर पर कैडर की लामबंदी और भविष्य के संकेत
करनाल में हुए इस शक्ति प्रदर्शन में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की एक साथ मौजूदगी यह दर्शाती है कि पार्टी अपने संगठन को 24 घंटे और 365 दिन चुनावी मोड में रखने में विश्वास रखती है। पहले चरण की भारी सफलता के बाद 11 नवंबर से 30 नवंबर तक चलने वाला दूसरा चरण राज्य के अन्य जिलों और कस्बों को कवर करेगा।
यह भी पढ़ें: Cabinet Decisions: फास्ट ट्रैक अदालतों के विस्तार से महिलाओं और बच्चों को मिलेगा त्वरित न्याय
इस दौरान नुक्कड़ सभाएं, पदयात्राएं और चौपाल चर्चाएं आयोजित की जाएंगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के जमीनी जन-जागरूकता अभियानों के जरिए बीजेपी न केवल अपने कैडर को सक्रिय रख रही है, बल्कि आने वाले दिनों में किसी भी राजनीतिक या चुनावी चुनौती का सामना करने के लिए अपने जमीनी तंत्र को और अधिक पुख्ता बना रही है।


