दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित विपक्षी रैली के बाद कांग्रेस पार्टी के भीतर शुरू हुई सफाई मुहिम ने अब एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया है। एक तरफ जहां कांग्रेस आलाकमान और युवा संगठन अपने कैडर में कड़ा अनुशासन का संदेश देने के लिए 200 से अधिक Youth Congress के नेताओं को निलंबित कर चुके हैं, वहीं दूसरी तरफ बीजेपी इसे कांग्रेस के भीतर मची भगदड़ और असंतोष के रूप में भुनाने की कोशिश कर रही है।
मध्य प्रदेश से लेकर दिल्ली तक संगठन में हड़कंप
मध्य प्रदेश यूथ कांग्रेस द्वारा 60 पदाधिकारियों—जिसमें जिला अध्यक्ष से लेकर प्रदेश महासचिव तक शामिल हैं—को एक झटके में बाहर का रास्ता दिखाए जाने से पार्टी के प्रांतीय संगठन में हड़कंप मच गया है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि आलाकमान इस बार किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। ‘वोट चोरी’ और चुनावी प्रक्रियाओं के खिलाफ बुलाए गए इतने बड़े मंच पर पदाधिकारियों की अनुपस्थिति को नेतृत्व ने सीधे तौर पर पार्टी की पीठ में छुरा घोंपने जैसा माना है।
यही वजह है कि राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देश पर विभिन्न राज्यों में अनुपस्थित रहे पदाधिकारियों की सूची तैयार कर सिलसिलेवार निलंबन के आदेश जारी किए जा रहे हैं।
बीजेपी का हमला और इमरान मसूद का कड़ा रुख
जैसे ही बीजेपी नेताओं ने इस बड़े पैमाने पर हुए निलंबन को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधना शुरू किया और इसे नेतृत्व की विफलता बताया, सहारनपुर से कांग्रेस के फायरब्रांड सांसद इमरान मसूद ने मोर्चा संभाल लिया। इमरान मसूद के इस बयान—”बीजेपी कौन होती है सवाल उठाने वाली”—ने यह साफ कर दिया है कि कांग्रेस अपने अंदरूनी मामलों में बीजेपी की किसी भी तरह की बयानबाजी को बर्दाश्त नहीं करेगी।
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राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इमरान मसूद का यह कड़ा तेवर कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में यह संदेश देने के लिए है कि पार्टी अपने फैसलों पर मजबूती से खड़ी है। वहीं दूसरी ओर, बीजेपी इस मुद्दे को उछालकर यह साबित करने की होड़ में है कि कांग्रेस का जमीनी कैडर अपने ही शीर्ष नेतृत्व के अभियानों से जुड़ाव महसूस नहीं कर रहा है। आने वाले दिनों में यह अंदरूनी अनुशासन की जंग दोनों पार्टियों के बीच और तीखी राजनीतिक बहस का कारण बन सकती है।


