नगीना सांसद और आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को खुली चुनौती दे दी है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बिजनौर जिले की किसी भी विधानसभा सीट से उनके सामने चुनाव लड़कर दिखाएं। अगर वे उन्हें हरा नहीं पाए तो राजनीति छोड़ देंगे।
यह चुनौती रविवार को अमरोहा के हसनपुर में आयोजित एक जनसभा में दी गई। चंद्रशेखर आजाद पार्टी प्रत्याशी शाहनवाज चौधरी के समर्थन में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि बिजनौर में आठ विधानसभा सीटें हैं – दो आरक्षित और छह सामान्य। मुख्यमंत्री इनमें से किसी भी सीट पर आकर मुकाबला करें।
चंद्रशेखर आजाद ने 2022 के विधानसभा चुनाव का जिक्र भी किया। उन्होंने बताया कि तब वे मुख्यमंत्री के गृह जनपद गोरखपुर की सदर सीट पर उनके खिलाफ चुनाव लड़ने गए थे। उनकी जमानत जब्त हो गई थी, लेकिन उन्होंने मैदान में उतरकर मुकाबला किया था। अब उन्होंने पलटकर चुनौती दी है कि मुख्यमंत्री उनके क्षेत्र में आकर परीक्षा दें।
उन्होंने चुनौती के साथ एक शर्त भी रखी। चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि चुनाव बैलेट पेपर से होने चाहिए। उन्होंने ईवीएम पर सवाल उठाते हुए बैलेट पेपर से चुनाव कराने की बात कही। उन्होंने दावा किया कि अगर बिना बेईमानी के चुनाव हो तो वे मुख्यमंत्री को हराकर भेज सकते हैं।
जनसभा में चंद्रशेखर आजाद ने कई मुद्दे भी उठाए। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, किसानों के गन्ना भुगतान और बुलडोजर कार्रवाई जैसे विषयों पर सरकार की आलोचना की। उन्होंने वोट चोरी के आरोप भी दोहराए और कहा कि लोकतंत्र बचाने के लिए संघर्ष जारी रहेगा।
यह चुनौती उत्तर प्रदेश की सियासत में नया मोड़ लाई है। इससे पहले समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव भी मुख्यमंत्री को अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती दे चुके हैं। अब चंद्रशेखर आजाद ने बिजनौर से चुनौती देकर राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है।
बिजनौर जिले में वर्तमान में कई सीटें भाजपा के पास हैं। चंद्रशेखर आजाद ने इन सीटों का नाम लेते हुए कहा कि बढ़ापुर, धामपुर, चांदपुर, बिजनौर शहर या नजीबाबाद – जहां चाहें आ जाएं। उन्होंने कहा कि सीना ठोककर मुकाबला करें।
चंद्रशेखर आजाद का यह बयान दलित राजनीति और बहुजन समाज में चर्चा का विषय बन गया है। वे आजाद समाज पार्टी के जरिए अपनी स्वतंत्र पहचान बनाने की कोशिश कर रहे हैं। नगीना लोकसभा सीट से सांसद चुने जाने के बाद उनकी राजनीतिक सक्रियता बढ़ी है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तरफ से इस चुनौती पर अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन यूपी की सियासत में ऐसे चैलेंज आम हो गए हैं। विपक्षी नेता मुख्यमंत्री को विभिन्न सीटों से ललकार रहे हैं, जबकि सत्ताधारी दल इसे चुनावी बयानबाजी बता रहे हैं।
चंद्रशेखर आजाद ने साफ कर दिया है कि वे सिर्फ बयान नहीं दे रहे। उन्होंने कहा कि अगर मुख्यमंत्री आते हैं तो वे मैदान में उतरेंगे और अगर हार गए तो राजनीति छोड़ देंगे। यह शर्त उनके बयान को और गंभीर बनाती है।
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यह राजनीतिक घमासान जारी रहने वाला है। चंद्रशेखर आजाद की चुनौती ने एक बार फिर साबित कर दिया कि विपक्षी नेता मुख्यमंत्री को सीधे टक्कर देने की भाषा बोल रहे हैं। अब देखना यह है कि इस चुनौती का आगे क्या सियासी असर पड़ता है।
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