।मई दिवस है , और आज ही दिन भारतीय राजनीति के एक जबरदस्त शख्सियत का जन्मदिन भी है जिसने सियासत के दायरे को चौतरफा विस्तार दिया उस शख्स का नाम है मधुलिमये । मधुलिमये राजनीति में थे , दमदारी और खुद्दारी के साथ जिसने कभी अपने उसूल को तोड़ा नही और सच पर अड़े रहे । सदन की गरिमा और उसके जज्बे का जब इतिहास खंगाला जायगा तो वहां मधुलिमये अपनी अलग की पहचान और तेवर लिए मिलेंगे । जब मधु लिमये सत्ता पक्ष की ओर नजर उठाते तो हुकूमत की घिघ्घी बंध जाती थी । इस विषय पर अनेक दोस्त लोग लिख रहे हैं । प्रोफेसर राजकुमार जैन जी का लंबा आलेख मधु जी पर आ रहा है , उसे हम यहीं इसी पेज पर उठाएंगे पढियेगा । हम दूसरे हिस्से पर चलते हैं । जब हम पहली बार मिले 42 सुराज की लड़ाई , समाजवादियों की रहनुमाई में लड़ा जा रहा था , बापू समेत पूरी कांग्रेस जेल में थी । संघ शुरू से अंग्रेजों के साथ था । साम्यवादी अपनी ‘अंतरराष्ट्रीय ‘ चाल चलन के चलते अंग्रेजो के साथ हो गए थे । समाजवादी आंदोलन इस काल मे जबरदस्त विस्तार लेता है । हमारा जिला भी अछूता नही रहा लेकिन आजादी के बाद जब समाजवादी कांग्रेस से अलग हुए तो समाजवादियों का बड़ा हिस्सा अपने समाजवादी नेहरू के साथ कांग्रेस में ही रह गया । हमारा जिला जौनपुर के समाजवादी भी कांग्रेस में गए जो बचे रह गए वो सड़क पर आ गए । 67 का अंग्रेजी हटाओ आंदोलन युवजनो में जोश लेकर आया और हम उसमे कूद पड़े । 69 में बहुत कम उम्र में जेल गया और 27 दिन बाद छूटा । पहली बार मधु जी से इसी साल मुलाकात हुई । जौनपुर के बगल का जिला है प्रतापगढ़ । वह समाजवादियों का गढ़ था । उसी प्रतापगढ़ और जैनपुर की सीमा पर हमारा घर है । एक दिन पता चला हमारे बगल की बाजार अमरगढ़ जो कि प्रतापगढ़ में दर्ज है वहां समाजवादी नेता मधु लिमये आ रहे हैं । हम भी गए श्रोता होकर लेकिन वापस लौटे तो हम नेता हो गए थे । अमरगढ़ के बगल एक इंटर कालेज ककरहवा के पांडे जी थे वही सदर थे उन्होंने ने ही हमारा परिचय मधु जी से यह बताते हुए कराया कि ये सबसे कम उम्र का सेनानी है अभी जेल काट कर आया है । मधु जी ने एक कुर्सी और मंगवाया और अपने बगल में बिठाया । आदत अपने आप बिगड़ गई , जब संघर्ष को पुरुषार्थ से जोड़ कर किसी कार्यकर्ता को ऊपर उठा दिया जाय तो वह उस संघर्ष के प्रति ज्यादा ईमानदार रहेगा , भाव स्थायी होगा । इस तरह हम नेता हो गए । बाद बाकी अनगिनत वाक्यात हैं । एक एक कर आगे बढूंगा । सच्ची कहता हूं , जारी रहेगा । सादर नमन मधु जी को जारीलेखक चंचल सिंह

