नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर मचे घमासान के बीच राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को एक बड़ा झटका लगा है। पार्टी ने उन्हें राज्यसभा में ‘उपनेता’ के पद से तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। उनकी जगह अब सांसद अशोक मित्तल राज्यसभा में पार्टी के नए उपनेता होंगे। इतना ही नहीं, आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को एक आधिकारिक नोटिस भेजकर स्पष्ट कहा है कि अब राघव चड्ढा को सदन में पार्टी के नेता के तौर पर बोलने का मौका न दिया जाए।
बोलने के समय पर चली ‘कैंची’
सूत्रों के अनुसार, इस फैसले के बाद सदन में राघव चड्ढा के बोलने के आवंटित समय (Allocation Time) में भी भारी कटौती होने वाली है। इसका सीधा मतलब यह है कि अब वे सदन में पहले की तरह विस्तार से अपनी बात नहीं रख पाएंगे। पिछले कुछ समय से चड्ढा संसद में जनता से जुड़े मुद्दे, जैसे एयरपोर्ट पर ₹10 की चाय और डिलीवरी बॉयज की समस्याओं को जोर-शोर से उठा रहे थे, लेकिन अब उनके संबोधन पर पार्टी ने अंकुश लगा दिया है।
क्यों गिरी राघव चड्ढा पर गाज? (अनुशासनहीनता का आरोप)
हालांकि आम आदमी पार्टी ने अभी तक इस कार्रवाई के पीछे कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया है, लेकिन सियासी गलियारों में इसके पीछे ‘अनुशासनहीनता’ और पार्टी लाइन से हटकर काम करने को मुख्य वजह माना जा रहा है।
पार्टी सूत्रों का दावा है कि:
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राघव चड्ढा कई बार पार्टी नेतृत्व से चर्चा किए बिना ही महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी राय रख रहे थे।
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सदन में वे किन विषयों पर बात करेंगे, इसकी जानकारी भी वे पार्टी को नहीं दे रहे थे।
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पार्टी ने उन्हें पहले भी चेतावनी दी थी, लेकिन उनके रवैये में सुधार न होने पर यह सख्त कदम उठाया गया।
शराब कांड और केजरीवाल की रिहाई पर ‘चुप्पी’ बनी वजह?
चर्चा यह भी है कि राघव चड्ढा पिछले कुछ समय से पार्टी के मुख्य फैसलों और गतिविधियों से दूरी बनाए हुए थे। हाल ही में जब आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को शराब कांड मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने बरी किया, तब भी राघव चड्ढा की ओर से कोई खास प्रतिक्रिया या जश्न देखने को नहीं मिला। इसी ‘खामोशी’ को पार्टी नेतृत्व ने गंभीरता से लिया और उन्हें महत्वपूर्ण पद से बेदखल कर दिया।
फिलहाल, इस कार्रवाई के बाद आम आदमी पार्टी के भीतर आंतरिक कलह की खबरें एक बार फिर तेज हो गई हैं। देखना दिलचस्प होगा कि राघव चड्ढा इस पर क्या रुख अपनाते हैं।
