Category: साहित्य

पट्टीदार…….!

निभाने में दुश्मनी प्यारे….!हम दोनों ही….इस क़दर वफादार हैं….कि कहीं राह में भी….कभी-कभार ही होता….!एक दूजे का दीदार है….जलन एक दूजे के लिए,इस क़दर परवान है…कि….मानते हैं दोनों ही….!ख़ुद को…

परिवर्तन ऐसा….कि….!

मुझे अभी भी याद हैं…..!मेरे बचपन के दिनों में,अगल-बगल से उठते हुएहर एक सवाल……छोटी-मोटी बातों पर,घर-मोहल्ले,गाँव-देश मेंजब-तब हुए….ढेर सारे बवाल…याद है मुझे….वह सब भी….!जिसे लोग कहा करते थे,खोपड़ी या जिअरा…

कुछ मजबूर होकर…..!

सुनो दुनियावालों…..!सच वही….जो जी रहा हूँ….मैं….यहाँ आज-कल…इसमे निष्कर्ष हैं वे सभी….!जो अब तलक आये हैं निकल…प्यारे…पढ़ाई थी मैंने गिनतियाँ…जिन्हें नादान जानकर….नियति का खेल तो देखो…पहाड़ा पढ़ा रहे हैं वही मुझे,नादान…

परमारथ के कारने……!

पहाड़…..!दुनिया की नजरों में,आसमान छूने को…लालायित दिखता है….पर…उसके अन्तर्मन से पूछो…शायद….नहीं भाता है उसको…तन के खड़े रहना…चाहता है वह भी….!मैदान की तरह समतल हो जाना…नहीं चाहता है वह,जड़ों से इस…

बड़ा ही हैरत-अंगेज है….!

किसी आविष्कारक ने….!दिमाग लगाकर…जूता बनाया होगापहले खुद प्रयोग किया होगा फिर..!दूसरों को पहनना सिखाया होगा…इसी बहाने लोगों के पाँवों को….धूल,गरदा,कीचड़…और…काँटों की चुभन से बचाया होगा….मित्रों….उसके इस अविष्कार की….महत्ता तो देखो….!बचपन…

निर्माण और शिल्पकला के देवता भगवान विश्वकर्मा

रमेश सर्राफ धमोरा भगवान विश्वकर्मा को निर्माण एवं सृजन का देवता माना जाता है। हिंदू धर्म में इन्हें सृष्टि के दिव्य शिल्पकार, देवताओं के वास्तु विशेषज्ञ और पहले इंजीनियर के…

जीवन चक्र: महासंग्राम, चुनौतियाँ और नई चेतना का संदेश | डॉ. संचयिता देव

महासंग्राम की बेला परमृत्यु का नया संकेत हैनयी चेतना को जगाता हैनए-नए कर्तव्यों को निभाता हैयह कैसा जीवन चक्र हैसमझ से परे है- कैसे-कैसे रास्ते दिखता हैनयी-नयी चुनौती दिलाता हैमनोभावों…

तमिलनाडु हिंदी साहित्य अकादमी द्वारा डॉ राकेश पांडेय सम्मानित

चेन्नई: हिंदी पत्रकारिता की 200 वर्षों का गौरवशाली इतिहास है। इस संदर्भ में तमिलनाडु हिंदी साहित्य अकादमी चेन्नई की ओर से एक राष्ट्रीय सेमिनार और सम्मान समारोह का आयोजन किया…

*सखी,सावन,विरह और बाढ़..!*

सखी री….! तुम तो सब कछु जानत… जब तक रही मैं कुँवारि री…! सुन्दर सपन देखि-देखि, नयनन मा ही…पिय को…! भरि-भरि लेती…मैं अँकवार री… अब जबकि नगर सासुरे मा… झूम…

*कलम के आन्दोलनकारी प्रेमचन्द*

हिन्दी साहित्य में प्रेमचन्द सबसे ज्यादा लोकप्रिय और पढ़े जाने वाले साहित्यकार हैं, जिनके साहित्य के विषय में देश के विभिन्न विद्वान आलोचकों ने अपने-अपने तरीके से बात की है।…