गाजियाबाद/ उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच सियासी टकराव एक बार फिर चर्चा में है। गाजियाबाद के लोनी में मेधावी छात्राओं को साइकिल वितरित करने का कार्यक्रम रुकने के बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने ‘साइकिल सत्याग्रह’ का ऐलान किया है। इस मामले को लेकर प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।
क्या है पूरा मामला?
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, गाजियाबाद के लोनी क्षेत्र के गढ़ी कट्टैया गांव में 25 अक्टूबर को पीडीए सम्मान समारोह आयोजित किया जाना था। इस कार्यक्रम में 10वीं और 12वीं कक्षा में 75 प्रतिशत या उससे अधिक अंक हासिल करने वाली करीब 1,000 मेधावी छात्राओं को साइकिल वितरित करने की योजना थी।
आयोजकों का कहना था कि साइकिल मिलने से छात्राओं को स्कूल आने-जाने में सुविधा होगी। कार्यक्रम के लिए पंडाल और मंच भी तैयार किए गए थे। हालांकि, आयोजन से पहले प्रशासनिक कार्रवाई के बाद कार्यक्रम नहीं हो सका। रिपोर्टों में बताया गया है कि कार्यक्रम स्थल से टेंट और मंच हटाए गए।
अखिलेश यादव ने क्या ऐलान किया?
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्राओं को साइकिल देने के कार्यक्रम में बाधा डालना शिक्षा और छात्राओं के हितों के खिलाफ है।
अखिलेश यादव ने कहा कि पीडीए समाज की प्रतिभाशाली बेटियों को साइकिल देने का संकल्प जारी रहेगा। यदि कार्यक्रम को दोबारा रोकने की कोशिश की गई, तो कार्यकर्ता ‘साइकिल सत्याग्रह’ के तहत घर-घर जाकर साइकिल वितरित करेंगे।
सपा प्रमुख ने इस पूरे घटनाक्रम को निंदनीय बताते हुए भाजपा की सोच पर भी सवाल उठाए। उनके बयान के बाद यह मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।
डिंपल यादव ने भी जताई नाराजगी
सपा सांसद डिंपल यादव ने भी छात्राओं के साइकिल वितरण कार्यक्रम को रोके जाने पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बेटियों के सपनों और उनके भविष्य को राजनीति से ऊपर रखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, छात्राओं के सम्मान और शिक्षा से जुड़े कार्यक्रम में इस तरह की कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।
प्रशासन ने क्या कहा?
दूसरी ओर, लोनी नगर पालिका प्रशासन की ओर से अनुमति संबंधी नियमों का हवाला दिया गया। रिपोर्टों के अनुसार, प्रशासन का कहना है कि कार्यक्रम स्थल पर बिना अनुमति टेंट और मंच लगाए जा रहे थे। इस मामले में आयोजक पर 10,86,930 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।
2027 चुनाव से पहले बढ़ सकती है सियासी गर्मी
इस घटना ने एक बार फिर बुलडोजर कार्रवाई, प्रशासनिक अनुमति और राजनीतिक कार्यक्रमों को लेकर बहस छेड़ दी है। समाजवादी पार्टी इसे छात्राओं के हित और पीडीए समाज से जोड़कर उठा रही है, जबकि प्रशासन की ओर से अनुमति का मुद्दा सामने रखा गया है।
अब देखना होगा कि साइकिल वितरण कार्यक्रम दोबारा कब आयोजित होता है और अखिलेश यादव के ‘साइकिल सत्याग्रह’ के ऐलान के बाद यह विवाद आगे क्या रूप लेता है।


