कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के दो प्रमुख नेता आशुतोष रांका और सौरव दास की न्यायिक हिरासत दो दिन और बढ़ा दी गई है। दोनों को 21 अक्टूबर तक तिहाड़ जेल में रहना होगा। अगली पेशी 21 अक्टूबर को दोपहर करीब 2 बजे तय की गई है।
19 अक्टूबर को दोनों नेताओं को मंदर मार्ग पुलिस स्टेशन स्थित स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। उनकी पांच दिन की हिरासत खत्म हो चुकी थी। पुलिस ने हिरासत बढ़ाने की मांग की। कोर्ट ने इसे स्वीकार करते हुए दो दिन की अतिरिक्त न्यायिक हिरासत का आदेश दे दिया।
सीजेपी ने इस फैसले को तीखा जवाब दिया है। पार्टी की लीगल हेड रत्ना सिंह ने कहा कि उन्होंने जीवन में इतना बेतुका नहीं देखा। उन्होंने आरोप लगाया कि सुनवाई में अभियोजन पक्ष ने सिर्फ अनुमान लगाए और कोई ठोस तर्क नहीं दिया। पार्टी का कहना है कि जमानतदारों को बार-बार अस्पष्ट आधार पर खारिज किया जा रहा है और पूरी प्रक्रिया जानबूझकर लंबी खींची जा रही है।
रांका और दास को 13 अक्टूबर को हिरासत में लिया गया था। जंतर मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जाने के बाद भी दोनों तिरंगा लेकर वहां पहुंचे थे। आरोप है कि उन्होंने बंद गेट को पार किया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर नारेबाजी की। 14 अक्टूबर को उन्हें पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। कोर्ट ने तब कहा था कि दोनों ने पहले दिए गए शांति बनाए रखने के बॉन्ड का उल्लंघन किया है।
सीजेपी लगातार आरोप लगा रही है कि दोनों नेताओं को बिना किसी ठोस आरोप के जेल में रखा जा रहा है। पार्टी का कहना है कि यह प्रदर्शन का अधिकार दबाने की कोशिश है। अभिजीत दीपके और अन्य नेता पहले भी कह चुके हैं कि राज्य देरी की रणनीति अपना रहा है ताकि आंदोलन की गति थम जाए।
कोर्ट के आदेश में पिछले आचरण का जिक्र किया गया। कहा गया कि दोनों नेताओं ने 11 अक्टूबर को दिए गए आश्वासनों का पालन नहीं किया। जमानतदारों के दस्तावेजों में कुछ विसंगतियां भी बताई गईं। सीजेपी का पक्ष है कि ये सब बहाने हैं और असल मकसद उन्हें अंदर रखना है।
प्रदर्शन के अधिकार पर उठे सवाल
यह मामला सिर्फ दो नेताओं की हिरासत तक सीमित नहीं रह गया है। जंतर मंतर को डी-नोटिफाई करने के फैसले, एसआईआर प्रक्रिया और चुनाव आयोग पर उठे सवालों के बीच यह घटनाक्रम राजनीतिक चर्चा का केंद्र बना हुआ है। विपक्षी दल और युवा संगठन इसे विरोध के अधिकार पर हमला बता रहे हैं।
अगली पेशी 21 अक्टूबर को है। सीजेपी ने साफ कहा है कि अगर दोनों को तब भी रिहा नहीं किया गया तो उच्च अदालतों में चुनौती दी जाएगी। पार्टी कानूनी विकल्पों की तैयारी कर रही है।
दोनों नेता पिछले एक हफ्ते से ज्यादा समय से जेल में हैं। उनकी रिहाई में बार-बार देरी होने से सीजेपी कार्यकर्ता और समर्थक नाराज हैं। पार्टी का आरोप है कि प्रक्रिया को जटिल बनाकर लोकतांत्रिक अधिकारों को कमजोर किया जा रहा है।
अब 21 अक्टूबर की पेशी पर सबकी नजरें टिकी हैं। फैसला क्या आता है, यह तय करेगा कि दोनों नेता बाहर आते हैं या हिरासत और लंबी खिंचती है। सीजेपी ने दोहराया है कि वे पीछे नहीं हटेंगे और अपना संघर्ष जारी रखेंगे।
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