CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने आज अपना नया इंस्टाग्राम रील पोस्ट किया है। वीडियो में वे साफ और सीधे शब्दों में कह रहे हैं –
“तिरंगे से प्यार करने वाले सभी लोग 16 अक्टूबर को शाम 5 बजे सेंट्रल पार्क, कनॉट प्लेस आएं।
Waving a Tiranga is not a crime.”
ये उनके अपने शब्द हैं। कोई घुमा-फिराकर बात नहीं। कोई अतिरिक्त व्याख्या नहीं। बस सीधा संदेश – तिरंगा लहराना अपराध नहीं है। और जो इससे प्यार करते हैं, वे 16 अक्टूबर शाम 5 बजे दिल्ली के सेंट्रल पार्क, कनॉट प्लेस पहुंचें।
ये बुलावा उस वक्त आया है जब उनके दो करीबी साथी – सौरव दास और आशुतोष रांका – तिहाड़ जेल में हैं। उनका आरोप क्या था? जंतर मंतर पर तिरंगा लेकर जाना और भारत माता की जय कहना। पुलिस ने उन्हें ट्रेस्पासिंग और बॉन्ड तोड़ने के आरोप में 5 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
अभिजीत दीपके खुद उस दिन घटना में शामिल नहीं थे। लेकिन उनके साथियों के जेल जाने के बाद उन्होंने जो रील पोस्ट की है, वो साफ जवाब है। वे कह रहे हैं कि तिरंगा लहराना अपराध नहीं है। और अब वे उन सभी लोगों को बुला रहे हैं जो तिरंगे से प्यार करते हैं।
जेल में तिरंगा, बाहर नारा
पिछले कुछ दिनों में दिल्ली में जो कुछ हुआ, वो साधारण नहीं था। जंतर मंतर को प्रदर्शन स्थल से हटा दिया गया। जगह को बैरिकेड से घेर दिया गया। फिर भी CJP के कार्यकर्ता तिरंगा लेकर पहुंचे। नारे लगाए। ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया।
अब जब दो लीडर जेल में हैं, तो अभिजीत दीपके का संदेश और साफ हो गया है। वे तिरंगे को लेकर कोई समझौता नहीं कर रहे। वे कह रहे हैं – Waving a Tiranga is not a crime। और जो इससे प्यार करते हैं, वे 16 अक्टूबर को सेंट्रल पार्क आएं।
ये सिर्फ एक जगह बदलने का ऐलान नहीं है। ये उस जिद का ऐलान है जो कहती है कि तिरंगा फहराने का अधिकार किसी भी बैरिकेड से बड़ा है।
तिरंगा किसका है?
जब युवा तिरंगा लेकर विरोध करते हैं तो उन्हें जेल भेज दिया जाता है। जब कोई संगठन दशकों तक अपने मुख्यालय पर तिरंगा नहीं फहराता, तो सवाल चुपचाप दब जाते हैं। यही दोहरा मापदंड आज CJP के आंदोलन का केंद्र बन चुका है।
अभिजीत दीपके का ये नया रील उसी दोहरे मापदंड पर चोट करता है। वे कह रहे हैं कि तिरंगा लहराना अपराध नहीं है। और अब वे पूरे देश के उन लोगों को बुला रहे हैं जो इससे प्यार करते हैं। 16 अक्टूबर शाम 5 बजे सेंट्रल पार्क, कनॉट प्लेस।
ये बुलावा सिर्फ दिल्ली वालों के लिए नहीं है। ये उन सभी युवाओं के लिए है जो पिछले कई दिनों से सड़कों पर हैं, जो हिरासत में लिए गए, जो पूछ रहे हैं कि क्या तिरंगा लहराना अब देशद्रोह है।
आंदोलन रुकने वाला नहीं
CJP का आंदोलन शुरू से ही ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है। जंतर मंतर पर रोक लगाई गई, लीडर्स को प्लेन से उठाया गया, हजारों युवा हिरासत में लिए गए। फिर भी आंदोलन थमा नहीं।
अब जब दो नेता तिहाड़ में हैं, तो अभिजीत दीपके का संदेश और तेज हो गया है। वे तिरंगे को लेकर कोई समझौता नहीं कर रहे। वे कह रहे हैं – तिरंगा लहराना अपराध नहीं है। और जो इससे प्यार करते हैं, वे 16 अक्टूबर को सेंट्रल पार्क आएं।
ये नारा अब सिर्फ CJP का नहीं रह गया है। ये उन हजारों युवाओं का नारा बन चुका है जो पूछ रहे हैं – क्या तिरंगा लहराना अब अपराध है?
जवाब 16 अक्टूबर को शाम 5 बजे सेंट्रल पार्क में मिल सकता है। अभिजीत दीपके का संदेश साफ है। तिरंगा फहराना अपराध नहीं। और जो इससे प्यार करते हैं, वे वहां पहुंचें।
कार्यक्रम की जानकारी
16 अक्टूबर · शाम 5 बजे · सेंट्रल पार्क, कनॉट प्लेस, दिल्ली


