Yamunanagar में ठगी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक व्यक्ति को बायो गैस प्लांट में निवेश और मोटा मुनाफा कमाने का झांसा देकर 12 लाख रुपये की चपत लगा दी गई। पीड़ित की शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी सहित विभिन्न धाराओं में केस दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू कर दी है।
हरियाणा के यमुनानगर जिले में शातिर ठग नए-नए हथकंडे अपनाकर भोले-भाले नागरिकों को निशाना बना रहे हैं। ताजा मामले में आरोपियों ने पीड़ित को पर्यावरण संरक्षण और वैकल्पिक ऊर्जा के क्षेत्र में बायो गैस प्लांट स्थापित करने की योजना में साझेदारी का प्रलोभन दिया था। आरोपियों ने दावा किया था कि इस प्रोजेक्ट में पूंजी लगाने के बाद हर महीने बंपर मुनाफा मिलेगा।
Yamunanagar में ठगी का पूरा मामला क्या है?
पीड़ित व्यक्ति ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में बताया कि कुछ समय पहले उसकी मुलाकात ऐसे व्यक्तियों से हुई, जिन्होंने खुद को बायो गैस प्लांट विशेषज्ञ और प्रोजेक्ट कंसलटेंट के रूप में पेश किया। आरोपियों ने उसे बड़े स्तर पर स्थापित होने वाले एक प्लांट की रूपरेखा दिखाई और सरकारी सब्सिडी के साथ-साथ निजी बिक्री से होने वाले बड़े मुनाफे के झूठे आंकड़े प्रस्तुत किए।
आरोपियों की चिकनी-चुपड़ी बातों में आकर पीड़ित ने उनके प्रस्ताव पर भरोसा कर लिया। इसके बाद आरोपियों ने एग्रीमेंट और सरकारी मंजूरी के नाम पर कागजी औपचारिकताएं पूरी करने का नाटक रचा और पीड़ित से किस्तों में रकम की मांग शुरू कर दी।
मुनाफे का लालच देकर बैंक खातों में ट्रांसफर कराए रुपये
शिकायतकर्ता के अनुसार, आरोपियों ने बायो गैस प्लांट के सेटअप, मशीनों की खरीद और जमीन की लीज डीड का बहाना बनाकर विभिन्न तारीखों में करीब 12 लाख रुपये अपने बैंक खातों में ट्रांसफर करवा लिए। जब काफी समय बीत जाने के बाद भी धरातल पर किसी भी प्रकार के बायो गैस प्लांट का काम शुरू नहीं हुआ, तब पीड़ित को अनहोनी की आशंका हुई।
पीड़ित ने जब आरोपियों से प्रोजेक्ट की प्रगति रिपोर्ट मांगी और अपने निवेश किए गए रुपयों का हिसाब मांगा, तो आरोपी टालमटोल करने लगे। कुछ दिनों बाद आरोपियों ने फोन उठाना बंद कर दिया और संपर्क के सभी रास्ते बंद कर लिए। जब पीड़ित उनके दिए गए पते पर पहुंचा, तो पता चला कि वहां ऐसा कोई कार्यालय ही मौजूद नहीं था।
इसके बाद पीड़ित को यह स्पष्ट हो गया कि वह एक सुनियोजित वित्तीय धोखाधड़ी का शिकार हो चुका है। यमुनानगर में ठगी की इस गंभीर वारदात के बाद पीड़ित ने तुरंत स्थानीय पुलिस थाने पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया
मामले की गंभीरता को देखते हुए यमुनानगर पुलिस ने तुरंत प्रभाव से प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों के बैंक खातों और कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (सीडीआर) को खंगाला जा रहा है। जिन बैंक खातों में 12 लाख रुपये की रकम ट्रांसफर हुई है, उन्हें फ्रीज कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
पुलिस के अनुसार, साइबर सेल और आर्थिक अपराध शाखा की टीमें संयुक्त रूप से इस गिरोह की तलाश में जुटी हुई हैं। प्राथमिक जांच में यह भी आशंका जताई जा रही है कि इस गिरोह ने इसी तरह के फर्जी प्रोजेक्ट्स का नाम लेकर अन्य लोगों को भी अपना शिकार बनाया हो सकता है।
फर्जी निवेश योजनाओं से कैसे रहें सतर्क?
पुलिस प्रशासन और आर्थिक अपराध विशेषज्ञों ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी प्रकार की अनधिकृत निवेश योजना में पैसा लगाने से पहले पूरी सतर्कता बरतें:
- किसी भी कंपनी या प्लांट में निवेश करने से पहले उसके रजिस्ट्रेशन और सरकारी अप्रूवल की गहनता से पड़ताल करें।
- अस्वाभाविक रूप से अधिक रिटर्न या गारंटीड मुनाफे का वादा करने वाली स्कीमों से पूरी तरह दूर रहें।
- कागजी समझौतों और कानूनी दस्तावेजों की जांच किसी अनुभवी वकील या विशेषज्ञ से जरूर कराएं।
- अज्ञात या गैर-प्रमाणित व्यक्तियों के बैंक खातों में बिना उचित सत्यापन के मोटी रकम ट्रांसफर न करें।
यह भी पढ़ें: PM के गढ़ में Akhilesh Yadav की हुंकार: वाराणसी से साधेंगे पूर्वांचल के ‘पटेल’ वोटर्स!
फिलहाल यमुनानगर में ठगी के इस मामले में पुलिस साक्ष्य जुटा रही है। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि आरोपियों के ठिकानों पर दबिश दी जा रही है और जल्द ही पूरे गिरोह को बेनकाब कर गिरफ्तार कर लिया जाएगा, ताकि पीड़ित को उसका डूबा हुआ पैसा वापस दिलाया जा सके।


