–विवेक कुमार उपाध्याय
भारत ने 7 मई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर करारा प्रहार करते हुए एक बड़ी सफलता हासिल की। इस ऑपरेशन में भारत ने पाकिस्तान के 9 आतंकी अड्डों को निशाना बनाकर तबाह कर दिया। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि इस ऑपरेशन में IC-814 कंधार हाईजैक का मास्टरमाइंड अब्दुल रऊफ अजहर मारा गया।
कौन था अब्दुल रऊफ अजहर?
अब्दुल रऊफ अजहर जैश-ए-मोहम्मद के संस्थापक मसूद अजहर का छोटा भाई था। यह वही आतंकी है जिसने 1999 में इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट IC-814 के हाईजैक की साजिश रची थी, जिसमें यात्रियों को अफगानिस्तान के कंधार ले जाया गया था।
रऊफ का नाम भारत ही नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर मोस्ट वॉन्टेड आतंकियों की सूची में शामिल था। अमेरिका, फ्रांस और अन्य देशों की सुरक्षा एजेंसियां भी उस पर निगरानी रख रही थीं।
रऊफ की भूमिका सिर्फ प्लानर की नहीं थी
रऊफ केवल एक साजिशकर्ता नहीं था, बल्कि वह: भारत विरोधी रणनीति तैयार करता था
घुसपैठ और हथियारों की सप्लाई को संचालित करता था, स्लीपर सेल्स को एक्टिवेट करने का काम देखता था, आतंकी ट्रेनिंग कैंप की जिम्मेदारी भी उसी के पास थी
वह पाकिस्तान में बैठकर भारत को अस्थिर करने के लिए एक पूरा नेटवर्क चला रहा था। उसकी मौत से जैश-ए-मोहम्मद की कमर टूट गई है।
ऑपरेशन सिंदूर में और कौन मारे गए?
इस ऑपरेशन में अब्दुल रऊफ के साथ-साथ: उसकी बहन,जीजा,और करीब 14 रिश्तेदार भी मारे गए।
यह हमला पाकिस्तान के बहावलपुर में किया गया, जो जैश-ए-मोहम्मद का मजबूत गढ़ माना जाता है।
7 मई की कार्रवाई, 22 अप्रैल की घटना का जवाब
यह ऑपरेशन भारत की ओर से 22 अप्रैल को हुए हमले का सीधा और सशक्त जवाब माना जा रहा है, जिसमें 28 निर्दोष लोगों की जान गई थी। ऑपरेशन सिंदूर को उसी का बदला कहा जा रहा है। यह सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि भारत की आतंकवाद के खिलाफ मजबूत नीति का प्रतीक है।
निष्कर्ष
अब्दुल रऊफ की मौत केवल एक व्यक्ति की समाप्ति नहीं, बल्कि एक बड़े आतंकवादी ढांचे की रीढ़ को तोड़ने जैसा है। मसूद अजहर पहले से ही अंडरग्राउंड है और अब रऊफ के मारे जाने से जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठन की ताकत और भी कमजोर हो गई है।
ऑपरेशन सिंदूर भारत की कूटनीति, सैन्य शक्ति और आतंक के खिलाफ उसकी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का स्पष्ट संकेत है।

