जौनपुर ।”सपने देखना आसान है, लेकिन उन्हें हकीकत में बदलने की कीमत संघर्ष से चुकानी पड़ती है…”
इसी कहावत को सच कर दिखाया है जौनपुर की होनहार बेटी अनन्या समर्थ ने। साधारण परिवार से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक का सफर तय करने वाली अनन्या ने साबित कर दिया कि जज़्बा, जुनून और मेहनत के दम पर कोई भी सपना अधूरा नहीं रह सकता।
लाइन बाजार थाना क्षेत्र निवासी मृदुला श्रीवास्तव व सुदीप कुमार श्रीवास्तव की बेटी अनन्या आज “इंटरनेशनल आइकॉनिक बेस्ट नेगेटिव रोल ऑफ इंडियन टेलीविजन अवॉर्ड 2025” के लिए नामित हुई हैं। यह नामांकन केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे जौनपुर के लिए गर्व और गौरव की बात है।
बिना गॉडफादर, बिना पहचान, बस एक अटूट जिद
मुंबई की मायानगरी जहां हर कदम पर प्रतिस्पर्धा है, वहां अनन्या ने बिना किसी गॉडफादर, बिना किसी फिल्मी विरासत के खुद को एक कलाकार के रूप में स्थापित किया। न कोई बैकअप, न सिफारिश… केवल मेहनत, संघर्ष और सपना। अनन्या ने अपने अभिनय कौशल और मेहनत के बल पर उस मुकाम को छुआ है, जो हजारों सपने देखने वालों के लिए एक मृगतृष्णा बनकर रह जाता है।
बचपन से ही अनन्या का सपना था एक अभिनेत्री बनने का। पर जौनपुर जैसे छोटे शहर से निकलकर मायानगरी मुंबई में खुद को साबित करना आसान नहीं था। लेकिन अनन्या ने अपने डर से ऊपर उठकर, हर चुनौती का सामना हिम्मत से किया। ना कभी हालात से डरीं, ना कभी खुद पर से विश्वास डगमगाया।
“मिस जौनपुर” से “इंटरनेशनल नॉमिनी” तक का सफर
अपने सफर की शुरुआत “मिस जौनपुर” बनकर करने वाली अनन्या ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। छोटे पर्दे पर कई यादगार भूमिकाएं निभाने के बाद, उन्होंने नकारात्मक किरदारों में अपनी अलग पहचान बनाई और आज वे अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करने जा रही हैं।
अनन्या का संदेश: “डरिए मत, बढ़ते रहिए”
अपनी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर अनन्या ने कहा,
“यह नामांकन केवल मेरा नहीं, मेरे माता-पिता, मेरे शहर और हर उस लड़की का है जो सपने देखने की हिम्मत रखती है। मैं भाग्यशाली हूं कि मेरे परिवार ने मुझे सपनों की उड़ान भरने की पूरी आज़ादी दी।”
आने वाली पीढ़ियों को संदेश देते हुए अनन्या कहती हैं,
“कभी भी अपने सपनों से मत डरिए। हालात चाहे जैसे हों, अगर मेहनत और नीयत सच्ची हो, तो सफलता जरूर मिलेगी। जौनपुर की बेटियों के लिए मेरा यही संदेश है—सपने देखो, मेहनत करो, कभी हार मत मानो।”
अनन्या समर्थ की यह उपलब्धि जौनपुर ही नहीं, पूरे पूर्वांचल के लिए एक प्रेरणास्रोत बन गई है। वह हर उस युवा की आशा की किरण हैं, जो सीमित साधनों के बावजूद असीम ऊंचाइयों तक पहुंचने का सपना देखता है।

