मुंबई. रामनारायण रुइया स्वायत्त महाविद्यालय के हिंदी विभाग तथा समीचीन द्वारा 19 जुलाई 2025 को डॉ. देवेश ठाकुर की प्रथम पुण्यतिथि के अवसर पर उनकी पुस्तकों का लोकार्पण चर्चित साहित्यकार डॉ. सूर्यबाला जी की अध्यक्षता में किया गया ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही डॉ. सूर्यबाला जी ने देवेश ठाकुर से जुड़ी अनेक स्मृतियों को साझा करते हुए उनकी स्पष्टवादिता और रचनाशीलता की निरंतरता के साथ-साथ उनके चरित्रों की जिजीविषा और जुझारूपन को रेखांकित किया। मुख्य अतिथि कोल्हापुर विश्वविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ पांडुरंग पाटील ने देवेश जी के व्यक्तित्व के विविध पक्षों का उल्लेख करते हुए उनके उपन्यासों में व्यक्त जीवन के प्रति गहरी आस्था और संघर्ष का उल्लेख किया।
डॉ श्यामसुंदर पाण्डेय ने अपने-अपने द्वंद्व उपन्यास में चित्रित समसामयिक समस्याओं और मानवीय संवेदनाओं पर प्रकाश डाला। और सुबह हो गयी उपन्यास पर पुणे विद्यापीठ के डॉ महेश दवंगे ने उपन्यास के नायक के मुम्बई की विषम परिस्थितियों से जूझने और उन्हें अपने अनुकूल बनाने को रेखांकित किया । डॉ. वसुंधरा उपाध्याय ने संबंधों के घेरे उपन्यास में व्यक्त दूर्वा व पूरन की प्रेम-कथा और पारिवारिक संबंधों की उलझन को प्रस्तुत किया। डॉ विशाखा ठाकूर और डॉ. आरती प्रसाद ने अनुवाद करते समय के अपने अनुभव सुनाए।डॉ आभा नागराल ने उनकी बीमारी की गम्भीरता की चर्चा करते हुए बताया कि जब भी वे अस्पताल से घर लौटते थे, किसी रेस्टोरेंट के सामने कार रुकवाकर अपना पसंदीदा नाश्ता करते, तब आगे बढ़ते। इसी अवसर पर देवेश ठाकुर पर लिखे गये संस्मरणों पर केंद्रित समीचीन पत्रिका के नवीनतम अंक का भी विमोचन सम्पन्न हुआ।

इस समारोह में मुंबई के चर्चित प्रकाशक आर के पब्लिकेशन समूह द्वारा पाँच पुस्तकों का एक साथ विमोचन किया गया, जिसमें देवेश ठाकुर द्वारा लिखित और सुबह हो गई(हिंदी), भ्रम भंग (मराठी), जंगलातील काजवे (मराठी),OPEN HOUSE (अंग्रेजी) और डॉ . प्रवीण चंद बिष्ट की समीक्षात्मक पुस्तक ‘ जंगल के जुगनू: एक मूल्यांकन शामिल है। एक प्रकाशक के रूप में आर के पब्लिकेशन की यह बड़ी उपलब्धि है।
प्राचार्य डॉ. अनुश्री लोकुर ने रुइया महाविद्यालय की समृद्ध परंपरा का उल्लेख करते हुए अतिथियों का स्वागत किया डॉ. रोहिणी शिवबालन ने कार्यक्रम की प्रास्ताविकी रखी। कार्यक्रम का संचालन डॉ सतीश पांडेय ने तथा अंत में डॉ. प्रवीण चंद्र बिष्ट ने सबके प्रति आभार माना। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या मुंबई के प्राध्यापक, विद्यार्थी एवं साहित्यप्रेमी उपस्थित थे।

