मुंबई | आज जब बॉलीवुड में अच्छी कहानियों और सशक्त गीतों का अकाल दिखाई दे रहा है, ऐसे दौर में गीतकार मुकेश कुमार मासूम की लेखनी श्रोताओं को तपते रेगिस्तान में उम्मीद की ठंडी छाँव देती है। जब अधिकतर म्यूजिक कंपनियाँ पुराने सुपरहिट गानों को रीमिक्स कर बाजार में उतारने में लगी हैं, ऐसे समय में मुकेश मासूम के गीत ताजगी, संवेदना और साहित्यिक सौंदर्य से लबरेज़ होते हैं।
मुकेश कुमार मासूम ऐसे विरले गीतकार हैं जिनके गीत न केवल रोज़ाना रिकॉर्ड होते हैं, बल्कि टॉप लेबल के सिंगर्स भी उनके साथ काम करने के लिए तत्पर रहते हैं। समीक्षकों की मानें तो उनके गीत सीधे दिल को छूते हैं और आत्मा तक पहुँचते हैं।
मशहूर संगीत निर्देशक रफीक राजा ने उनके दर्जनों गीतों को संगीत से संवारा है और मानते हैं कि “मुकेश मासूम शब्दों से जादू रचते हैं।” वहीं संगीतकार हर्ष बॉस के अनुसार, “मुकेश मासूम की लेखनी अंधेरे में सूर्य की रौशनी की तरह है।”
मुकेश कुमार मासूम उच्च शिक्षित साहित्यकार हैं — उन्होंने M.A., L.L.B. किया है और फिलहाल राजनीति विज्ञान में Ph.D. कर रहे हैं। यही गहराई उनके गीतों, ग़ज़लों और कहानियों में भी साफ झलकती है।
हाल ही में शेमारू म्यूज़िक से रिलीज़ हुआ उनका गीत “ब्रेकअप पार्टी” विशेष सराहना बटोर रहा है। इस गीत की पंक्तियाँ “उम्मीदों के पेड़ लगाओ, अपना सूरज नया उगाओ” आज के युवाओं को नई दिशा देती हैं।
उनके लिखे गीतों को पद्मश्री उदित नारायण, पद्मश्री कुमार शानू, मोहम्मद अज़ीज़, अनूप जलोटा, ममता शर्मा, पलक मुछाल, समीर खान, शबाब साबरी, अल्तमश फ़रीदी जैसे नामचीन गायकों ने स्वर दिए हैं।
निर्माता-निर्देशक इक़बाल दुर्रनी, संगीतकार वैष्णो देवा और अमन श्लोक जैसे दिग्गज भी उन्हें अपना पसंदीदा गीतकार मानते हैं।
आज की व्यस्तता का आलम यह है कि मुकेश मासूम के गीतों की रोज़ाना रिकॉर्डिंग होती है — कई बार तो एक ही दिन में दो-दो गाने रिकॉर्ड हो जाते हैं। और यह सब एक ऐसे दौर में हो रहा है जब इंडस्ट्री में अच्छे गीतों की भारी कमी महसूस की जा रही है।
मुकेश मासूम की लेखनी आज के समय में भारतीय गीत-संस्कृति की सच्ची धरोहर है।

