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West Bengal Election 2026: मतगणना में संविदा कर्मियों की ड्यूटी पर मचा सियासी बवाल, सुवेंदु अधिकारी ने चुनाव आयोग से की सख्त कार्रवाई की मांग

Digital Desk - Lucknow
Last updated: May 2, 2026 3:48 pm
Digital Desk - Lucknow
2 months ago
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West Bengal
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West Bengal Election 2026 की मतगणना से ठीक पहले राज्य में राजनीतिक सरगर्मियां काफी तेज हो चुकी हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अधिकारी ने राज्य के दो प्रमुख निर्वाचन क्षेत्रों— पिंगला और दासपुर में मतगणना कार्य के लिए संविदा या अस्थायी कर्मचारियों (Contractual Staff) की तैनाती का कड़ा विरोध किया है।

Contents
अस्थायी कर्मचारियों की नियुक्ति पर भाजपा की कड़ी आपत्तिकिन विशिष्ट पदों और जिम्मेदारियों पर उठे सवाल?ईवीएम और वीवीपीएटी की सुरक्षा की संवेदनशीलतामुख्य चुनाव आयुक्त से की गई तत्काल मांगराजनीतिक प्रभाव और आगामी घटनाक्रम

इस कदम को लेकर उन्होंने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर जनादेश के साथ हेरफेर करने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। आइए इस पूरे विवाद और सुवेंदु अधिकारी द्वारा की गई शिकायतों के बारे में विस्तार से चर्चा करते हैं।

अस्थायी कर्मचारियों की नियुक्ति पर भाजपा की कड़ी आपत्ति

सुवेंदु अधिकारी ने अपने आधिकारिक पत्र और सोशल मीडिया के जरिए 227-पिंगला विधानसभा क्षेत्र और 230-दासपुर विधानसभा क्षेत्र में जारी मतगणना आदेशों पर कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि इन महत्वपूर्ण चुनावी कार्यों में नियमित सरकारी कर्मचारियों के बजाय भारी संख्या में संविदा और अस्थायी कर्मचारियों को शामिल किया गया है।

अधिकारी ने इस बात पर चिंता जाहिर की कि आखिर कैसे ‘जिबिका सेवकों’, ‘सहायकों’ और संविदात्मक मतदान अधिकारियों जैसे पदों पर बैठे लोगों को इतनी बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। उन्होंने एक कड़े बयान में कहा:

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“क्या लोकतंत्र का भविष्य संविदा कर्मचारियों के हाथों में सौंपा जा रहा है? यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पवित्रता और निष्पक्षता पर सीधा हमला है।”

बीजेपी नेता ने बताया कि इन कर्मचारियों की नौकरी और आजीविका राज्य सरकार की नीतियों पर निर्भर करती है, जिसके कारण उन पर स्थानीय राजनीतिक दबाव बनने की आशंका काफी बढ़ जाती है।

किन विशिष्ट पदों और जिम्मेदारियों पर उठे सवाल?

सुवेंदु अधिकारी ने अपने दावों को साबित करने के लिए कुछ स्पष्ट उदाहरणों और आदेशों का हवाला दिया है। उनके द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, पिंगला निर्वाचन क्षेत्र (227) की मतगणना टीम में निम्नलिखित संविदा कर्मचारियों को रखा गया है:

  • बिपालेंदु बेरा (जेएस – JS)

  • शंकर पहाड़ी (जेएस – JS)

  • नबा कुमार अपिक (बीएलएस – BLS)

इसके साथ ही, अधिकारी ने यह भी उजागर किया है कि ‘रिजर्व टैगिंग’ के काम में बीएलएए जैसे अस्थायी कर्मचारियों को लगाया गया है। ईवीएम (EVM) के मूवमेंट और उनकी सीलिंग जैसी संवेदनशील प्रक्रियाओं में भी सहायकों, वीएलई (VLE) और संविदा पर नियुक्त डीईओ (DEO) की तैनाती की गई है, जो प्रशासनिक नियमों के विपरीत है।

ईवीएम और वीवीपीएटी की सुरक्षा की संवेदनशीलता

चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार, ईवीएम (EVM), वीवीपीएटी (VVPAT) और डाक मतपत्रों से जुड़े कार्यों को अत्यंत संवेदनशील माना जाता है। इनकी गोपनीयता और सुरक्षा को बनाए रखना किसी भी चुनाव की सफलता का आधार होता है।

सुवेंदु अधिकारी ने तर्क दिया कि यदि इन संवेदनशील कार्यों की निगरानी अस्थायी कर्मचारी करेंगे, तो निम्नलिखित खतरे उत्पन्न हो सकते हैं:

  • राजनीतिक दबाव: चूंकि संविदा कर्मचारियों का भविष्य सत्तारूढ़ दल की मर्जी पर निर्भर करता है, इसलिए मतगणना के दौरान निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है।

  • भ्रष्टाचार और धांधली की गुंजाइश: ईवीएम को सील करने और खोलने जैसी प्रक्रियाओं में केवल स्थायी और निष्पक्ष सरकारी कर्मचारियों का होना अनिवार्य है।

  • पारदर्शिता का अभाव: चुनाव के दौरान प्रक्रिया में पूरी तरह से पारदर्शिता बनाए रखने के लिए स्थायी कर्मचारियों की भागीदारी आवश्यक है।

मुख्य चुनाव आयुक्त से की गई तत्काल मांग

पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए सुवेंदु अधिकारी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) को एक पत्र सौंपा है। उन्होंने मांग की है कि 4 मई को होने वाली मतगणना से पहले इन आदेशों को तत्काल प्रभाव से संशोधित किया जाना चाहिए।

उनकी प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:

  1. सिर्फ नियमित कर्मचारियों की तैनाती: मतगणना प्रक्रिया में केवल स्थायी और नियमित सरकारी कर्मचारियों को ही ड्यूटी पर लगाया जाए।

  2. संविदा कर्मियों को दूर रखना: संवेदनशील और महत्वपूर्ण भूमिकाओं से संविदा कर्मचारियों को तत्काल हटाया जाए।

  3. पारदर्शिता सुनिश्चित करना: चुनाव आयोग को लोकतंत्र के इस ‘संविदाकरण’ को रोकना चाहिए ताकि जनता के जनादेश के साथ कोई खिलवाड़ न हो।

बीजेपी नेता ने अंत में चेतावनी दी कि वे किसी भी ऐसे व्यक्ति को मतगणना स्थल के आसपास नहीं रहने देंगे, जिनका काम सत्ताधारी दल के दबाव में हो।

राजनीतिक प्रभाव और आगामी घटनाक्रम

पिंगला और दासपुर में हुए इस विवाद के बाद राज्य में राजनीतिक तनाव बढ़ गया है। चुनाव आयोग के सामने अब यह चुनौती है कि वह मतगणना से पहले इस स्थिति को स्पष्ट करे और निष्पक्ष मतगणना सुनिश्चित करे। सभी राजनीतिक दलों की निगाहें अब 4 मई की मतगणना और चुनाव आयोग के फैसले पर टिकी हुई हैं।

यह भी पढ़े: Lucknow: हजरतगंज में CA दफ्तर में आग, कंप्यूटर और इलेक्ट्रॉनिक सामान प्रभावित

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