- डॉ मंगलेश्वर त्रिपाठी
Ram Mandir में चढ़ावे की चोरी के आरोपियों की पैरवी करने वाले वकील पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाने के वकील संघ के फैसले का श्रद्धालुओं ने स्वागत किया है। पर जनता पूछ रही है कि चोर का वकील दोषी है तो चढ़ावे की रखवाली में नाकाम सरकार, बीजेपी, वीएचपी, आरएसएस और मंदिर ट्रस्ट कब कटघरे में खड़े होंगे? श्रद्धालुओं का गुस्सा फूट पड़ा है। उनका कहना है कि राम मंदिर आस्था का केंद्र कम, सत्ता का एटीएम ज्यादा बन गया है। रोज करोड़ों का चढ़ावा आता है, पर उसकी सुरक्षा भगवान भरोसे है। कैमरे खराब, गार्ड नदारद और हिसाब गायब। चोरी पकड़ी जाए तो ट्रस्ट मुंह सिल लेता है और सरकार ‘जय श्रीराम’ के नारे में मामला दबा देती है।
सबसे शर्मनाक बात यह है कि जिस चढ़ावे से नेताओं की रैलियां चमकती हैं, उसी चढ़ावे की चोरी पर ट्रस्ट के ठेकेदार चुप हैं। वीएचपी और आरएसएस खुद को राम का उत्तराधिकारी बताते हैं, पर जब भक्त हिसाब मांगता है तो उसे ‘विधर्मी’ करार दे दिया जाता है। बीजेपी ने राम मंदिर को वोट की मशीन बना दिया, पर मंदिर की तिजोरी कौन लूट रहा है, इस पर चुप्पी क्यों? वकील संघ ने आरोपी के वकील पर जुर्माना लगाकर नैतिक संदेश दिया। अच्छी बात है। पर सवाल है कि सिर्फ वकील ही अपराधी है? जिस ट्रस्ट ने करोड़ों के चढ़ावे को पारदर्शी नहीं किया, जिस सरकार ने सुरक्षा नहीं दी, जिन संगठनों ने राम के नाम पर राजनीति की, उन पर 5 लाख नहीं, 5 करोड़ का जुर्माना कब लगेगा?
भक्त का एक-एक रुपया रामलला का है, किसी पार्टी का चुनावी फंड नहीं। अगर वकील का केस लड़ना गुनाह है तो चढ़ावे की लूट पर चुप रहना महापाप है। सरकार बताए कि अब तक चोरी का कितना पैसा वापस आया? ट्रस्ट बताए कि ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक करने से डर क्यों लगता है? श्रद्धालुओं की मांग साफ है: मंदिर ट्रस्ट को RTI के दायरे में लाओ, चढ़ावे का पाई-पाई का हिसाब ऑनलाइन करो, और लापरवाही पर ट्रस्टियों की संपत्ति जब्त करो। वकील पर जुर्माना लगाने से रामराज नहीं आएगा। जब तक चढ़ावा लूटने वाले सफेदपोश बेनकाब नहीं होंगे, तब तक हर ‘जय श्रीराम’ के पीछे एक चीख दबी रहेगी।
आस्था के नाम पर धंधा बंद करो। राम के नाम पर लूट अब नहीं सहेगा हिन्दुस्तान

