India: भारतीय रेल के सफर में एक स्वर्णिम और बेहद आधुनिक अध्याय जुड़ने जा रहा है। देश को पूरी तरह प्रदूषण-मुक्त और इको-फ्रेंडली बनाने की दिशा में भारतीय रेलवे अपनी पहली ग्रीन हाइड्रोजन ट्रेन (India’s First Green Hydrogen Train) को पटरियों पर उतारने के लिए पूरी तरह तैयार है।
शून्य-उत्सर्जन (Zero Emission) तकनीक पर आधारित इस ट्रेन की पहली झलक खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा की है। पीएम मोदी ने बताया कि देश की यह पहली ग्रीन हाइड्रोजन ट्रेन हरियाणा से अपने सफर की शुरुआत करने जा रही है। इस बड़ी घोषणा के बाद से ही रेल यात्रियों और पर्यावरण प्रेमियों में इस प्रोजेक्ट को लेकर गजब का उत्साह है।
1. ‘हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज’ प्रोजेक्ट से बदलेगी रेलवे की सूरत
यह नई पहल रेलवे के बड़े और दूरदर्शी मिशन का हिस्सा है, जिसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
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हेरिटेज रूटों का कायाकल्प: यह ट्रेन भारतीय रेलवे के ‘हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज’ (Hydrogen for Heritage) अभियान के तहत चलाई जा रही है।
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35 नई ट्रेनों का लक्ष्य: रेलवे का प्लान आने वाले समय में देश के ऐतिहासिक और पहाड़ी (हेरिटेज) रूटों पर ऐसी करीब 35 और हाइड्रोजन ट्रेनें चलाने का है।
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डीजल इंजनों की विदाई: इस योजना का मुख्य उद्देश्य उन ग्रामीण और सांस्कृतिक धरोहर वाले रूटों से पुराने और धुआं उगलने वाले डीजल इंजनों को हमेशा के लिए हटाना है, जहां अभी तक बिजली की लाइनें नहीं बिछाई जा सकी हैं।
2. गति और क्षमता: एक बार में 2600 यात्रियों का सफर
तकनीक और यात्रियों की सुविधा के मामले में इस ट्रेन को बेहद आधुनिक बनाया गया है:
| विशेषता | विवरण / आंकड़े |
| ट्रेन का प्रकार | 10 कोच वाली विशेष हाइड्रोजन-चालित डीईएमयू (DEMU) रैक |
| बैठने की क्षमता | कोच के भीतर 682 आरामदायक सीटें |
| कुल यात्री क्षमता | एक बार में खड़े और बैठकर करीब 2,600 यात्री सफर कर सकेंगे |
| तय की गई रफ्तार | सुरक्षा कारणों और पायलट रन को देखते हुए अधिकतम गति 75 किमी/घंटा तय की गई है |
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3. तकनीक: कैसे काम करता है यह ‘चलता-फिरता बिजलीघर’?
यह ट्रेन आम ट्रेनों की तरह ऊपर लगे बिजली के तारों (Overhead wires) या डीजल से नहीं चलती, बल्कि इसका अपना एक अलग पावर सिस्टम है:
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फ्यूल सेल का जादू: ट्रेन के पावर प्लांट यानी फ्यूल सेल के अंदर जब स्टोर की गई हाइड्रोजन गैस का मिलन हवा में मौजूद ऑक्सीजन से कराया जाता है, तो एक रासायनिक प्रक्रिया होती है।
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ऑन-द-स्पॉट बिजली: इस प्रक्रिया से तुरंत बिजली पैदा होती है जो ट्रेन के पहियों को घुमाने वाली इलेक्ट्रिक मोटर्स को चलाती है।
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साइलेंट और क्लीन सफर: इस पूरी प्रक्रिया में कोई जहरीला धुआं, कार्बन या तेज आवाज पैदा नहीं होती। ट्रेन के साइलेंसर से केवल पानी की बूंदें (जलवाष्प/भाप) और हल्की सी गर्मी बाहर निकलती है।
गेम-चेंजर साबित होगी यह ट्रेन: देश के जिन पहाड़ी और दुर्गम रास्तों पर बिजली के भारी-भरकम खंभे लगाना या केबल बिछाना नामुमकिन या बेहद खर्चीला काम था, वहां अब यह ट्रेन बिना किसी बड़े बुनियादी ढांचे के बदलाव के प्रदूषण-मुक्त सफर का सबसे शानदार जरिया बनेगी।

