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Akhand Rashtra News > ताज़ा ख़बरें > Delhi जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक के अनशन में पहुंचे पवन खेड़ा और अरविंद केजरीवाल, बोले मोदी को.. .
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Delhi जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक के अनशन में पहुंचे पवन खेड़ा और अरविंद केजरीवाल, बोले मोदी को.. .

Digital Desk - Lucknow
Last updated: July 17, 2026 3:00 pm
Digital Desk - Lucknow
7 seconds ago
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Delhi
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Delhi का ऐतिहासिक धरना स्थल जंतर-मंतर एक बार फिर देश की बड़ी राजनीतिक और सामाजिक हलचल का केंद्र बन गया है। देश की शिक्षा व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव और प्रतियोगी परीक्षाओं की शुचिता बहाली की मांग को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पिछले कई दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। शुक्रवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सदस्य पवन खेड़ा ने आंदोलन स्थल पर पहुंचकर सोनम वांगचुक और उनके साथी प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की। इस दौरान पवन खेड़ा ने वांगचुक और अन्य आंदोलनकारियों की तेजी से गिरती सेहत पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने प्रदर्शन कर रहे लोगों से बेहद भावुक अपील करते हुए कहा कि वे अपनी जान को किसी भी कीमत पर जोखिम में न डालें। कांग्रेस नेता ने केंद्र सरकार की कार्यशैली पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि यह एक ऐसी हुकूमत है जो लोकतांत्रिक तरीके से उठने वाली आवाजों को सुनने में कोई दिलचस्पी नहीं रखती, इसलिए एक असंवेदनशील सत्ता के सामने इस तरह अपनी जान की बाजी लगाना बिल्कुल भी ठीक नहीं है।

Contents
राजधर्म की याद और कांग्रेस नेतृत्व का संदेशपूर्ववर्ती सरकारों का हवाला और सत्ता पर संवेदनहीनता के आरोपअरविंद केजरीवाल का मंच से तीखा प्रहारपेपर लीक का संकट और 20वें दिन ऑर्गन फेलियर की चेतावनी

राजधर्म की याद और कांग्रेस नेतृत्व का संदेश

पवन खेड़ा ने आंदोलनकारियों के बीच कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व का संदेश साझा करते हुए कहा कि पार्टी के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी गहरी चिंता प्रकट की थी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक को शांतिपूर्ण ढंग से अपनी असहमति दर्ज कराने और विरोध प्रदर्शन करने का पूरा संवैधानिक अधिकार मिला हुआ है। जब देश के प्रबुद्ध नागरिक अपनी मांगों को लेकर अन्न-जल त्याग कर बैठ जाएं, तो यह किसी भी चूने हुई सरकार का परम कर्तव्य बनता है कि वह तुरंत उनके पास जाए, उनकी चिंताओं को सुने और उसका उचित समाधान निकाले। राजधर्म का तकाजा यही कहता है कि नागरिकों की आवाज को अनसुना न किया जाए, लेकिन वर्तमान शासन ने इस बुनियादी लोकतांत्रिक जिम्मेदारी से पूरी तरह मुंह मोड़ लिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अपने लोगों को खो देने से कोई भी आंदोलन मजबूत नहीं होता, बल्कि देश के अधिकारों की लड़ाई को आगे बढ़ाने के लिए हमारा जीवित और स्वस्थ रहना सबसे ज्यादा जरूरी है।

पूर्ववर्ती सरकारों का हवाला और सत्ता पर संवेदनहीनता के आरोप

केंद्र सरकार पर तानाशाही और अहंकार का आरोप लगाते हुए कांग्रेस नेता ने देश के इतिहास के कुछ पन्नों का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और उसके बाद साल 2011 में डॉक्टर मनमोहन सिंह की सरकार के दौरान भी बड़े आंदोलन हुए थे, लेकिन उन सरकारों में यह समझ थी कि लोकतंत्र में बातचीत का रास्ता कभी बंद नहीं होना चाहिए। मतभेदों और असहमतियों के बावजूद तत्कालीन शासक प्रदर्शनकारियों से संवाद स्थापित करते थे। इसके विपरीत, मौजूदा सरकार ने हर संवेदनशील मुद्दे पर सिर्फ और सिर्फ चुप्पी साधने का रास्ता चुना है। चाहे देश भर में राहुल गांधी, एनएसयूआई और युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं द्वारा शिक्षा सुधारों की मांग उठाई जा रही हो या फिर जंतर-मंतर पर प्रबुद्ध समाज के लोग अनशन कर रहे हों, सरकार ने हर स्तर पर बातचीत करने से साफ तौर पर इनकार कर दिया है। पवन खेड़ा के अनुसार, प्रशासन की यह घोर उदासीनता केवल सत्ता का अहंकार नहीं है, बल्कि यह देश के युवाओं के प्रति उनकी संवेदनहीनता को भी दर्शाती है, जो भारतीय लोकतंत्र के भविष्य के लिए बेहद चिंताजनक संकेत है।

यह भी पढ़ें: Parliament मानसून सत्र से पहले बढ़ा सियासी पारा: कांग्रेस का बड़ा एलान, महिला आरक्षण की आड़ में परिसीमन बिल का होगा कड़ा विरोध

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अरविंद केजरीवाल का मंच से तीखा प्रहार

इस बड़े आंदोलन को अपना समर्थन देने के लिए आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल भी जंतर-मंतर के मंच पर पहुंचे। उन्होंने वहां मौजूद विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए देश की मौजूदा शिक्षा प्रणाली और बार-बार लीक हो रहे परीक्षा पत्रों के गंभीर मुद्दे पर देश का ध्यान आकर्षित किया। केजरीवाल ने स्पष्ट रूप से कहा कि सोनम वांगचुक आज जो तपस्या कर रहे हैं, वह उनके अपने किसी व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए नहीं है, बल्कि वह इस देश के करोड़ों युवाओं और छात्रों के सुरक्षित भविष्य की लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब दूर-दराज के इलाकों से कोई साधारण छात्र किसी बड़ी प्रतियोगी परीक्षा में शामिल होने के लिए घर से निकलता है, तो वह केवल परीक्षा केंद्र नहीं जाता, बल्कि उसके साथ उसके पूरे परिवार के सपने और बरसों की मेहनत जुड़ी होती है। हर छात्र को यह अटूट भरोसा होना चाहिए कि उसकी योग्यता, लगन और ईमानदारी के दम पर ही उसका भविष्य तय होगा, लेकिन दुर्भाग्य से आज देश में जिस तरह से लगातार पेपर लीक के बड़े मामले सामने आ रहे हैं, उसने युवाओं के इस भरोसे को पूरी तरह से झकझोर कर रख दिया है।

पेपर लीक का संकट और 20वें दिन ऑर्गन फेलियर की चेतावनी

अपनी पुरानी यादों और अनुभवों को साझा करते हुए अरविंद केजरीवाल ने कहा कि वह स्वयं देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी से पढ़े हैं और उनके बच्चों ने भी कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं का सामना किया है। उन्होंने बताया कि उस दौर में इस प्रकार की धांधली, भ्रष्टाचार या पेपर लीक जैसी विसंगतियां सुनने को भी नहीं मिलती थीं और पूरी प्रक्रिया बेहद पारदर्शी होती थी। परंतु वर्तमान समय में स्थिति इतनी ज्यादा बिगड़ चुकी है कि हर दूसरी परीक्षा विवादों के घेरे में आ जाती है। बार-बार होने वाले इन घोटालों से न केवल होनहार छात्रों का कीमती समय बर्बाद हो रहा है, बल्कि देश के युवाओं का मनोबल भी पूरी तरह से टूट रहा है। इस अनशन के 20वें दिन डॉक्टरों द्वारा ऑर्गन फेलियर यानी अंगों के काम बंद करने जैसी गंभीर चिकित्सा चेतावनियों के बीच, विपक्षी नेताओं ने एक सुर में सरकार से जिद छोड़ने और तुरंत वार्ता प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है ताकि देश के युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ को रोका जा सके।

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