नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली में चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहा विरोध प्रदर्शन अब एक बेहद दिलचस्प और रोमांचक मोड़ पर पहुंच गया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बुलावे पर जंतर-मंतर से महज 100 मीटर की दूरी पर स्थित जनपथ के सागर रत्न रेस्टोरेंट में INDIA ब्लॉक के तमाम विपक्षी सांसदों ने हाई-लेवल बैठक की। इसके बाद राहुल गांधी के नेतृत्व में सांसद सीधे जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए आगे बढ़ रहे हैं।
भारी पुलिस बल और BNSS की धारा 163 का पहरा
विपक्ष के इस जोरदार प्रदर्शन और लगातार बढ़ते तनाव को देखते हुए दिल्ली पुलिस पूरी तरह अलर्ट मोड में है। जंतर-मंतर और आसपास के पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है, जगह-जगह मजबूत बैरिकेडिंग की गई है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियातन BNSS की धारा 163 (पूर्ववर्ती BNS/CrPC की धारा 144 जैसी पाबंदी) लागू कर दी गई है। इसके बावजूद विपक्षी नेताओं और सांसदों का जोश ठंडा नहीं पड़ा है।
CJP का पहले से तय है 10 अक्टूबर का बड़ा प्लान
इस पूरे सियासी घटनाक्रम के बीच सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि एक तरफ जहां राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी जंतर-मंतर पर मोर्चा संभाले हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) ने पहले ही आगामी 10 अक्टूबर को इसी जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन का आधिकारिक ऐलान कर रखा है। CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास और उनके युवा कार्यकर्ता पहले ही पुलिस को इसकी लिखित सूचना दे चुके हैं।
क्या नहीं बदलेगी CJP की लोकेशन और तारीख?
चूंकि CJP ने साफ कर दिया है कि वे न तो अपना धरना रद्द करेंगे और न ही अपनी लोकेशन (जंतर-मंतर) बदलेंगे, ऐसे में यदि राहुल गांधी और कांग्रेस का यह धरना और विरोध प्रदर्शन 10 अक्टूबर तक लगातार यूं ही जारी रहता है, तो दोनों धरने आपस में टकरा सकते हैं।
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क्या पहली बार हाथ मिलाएंगे राहुल गांधी और CJP?
यह इस पूरे आंदोलन का सबसे बड़ा और तीखा सवाल है। जब दोनों पक्षों—यानी मुख्यधारा के विपक्षी दिग्गजों और CJP के Gen Z युवाओं—की मांग बिल्कुल एक जैसी है (CEC ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और चुनाव आयोग में सुधार), और दोनों की लोकेशन भी एक ही है, तो क्या इस महासंग्राम में राहुल गांधी और CJP पहली बार एक मंच पर हाथ मिलाकर यह लड़ाई साथ लड़ेंगे?
अगर यह अप्रत्याशित गठबंधन जमीन पर उतरता है, तो यह चुनाव आयोग के खिलाफ चल रहे इस आंदोलन को एक अभूतपूर्व और विस्फोटक राजनीतिक ताकत देगा, जिस पर देश भर की निगाहें टिकी हुई हैं।


