नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ INDIA ब्लॉक के विरोध मार्च के दौरान उस समय हंगामा देखने को मिला, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन में नारे लगाने वाले एक युवक के साथ कथित तौर पर मारपीट की गई। घटना का वीडियो और इससे जुड़ी जानकारी सामने आने के बाद राजनीतिक माहौल और गरमा गया है।
दरअसल, INDIA ब्लॉक के कई विपक्षी दलों के नेता और सांसद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन और मार्च के लिए दिल्ली में जुटे थे। विपक्ष की ओर से यह प्रदर्शन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर किया जा रहा था। विपक्षी दल चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर चुनाव आयोग से जवाब मांग रहे हैं।
इसी दौरान एक युवक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन में नारे लगाने लगा। मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि युवक की नारेबाजी के बाद वहां मौजूद कुछ लोगों ने उसके साथ मारपीट की। युवक कथित तौर पर रोते हुए कहता नजर आया कि वह देश को नेपाल नहीं बनने देगा। इस घटना ने विरोध प्रदर्शन के दौरान राजनीतिक असहमति और विरोध के तरीके को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
नारेबाजी के बाद बढ़ा विवाद
विरोध प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और SIR को लेकर विपक्ष की आपत्तियां थीं। विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में गंभीर सवाल खड़े हुए हैं और चुनाव आयोग को इस पर जवाब देना चाहिए। इसी मांग को लेकर INDIA ब्लॉक के नेता दिल्ली में मार्च कर रहे थे।
इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन में नारे लगने से प्रदर्शन का माहौल बदल गया। युवक के साथ कथित मारपीट की घटना सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर बहस तेज हो गई है। हालांकि, घटना के पूरे क्रम और मारपीट में शामिल लोगों की पहचान को लेकर आधिकारिक स्तर पर विस्तृत जानकारी सामने आना अभी बाकी है।
चुनाव आयोग को लेकर विपक्ष का प्रदर्शन
INDIA ब्लॉक का यह प्रदर्शन चुनाव आयोग को लेकर विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच बढ़ते राजनीतिक टकराव का हिस्सा है। इससे पहले भी विपक्षी दल SIR के मुद्दे पर दिल्ली में प्रदर्शन कर चुके हैं। राहुल गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सवाल उठाए हैं और उनके इस्तीफे की मांग तक की है।
वहीं, इस पूरे विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट में भी मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने और SIR से जुड़े मामलों को लेकर याचिकाएं पहुंची हैं। अदालत ने तत्काल कोई ऐसा आदेश देने से इनकार किया है, जबकि मामले में चुनाव आयोग और केंद्र से जुड़े पक्षों पर न्यायिक सुनवाई जारी है।
राजनीतिक माहौल और गरमाने के आसार
दिल्ली में हुए इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि राजनीतिक विरोध के दौरान अलग राय रखने वाले लोगों के साथ किस तरह का व्यवहार किया जाना चाहिए। लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी दल या नेता के समर्थन और विरोध का अधिकार मौजूद है, लेकिन राजनीतिक असहमति के दौरान हिंसा की घटनाएं विवाद को और गंभीर बना देती हैं।
फिलहाल युवक के साथ कथित मारपीट का मामला
राजनीतिक चर्चा का विषय बना हुआ है। आने वाले दिनों में इस घटना पर भाजपा और विपक्षी दलों की ओर से बयान सामने आने की संभावना है। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि दिल्ली पुलिस की ओर से इस घटना को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी या कार्रवाई सामने आती है


