जंतर-मंतर 2.0 सुरक्षा घेरा अब राष्ट्रीय राजधानी में साफ दिखने लगा है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा 10 अक्टूबर 2026 को जंतर-मंतर पर बड़े प्रदर्शन का ऐलान होने के बाद गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस ने अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था कर दी है। 8 से 12 अक्टूबर तक राजधानी में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की 221 कंपनियां तैनात रहेंगी। जंतर-मंतर 2.0 सुरक्षा घेरा इतना कड़ा है कि नई दिल्ली इलाका लगभग छावनी जैसा दिखने लगा है।
मुख्य बातें (Key Takeaways)
- MHA ने 221 CAPF कंपनियां (करीब 23,000 जवान) उपलब्ध कराईं।
- अतिरिक्त 110 कंपनियां: 85 CRPF, 10 SSB, 7 RAF, 7 ITBP, 1 CISF।
- दिल्ली पुलिस के 15,000 से 20,000 जवान भी मैदान में।
- धारा 163 (BNSS) लागू, अनुमति खारिज, मल्टी-लेयर बैरिकेडिंग।
- CJP का ‘जंतर-मंतर 2.0’ 10 अक्टूबर को ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर।
क्यों बढ़ाया गया इतना बड़ा सुरक्षा घेरा?
CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर देशव्यापी प्रदर्शन का आह्वान किया है। CJP के सह-संयोजक सौरव दास ने पुलिस को औपचारिक सूचना दी थी। पुलिस ने अनुमति देने से इनकार कर दिया है। नियम के मुताबिक जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए 10 दिन पहले आवेदन और अधिकतम 1,000 लोगों की सीमा है।
जंतर-मंतर 2.0 सुरक्षा घेरा इसलिए इतना बड़ा बनाया गया है क्योंकि जुलाई में CJP के पिछले प्रदर्शन के दौरान भी बड़े पैमाने पर भीड़ जुटी थी। गृह मंत्रालय ने 6 अक्टूबर को अतिरिक्त 110 कंपनियां मंजूर कीं। इनमें ज्यादातर CRPF के जवान जम्मू-कश्मीर (अमरनाथ यात्रा के बाद), पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ के नक्सल विरोधी अभियानों से वापस बुलाए गए हैं।
सुरक्षा बल कहां-कहां से आए?
पहले से तैनात
CRPF • SSB • RAF • ITBP • CISF
करीब 23,000 जवान
कुल 221 कंपनियां (करीब 23,000 जवान)
पहले से 111 कंपनियां
नई 110 कंपनियां : 85 CRPF + 10 SSB + 7 RAF + 7 ITBP + 1 CISF
दिल्ली पुलिस के अतिरिक्त 15,000-20,000 जवान
इससे कुल सुरक्षा घेरा करीब 38,000 से 40,000 जवानों का हो गया है। मेट्रो स्टेशनों, बाजारों और सीमाओं पर निगरानी बढ़ा दी गई है। उत्तर प्रदेश और हरियाणा की पुलिस को भी अलर्ट रहने को कहा गया है।
दिल्ली पुलिस के सख्त कदम
नई दिल्ली और संसद मार्ग इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू कर दी गई है। बिना अनुमति सभा, जुलूस या प्रदर्शन पूरी तरह प्रतिबंधित है। 10 अक्टूबर को पूरा इलाका सील रहेगा। मल्टी-लेयर बैरिकेडिंग लगाई जा रही है। फेशियल रिकग्निशन सिस्टम से जुलाई के प्रदर्शन में शामिल कुछ लोगों पर नजर रखी जा रही है।
जंतर-मंतर 2.0 सुरक्षा घेरा इतना कड़ा है कि कई लोग इसे “पुलिस छावनी” कहने लगे हैं। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए हाउस अरेस्ट जैसे एहतियाती कदम भी उठाए जा सकते हैं।
तुलना तालिका: सुरक्षा तैनाती
| बल / व्यवस्था | संख्या / विवरण |
|---|---|
| कुल CAPF कंपनियां | 221 (करीब 23,000 जवान) |
| अतिरिक्त कंपनियां | 110 (85 CRPF, 10 SSB, 7 RAF, 7 ITBP, 1 CISF) |
| दिल्ली पुलिस | 15,000 – 20,000 जवान |
| अवधि | 8 से 12 अक्टूबर 2026 |
| कानूनी प्रावधान | धारा 163 BNSS |
निष्कर्ष: सुरक्षा बनाम विरोध
जंतर-मंतर 2.0 सुरक्षा घेरा दिखाता है कि प्रशासन किसी भी बड़े अराजक प्रदर्शन को रोकने के लिए पूरी तरह तैयार है। CJP और छात्र संगठन ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे पर अड़े हैं, लेकिन पुलिस साफ कह चुकी है कि बिना अनुमति कोई प्रदर्शन नहीं चलेगा।
राजधानी में कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिकता है। 10 अक्टूबर को क्या होता है, यह देखना दिलचस्प होगा। फिलहाल जंतर-मंतर 2.0 सुरक्षा घेरा राजधानी को पूरी तरह कब्जे में लिए हुए है।
SIR और मतदाता सूची से जुड़ी आधिकारिक जानकारी
भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India)
की आधिकारिक वेबसाइट पर देखी जा सकती है।
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