नई दिल्ली: सोमवार को राजधानी दिल्ली में राजनीतिक पारा अपने चरम पर पहुंच गया, जब समाजवादी पार्टी (SP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और ‘इंडिया’ गठबंधन के तमाम दिग्गज नेताओं ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। सुप्रीम कोर्ट की तरफ मार्च करते हुए अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और चुनाव आयोग पर सीधा हमला बोला। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि प्रदर्शन के स्थल बदलने या पाबंदियां लगाने से सरकार अपनी जिम्मेदारियों और कथित अनियमितताओं से नहीं बच सकती है।
अखिलेश यादव ने मीडिया से बात करते हुए आरोप लगाया कि बीजेपी चुनाव आयोग के साथ मिलकर देश के संविधान और लोकतंत्र को कमजोर करने का काम कर रही है। उन्होंने कहा, “विरोध और धरना-प्रदर्शन लगातार जारी रहेगा। लोकतंत्र को बचाना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। ये लोग सत्ता में बने रहने के लिए फर्जी वोट तैयार कर रहे हैं और चुनाव परिणामों को प्रभावित कर रहे हैं।” उन्होंने मांग की कि सरकार अपनी गलतियों को स्वीकार करे और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) को उनके पद से हटाए।
“स्थान बदलने से सरकार नहीं बचेगी”- अखिलेश यादव
सरकार द्वारा विरोध प्रदर्शनों के स्थलों को बदलने या प्रतिबंधित करने के प्रयासों पर प्रतिक्रिया देते हुए सपा प्रमुख ने तंज कसा कि अगर सरकार वास्तव में लोकतंत्र को मजबूत करना चाहती है, तो उसे प्रदर्शन के लिए और अधिक जगहें उपलब्ध करानी चाहिए। उन्होंने कहा, “जगह बदलने से सरकार नहीं बचेगी। सरकार की चोरियों को स्थान बदलकर छिपाया नहीं जा सकता। हम लोकतंत्र के लिए अपनी आवाज उठाते रहेंगे और यह संघर्ष थमेगा नहीं।”
राहुल गांधी के नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट तक मार्च
इससे पहले, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में ‘इंडिया’ गठबंधन के सांसदों और नेताओं ने बारहखंबा रोड चौराहे से सुप्रीम कोर्ट की ओर पैदल मार्च निकाला। इस मार्च में पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, अखिलेश यादव के अलावा सीपीआई और सीपीएम के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। विपक्षी दलों का यह प्रतिनिधिमंडल शीर्ष अदालत में एक औपचारिक याचिका दाखिल कर रहा है, जिसमें एसआईआर (SIR) प्रक्रिया में गड़बड़ियों के सबूत पेश किए गए हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की जा रही है।
सचिन पायलट और अन्य नेताओं के तीखे तेवर
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सचिन पायलट ने इस दौरान पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारियों की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि पूरा देश आज सड़कों पर है और विपक्ष की केवल एक ही मांग है कि सुप्रीम कोर्ट उनकी बात सुने। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त का कृत्य पूरी तरह अवैध और असंवैधानिक है, इसलिए उन्हें पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है।
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समाजवादी पार्टी के सांसद आनंद भदौरिया और सीपीआई महासचिव डी. राजा ने भी स्पष्ट किया कि ‘इंडिया’ गठबंधन के प्रमुख नेता सुप्रीम कोर्ट के भीतर याचिका पर हस्ताक्षर कर रहे हैं और यह कानूनी तथा राजनीतिक लड़ाई तब तक जारी रहेगी जब तक चुनाव आयोग में निष्पक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं हो जाती। भारी सुरक्षा और कड़े पहरे के बीच विपक्षी दलों के इस आक्रामक रुख ने राष्ट्रीय राजनीति में सरगर्मी काफी बढ़ा दी है।


