आज सुप्रीम कोर्ट में एक ऐसी याचिका पर सुनवाई हो रही है जो पिछले कई दिनों से देश की सड़कों और सोशल मीडिया पर गूंज रहे आंदोलन का कानूनी रूप है।
राहुल गांधी समेत INDIA ब्लॉक के कई नेताओं ने चुनाव आयोग की Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया को चुनौती दी है। याचिका में बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाने और अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। विपक्ष इसे “वोट चोरी” का मामला बता रहा है।
याचिका में मुख्य मांगें
याचिका में मुख्य मांगें साफ हैं।
- एक स्वतंत्र समिति बनाई जाए, जिसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश करें और तकनीकी विशेषज्ञ इसमें शामिल हों।
- यह समिति SIR के दौरान हुए नाम हटाने और बदलावों का स्वतंत्र ऑडिट करे।
- चुनाव आयोग से पूरे रिकॉर्ड, मीटिंग के मिनट्स, नोटिंग्स और आयुक्तों द्वारा दर्ज की गई आपत्तियां मांगी गई हैं।
- ECINET और ERONET सिस्टम के एक्सेस लॉग भी मांगे गए हैं।
सबसे महत्वपूर्ण मांग यह है कि याचिका पर अंतिम फैसला आने तक पूरे देश में चल रही SIR प्रक्रिया को स्थगित कर दिया जाए। याचिका में आरोप है कि कई फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा अकेले लिए गए, बिना अन्य आयुक्तों की सहमति या जानकारी के।
ये सुनवाई ऐसे समय में हो रही है जब युवा सड़कों पर उतर चुके हैं। जंतर मंतर पर तिरंगा लहराने वाले नेताओं को जेल भेजा जा चुका है। हजारों लोग हिरासत में लिए जा चुके हैं। फिर भी मांग एक ही है – चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता।
आज की सुनवाई सिर्फ कानूनी प्रक्रिया नहीं है। ये उस बड़े सवाल का जवाब है जो युवा पूछ रहे हैं – क्या मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव बिना जांच के हो सकते हैं? क्या लोकतंत्र की नींव पर उठ रहे सवालों को दबाया जा सकता है?
अदालत में आज जो दलीलें रखी जाएंगी, वो सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहेंगी। ये उन हजारों युवाओं की आवाज भी हैं जो कह रहे हैं कि चुनाव की निष्पक्षता कोई समझौता नहीं हो सकती।
सुप्रीम कोर्ट की ये सुनवाई तय करेगी कि मतदाता अधिकारों की रक्षा के सवाल को कितनी गंभीरता से लिया जाता है।

