बंगाल की खाड़ी में डीप डिप्रेशन और पश्चिमी विक्षोभ के टकराव से बिगड़ा मिजाज, कई राज्यों में रेड अलर्ट
डिजिटल डेस्क | अखंड राष्ट्र
(akhandrashtra.com)
उत्तर भारत से लेकर तटीय इलाकों तक शनिवार सुबह जब लोग जागे, तो आसमान में छाए घने काले बादलों और गरजती बिजलियों ने मानसूनी विदाई की शांति को अचानक खौफ में बदल दिया। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बने एक गहरे अवसाद (Deep Depression) और उत्तर भारत पर सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के खतरनाक मेल के कारण देश भर के कई राज्यों में मौसम में अचानक बदलाव आया है, जिसने पिछले 24 घंटों में 8,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित राहत शिविरों में जाने पर मजबूर कर दिया और दर्जनों शहरों का जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है।
इस दुर्लभ मौसमी घटना का मुख्य केंद्र बंगाल की खाड़ी से उठा वह गहरा अवसाद है, जो आंध्र प्रदेश और ओडिशा के तटों से टकराने के बाद उत्तर-उत्तर-पश्चिम की ओर तेजी से बढ़ा। आमतौर पर सितंबर के अंत में मानसून विदाई के कगार पर होता है, लेकिन हिमालय की ओर से आ रहे पश्चिमी विक्षोभ ने इस सिस्टम से टकराकर मानसूनी हवाओं को अत्यधिक ऊर्जा दे दी है। मौसम वैज्ञानिकों ने इस अप्रत्याशित टकराव को मानसून की विदाई से ठीक पहले का ‘लास्ट हुर्राह’ (आखिरी आक्रामक दौर) करार दिया है, जिससे वायुमंडल में भारी मात्रा में नमी एकत्र हो गई है और मैदानी व पहाड़ी इलाकों में मूसलाधार बारिश शुरू हो गई है।

-मौसम में अचानक बदलाव से उत्तर और मध्य भारत में मूसलाधार बारिश और जलभराव की स्थिति।
मौसम में अचानक बदलाव के मुख्य कारण और समयावधि
मौसम विभाग और Skymet Weather की सैटेलाइट रिपोर्ट्स के अनुसार, इस मौसमी बदलाव के पीछे दो प्रमुख कारक काम कर रहे हैं:
- डीप डिप्रेशन का दबाव: बंगाल की खाड़ी से उठा यह सिस्टम मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ से होता हुआ अब उत्तर प्रदेश की ओर बढ़ रहा है, जिससे मैदानी क्षेत्रों में हवा का भारी दबाव और नमी बन गई है।
- पश्चिमी विक्षोभ से टकराव: पहाड़ों से आए पश्चिमी विक्षोभ ने इस नमी वाले मानसूनी सिस्टम को और ज्यादा आक्रामक बना दिया है, जिससे भारी मूसलाधार बारिश दर्ज की जा रही है।
IMD की रिपोर्ट के अनुसार, इस सिस्टम का सबसे घातक और गंभीर असर अगले 48 घंटों यानी 26 और 27 सितंबर तक बना रहेगा। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 28 सितंबर से यह मौसमी सिस्टम धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगेगा, जिसके बाद बारिश की तीव्रता में काफी कमी आएगी। हालांकि, दिल्ली-NCR और आसपास के इलाकों में 30 सितंबर तक हल्की से मध्यम छिटपुट बौछारें देखने को मिल सकती हैं।
कहाँ-कहाँ दिख रहा है मौसम का प्रकोप?
मौसम विभाग ने संकट की गंभीरता को देखते हुए कई प्रमुख राज्यों के लिए ‘Red Alert’ और ‘Orange Alert’ जारी किया है:
उत्तर प्रदेश (UP): राज्य में रेड अलर्ट जारी है। पूर्वी और मध्य यूपी के वाराणसी, प्रयागराज और लखनऊ जैसे जिलों में पिछले 24 घंटों में 120mm से अधिक मूसलाधार बारिश दर्ज की गई है। इसके चलते निचले इलाकों में गंभीर जलभराव (Waterlogging) हो गया है और सड़कें तालाब में बदल गई हैं।
उत्तराखंड: कुमाऊं और गढ़वाल के पहाड़ी जिलों में अत्यंत भारी बारिश के कारण रेड अलर्ट लागू है। जगह-जगह भूस्खलन (Landslide) और फ्लैश फ्लड के चलते कई मुख्य मार्ग अवरुद्ध हो गए हैं। प्रशासन ने पर्यटकों को पहाड़ों की यात्रा स्थगित करने की सख्त चेतावनी दी है।
ओडिशा और छत्तीसगढ़: मूसलाधार बारिश के चलते दक्षिण ओडिशा के कोरापुट और मल्कानगिरी जैसे जिलों में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं। राज्य सरकार द्वारा 8,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों व राहत शिविरों (Relief Camps) में पहुंचाया गया है।
दिल्ली-NCR: मानसून की शुरुआती विदाई के बाद इस नए सिस्टम के कारण एक बार फिर काले बादल छा गए हैं और तेज हवाओं के साथ बारिश का दौर शुरू हो चुका है।
मानवीय त्रासदी और प्रशासनिक चेतावनी
मौसम के इस तांडव का सबसे दर्दनाक पहलू धरातल पर आम लोगों पर पड़ रहा प्रभाव है। ओडिशा के मल्कानगिरी जिले की निवासी 42 वर्षीय सुभद्रा बेहेरा की आपबीती इस त्रासदी को बयान करती है। सुभद्रा ने बताया, “रात के 2 बजे अचानक उफनती नदी का पानी हमारे कच्चे मकान में घुसने लगा। बच्चों को जगाकर हम सिर्फ जान बचाकर भागे। घर का सारा सामान पानी में बह गया और अब हम प्रशासन द्वारा बनाए गए राहत शिविर में तिरपाल के नीचे रहने को मजबूर हैं।”
हालात की गंभीरता को रेखांकित करते हुए मौसम विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने चेतावनी जारी की है:

“बंगाल की खाड़ी में बने डीप डिप्रेशन और उत्तर भारत में पश्चिमी विक्षोभ के एक साथ सक्रिय होने से वायुमंडल में अत्यधिक नमी आ गई है। यह एक असामान्य मौसमी संयोजन है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में अगले 48 घंटे बेहद संवेदनशील हैं। हमने संबंधित राज्य प्रशासनों को सतर्क रहने और आम जनता से 27 सितंबर की शाम तक अनावश्यक यात्राओं से बचने की सिफारिश की है।”
— डॉ. मृत्युंजय महापात्रा, महानिदेशक (DG), भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD)
प्रशासन ने सुरक्षा सलाह जारी करते हुए प्रभावित क्षेत्रों के निवासियों को जलभराव वाले स्थानों और बिजली के खंभों से दूर रहने के निर्देश दिए हैं। आपातकालीन टीमों को हाई अलर्ट पर रखा गया है ताकि किसी भी अनहोनी से निपटा जा सके।


