सीतापुर रेलवे क्रॉसिंग पर हाल ही में हुए दर्दनाक हादसे में एक नागरिक की मौत के बावजूद रेलवे प्रशासन की नींद नहीं टूटी है। इस बेहद व्यस्त मार्ग पर स्थित क्रॉसिंग अब आम जनता के लिए पूरी तरह जानलेवा साबित हो रही है। स्थानीय निवासियों द्वारा बार-बार शिकायतें दर्ज कराने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर समस्या पर आंखें मूंदे बैठे हैं।
उत्तर प्रदेश के सीतापुर जनपद में रेलवे फाटकों और पहुंच मार्गों की बदहाली किसी से छिपी नहीं है। क्रॉसिंग के निकट पटरियों के दोनों ओर बड़े-बड़े गड्ढे हो चुके हैं। गिट्टियां बिखरने और सड़क टूटने के कारण यहां से गुजरने वाले दोपहिया और चारपहिया वाहन अक्सर अनियंत्रित हो जाते हैं। हालिया दुर्घटना ने साबित कर दिया है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी लोगों की जान पर भारी पड़ रही है।
सीतापुर रेलवे क्रॉसिंग की बदहाली और प्रशासनिक लापरवाही
सीतापुर रेलवे क्रॉसिंग से रोजाना हजारों स्कूली बच्चे, किसान, व्यापारी और कामकाजी लोग आवागमन करते हैं। जब भी ट्रेन आने का समय होता है, फाटक बंद होने के दौरान सड़क पर भीषण जाम लग जाता है। फाटक खुलते ही उबड़-खाबड़ रास्ते पर वाहनों की आपाधापी मच जाती है, जिससे पटरियों के बीच वाहन फंसने का अंदेशा बना रहता है।
स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पूर्व में हुए हादसे के बाद रेलवे के तकनीकी अमले ने केवल औपचारिकता पूरी करते हुए खानापूर्ति की थी। मरम्मत के नाम पर कुछ पत्थर डालकर छोड़ दिए गए, जिससे स्थिति सुधरने के बजाय और अधिक जोखिम भरी हो गई है। विभागीय सुस्ती से क्षेत्रीय जनता में आक्रोश चरम पर पहुंच चुका है।
सड़क पर गड्ढे और सुरक्षा इंतजामों का अभाव
इस जानलेवा रेलवे क्रॉसिंग पर बुनियादी सुरक्षा व्यवस्था का पूरी तरह अभाव देखने को मिलता है। राहगीरों को किन मुख्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, उसका विवरण इस प्रकार है:
- पटरियों के बीच और संपर्क मार्ग पर बने जानलेवा गड्ढे वाहनों के पहियों को जाम कर देते हैं।
- क्रॉसिंग के आसपास पर्याप्त स्ट्रीट लाइट न होने के कारण रात के समय दुर्घटना का खतरा दोगुना हो जाता है।
- फाटक संचालन के समय उचित चेतावनी संकेतक और स्पीड ब्रेकर नदारद हैं।
- एंबुलेंस और आपातकालीन सेवाओं को भी घंटों जाम में फंसे रहना पड़ता है।
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ओवरब्रिज निर्माण की पुरानी मांग की अनदेखी
क्षेत्रीय नागरिकों और समाजसेवियों ने सीतापुर रेलवे क्रॉसिंग पर एक स्थायी ओवरब्रिज या अंडरपास बनाने की मांग कई बार उठाई है। जनप्रतिनिधियों ने चुनावों के दौरान ओवरब्रिज बनवाने के बड़े-बड़े वादे तो किए, लेकिन चुनाव बीतते ही मामला ठंडे बस्ते में चला गया। यदि समय रहते इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, तो भविष्य में और भी बड़े हादसों से इनकार नहीं किया जा सकता।
सीतापुर रेलवे क्रॉसिंग पर सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त कराने, मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा देने और मार्ग की तत्काल मरम्मत कराने को लेकर अब स्थानीय स्तर पर विरोध प्रदर्शन की रणनीति बनाई जा रही है। आम जनता की मांग है कि रेलवे बोर्ड और जिला प्रशासन तत्काल संज्ञान लेकर इस जानलेवा रास्ते को दुरुस्त करे ताकि मासूम जिंदगियों को असमय काल के गाल में समाने से बचाया जा सके।


