New Delhi : उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इन दिनों मिशन दिल्ली पर हैं। राज्य के विकास और जनता के हितों को लेकर वे लगातार केंद्रीय मंत्रियों के साथ बैठकें कर रहे हैं। इसी कड़ी में सीएम धामी ने नई दिल्ली के कर्तव्य भवन में केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी से मुलाकात की और उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए कई अहम प्रस्ताव पेश किए।
ईंधन आपूर्ति पर बड़ी मांग: 100% सप्लाई का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री के सामने उत्तराखंड की विशेष जरूरतों का कच्चा चिट्ठा रखा। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि प्रदेश में साल भर चलने वाली पर्यटन गतिविधियों और स्थानीय जरूरतों को पूरा करने के लिए कमर्शियल LPG की आपूर्ति में कोई कटौती नहीं होनी चाहिए।
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मांग: कमर्शियल LPG की सप्लाई को 100 प्रतिशत बनाए रखा जाए।
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जरूरत: राज्य की बढ़ती मांग को देखते हुए लगभग 9,67,949 कमर्शियल सिलेंडरों की आवश्यकता है।
आपदा के लिए ‘रिजर्व प्लान’: 5% अतिरिक्त कोटा
पहाड़ी राज्य होने के नाते उत्तराखंड को हर साल मानसून और प्राकृतिक आपदाओं की चुनौती झेलनी पड़ती है। सीएम धामी ने दूरदर्शिता दिखाते हुए मांग की कि आपदा राहत और बचाव कार्यों के लिए राज्य को 5 प्रतिशत अतिरिक्त आवंटन (करीब 48,397 सिलेंडर) मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि कठिन रास्तों और भूस्खलन जैसी स्थितियों में यह रिजर्व स्टॉक रसद और राहत कार्यों में संजीवनी साबित होगा।
‘मुख्य सेवक’ के द्वार पर फरियादी: शिकायतों पर त्वरित एक्शन
दिल्ली रवाना होने से पहले सीएम धामी का एक और सक्रिय रूप देखने को मिला। उन्होंने देहरादून में ‘मुख्य सेवक सदन’ के जरिए राज्य भर से आए नागरिकों की समस्याएं सुनीं और प्रशासन को आईना भी दिखाया।
अधिकारियों को दो टूक: “फाइलें न लटकाएं”
मुख्यमंत्री ने जनसुनवाई के दौरान पाया कि कुछ विभागों में जनता के काम अटके हुए हैं। इस पर उन्होंने सख्त रुख अपनाते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए:
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सड़क, पानी, बिजली और स्वास्थ्य जैसे जरूरी मुद्दों पर On-the-spot कार्रवाई हो।
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जनता की शिकायतों का निस्तारण केवल कागजों पर नहीं, बल्कि धरातल पर दिखना चाहिए।
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देरी करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त प्रशासनिक कदम उठाए जाएंगे।
विकास और सुरक्षा का संतुलित मॉडल
मुख्यमंत्री का यह दौरा साफ संकेत देता है कि उत्तराखंड सरकार एक तरफ जहां केंद्र के सहयोग से बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को मजबूत कर रही है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय स्तर पर जनता के साथ सीधा संवाद कर रही है। राज्य की पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए ईंधन की निर्बाध आपूर्ति और आपदा प्रबंधन को सरकार अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता मान रही है।
