उत्तर प्रदेश की राजनीति में राज्यसभा चुनाव के बीच समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के एक बयान ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। अखिलेश यादव ने 6 अक्टूबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “अब हमारी निगाह तीन पर नहीं, चार सौ तीन पर है।” उनके इस बयान को राज्यसभा की तीसरी सीट पर दावा छोड़कर 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर फोकस बढ़ाने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
सपा ने तीसरा राज्यसभा उम्मीदवार नहीं उतारा
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चुनाव होना है। समाजवादी पार्टी ने पहले ही रामगोपाल यादव और धनराज परिमल नथवाणी को उम्मीदवार बनाया था। पार्टी की ओर से तीसरा उम्मीदवार उतारने को लेकर कई दिनों से चर्चाएं चल रही थीं, लेकिन 6 अक्टूबर को अखिलेश यादव के बयान के बाद तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई। सपा अब तीसरे उम्मीदवार के बजाय 2027 के विधानसभा चुनाव पर अपना ध्यान केंद्रित करती दिखाई दे रही है।
राज्यसभा चुनाव में एक उम्मीदवार को जीतने के लिए 37 प्रथम वरीयता वोट की जरूरत है। उत्तर प्रदेश विधानसभा में फिलहाल 396 सदस्य हैं, क्योंकि पिछले कुछ समय में सात विधायकों की सीटें खाली हुई हैं। ऐसे में सपा के पास दो उम्मीदवारों को जिताने की स्थिति है, लेकिन तीसरी सीट के लिए उसे अतिरिक्त समर्थन की जरूरत पड़ती।
तीसरी सीट पर जोखिम क्यों नहीं लिया?
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक तीसरा उम्मीदवार उतारने की स्थिति में सपा को अपने मौजूदा विधायकों के साथ दूसरे दलों के कुछ विधायकों के समर्थन या क्रॉस वोटिंग पर निर्भर रहना पड़ सकता था। ऐसी स्थिति में अगर पर्याप्त वोट नहीं मिलते तो पार्टी को राजनीतिक नुकसान भी उठाना पड़ सकता था।
इसी वजह से सपा ने तीसरे उम्मीदवार को मैदान में उतारने के बजाय अपने मौजूदा दो उम्मीदवारों पर फोकस करना ज्यादा सुरक्षित समझा। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, क्रॉस वोटिंग की आशंका और 2027 विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी की एकजुटता बनाए रखना भी इस फैसले के पीछे अहम कारणों में शामिल माना जा रहा है।
अब असली निशाना 2027 का विधानसभा चुनाव
अखिलेश यादव का “तीन नहीं, 403” वाला बयान सिर्फ राज्यसभा चुनाव से दूरी बनाने तक सीमित नहीं माना जा रहा। 403 का सीधा मतलब उत्तर प्रदेश विधानसभा की कुल 403 सीटों से है। यानी सपा अब अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर अपनी रणनीति और संगठन को मजबूत करने पर जोर देना चाहती है।
2027 का चुनाव समाजवादी पार्टी के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगा। पार्टी की कोशिश होगी कि 2022 के मुकाबले अपना प्रदर्शन बेहतर किया जाए और भाजपा के सामने मजबूत चुनौती खड़ी की जाए। ऐसे में अखिलेश यादव का यह बयान कार्यकर्ताओं को भी विधानसभा चुनाव के लिए तैयार रहने का राजनीतिक संदेश माना जा रहा है।
BJP के लिए भी बड़ी चुनौती की तैयारी?
अखिलेश यादव के बयान से एक बात साफ है कि समाजवादी पार्टी अब राज्यसभा की एक अतिरिक्त सीट के लिए जोखिम लेने के बजाय अपना राजनीतिक ध्यान उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों पर लगाना चाहती है। हालांकि यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि यह रणनीति 2027 में भाजपा को कितनी बड़ी चुनौती देगी, लेकिन इतना जरूर है कि “तीन नहीं, 403” का नारा आने वाले विधानसभा चुनाव में सपा के राजनीतिक अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है।
आने वाले महीनों में सीटों के समीकरण, गठबंधन, उम्मीदवारों का चयन और जमीनी संगठन यह तय करेंगे कि अखिलेश यादव का 403 वाला दांव भाजपा के सामने कितना असरदार साबित होता है।


