अखिलेश यादव का चुनाव आयोग पर हमला अब तक के सबसे तीखे रूप में सामने आया है। संसद भवन के मकर द्वार से लेकर निर्वाचन सदन तक निकले INDIA गठबंधन के विशाल विरोध मार्च के दौरान सियासी पारा बेहद चढ़ गया। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने केंद्र की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की साठगांठ पर सीधे गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
संसद मार्ग पर दिल्ली पुलिस द्वारा की गई भारी नाकेबंदी और बैरिकेड्स के बीच अखिलेश यादव का चुनाव आयोग पर हमला जारी रहा। उन्होंने मतदाता सूची में धांधली का दावा करते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त CEC ज्ञानेश कुमार को खुली चुनौती दी और उत्तर प्रदेश की वोटर लिस्ट में Form-7 voter deletion के जरिए की गई गड़बड़ी का हिसाब मांगा।
1. “हमने रंगे हाथ पकड़ा”: अखिलेश यादव का सनसनीखेज खुलासा
विरोध प्रदर्शन के दौरान मीडिया कर्मियों और कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए अखिलेश यादव ने साफ शब्दों में कहा कि समाजवादी पार्टी ने वोटर लिस्ट से नाम काटने की इस सुनियोजित साजिश को “रंगे हाथ” पकड़ा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर भी सपा समर्थकों और विपक्षी नेताओं ने इस प्रदर्शन के वीडियो शेयर करते हुए चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल दागे हैं।
अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर और अन्य जिलों के स्थानीय मतदाताओं का नाम लेकर CEC ज्ञानेश कुमार पर सीधा निशाना साधा:
”अगर भारतीय जनता पार्टी इतनी ही निष्पक्ष है और चुनाव आयोग पाक-साफ है, तो CEC ज्ञानेश कुमार खुद यहां बाहर आएं और देश के सामने समझाएं कि नंदलाल निषाद के नाम पर किसके फर्जी हस्ताक्षर करवाए गए? दशरथ के नाम पर 100 फर्जी फॉर्म किसने तैयार किए? मुख्य निर्वाचन आयुक्त को यहां आकर जवाब देना होगा। हमने उन्हें पकड़ा है… समाजवादियों ने इस फर्जीवाड़े को रंगे हाथ पकड़ा है।”
2. Form-7 Voter Deletion के नियमों का खुला उल्लंघन
अखिलेश यादव ने निर्वाचन आयोग के अपने ही गजट और कानूनी नियमों का हवाला देते हुए बताया कि किसी भी नागरिक का नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए सख्त गाइडलाइंस बनाई गई हैं:
- नियमों की अनदेखी: Form-7 voter deletion के नियमानुसार कोई भी व्यक्ति या संस्था एक बार में 5 से अधिक वोट काटने या 5 से अधिक Form-7 आवेदन जमा नहीं करा सकती।
- व्यापक फर्जीवाड़े का दावा: अखिलेश यादव का आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर 100 से अधिक फर्जी Form-7 खामोशी से दाखिल कराए गए, ताकि एक खास वर्ग और विचारधारा के मतदाताओं के नाम सूची से गायब किए जा सकें।
- पुराने चुनाव का हवाला: उन्होंने कहा कि पिछले विधानसभा और लोकसभा चुनावों के दौरान भी आयोग ने ऐसे कई चुनावी कदाचारों पर जानबूझकर आंखें मूंद ली थीं।
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3. पुलिस बैरिकेड्स और सड़क पर धरना: “भाजपा घबराई हुई है”
संसद के मकर द्वार से शुरू होकर निर्वाचन सदन (ECI मुख्यालय) की ओर बढ़ रहे INDIA गठबंधन के 140 से अधिक सांसदों को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने कई लेयर की सुरक्षा बैरिकेडिंग कर रखी थी। सड़क पर रोके जाने के बाद अखिलेश यादव अन्य विपक्षी नेताओं के साथ सड़क पर ही धरने पर बैठ गए।
सड़क पर विरोध जताते हुए सपा प्रमुख ने कहा:
”हम कभी कड़कती धूप, गर्मी या पसीने से डरने वाले लोग नहीं हैं। भाजपा के लोग विपक्ष की इस एकजुटता और पारदर्शिता की मांग से घबराए हुए हैं, यही वजह है कि रास्ते में पुलिस के बड़े-बड़े बैरिकेड्स खड़े कर दिए गए हैं। यह लोकतंत्र और संविधान को बचाने का आंदोलन है।”
4. ‘वन नेशन वन इलेक्शन’ पर तीखा प्रहार
अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार की ‘वन नेशन वन इलेक्शन’ योजना पर भी तीखा प्रहार करते हुए इसे चुनावी धांधली का जरिया बताया। उन्होंने कहा कि सत्तापक्ष एक ही बार में पूरे देश की मतदाता सूची में गड़बड़ी और चुनावी घपला करके पांच साल तक बिना किसी जांच-परख के बेफिक्र राज करना चाहता है। निष्पक्ष चुनाव के लिए संस्थागत जवाबदेही तय होना बेहद जरूरी है।
5. “लोकतंत्र बचाओ” अभियान और CEC ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे की मांग
यह प्रदर्शन विपक्ष के देशव्यापी “लोकतंत्र बचाओ” (Save Democracy) अभियान का एक प्रमुख हिस्सा है। मार्च में शामिल विपक्षी दलों के नेताओं ने आरोप लगाया कि संवैधानिक संस्थाएं अब अपनी स्वायत्तता खो चुकी हैं।
- CEC के इस्तीफे की मांग: विपक्षी सांसदों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की।
- जन-आंदोलन का ऐलान: विपक्ष ने साफ किया है कि वे चुनावों का बहिष्कार नहीं करेंगे, बल्कि जनता के बीच जाकर वोटों की रक्षा करेंगे और इस फर्जीवाड़े का पर्दाफाश करेंगे।
निर्वाचन सदन के बाहर हुए इस घेराव और सड़क पर हुए हंगामे के बाद चुनाव आयोग और विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक घमासान और ज्यादा उग्र होने की पूरी संभावना है।


