मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और SIR प्रक्रिया पर चल रहे विवाद के बीच चुनाव आयोग ने दो बड़े फैसले लिए हैं।
पहला फैसला— राजनीतिक दलों को मतदाता सूची का पढ़ा जा सकने वाला (readable) संस्करण उपलब्ध कराया जाएगा। ड्राफ्ट और फाइनल दोनों संस्करणों की सॉफ्ट कॉपी बिना मतदाताओं की तस्वीरों के, पढ़ने योग्य पीडीएफ फॉर्मेट में दी जाएगी। चुनाव के समय अल्फाबेटिकल ऑर्डर में व्यवस्थित readable पीडीएफ कॉपी पेन ड्राइव या अन्य इलेक्ट्रॉनिक स्टोरेज डिवाइस पर मांग और निर्धारित भुगतान के आधार पर रिटर्निंग ऑफिसर या जिला निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय से उम्मीदवारों को उपलब्ध कराई जा सकती है।
दूसरा फैसला— 17 राज्यों में मतदाता सूची के वार्षिक विशेष पुनरीक्षण (SSR) का आदेश दिया गया है। SSR हर साल किया जाने वाला विशेष सारांश पुनरीक्षण है, जिसमें नए नाम जोड़े जाते हैं और पुरानी जानकारी अपडेट या हटाई जाती है। इसकी अर्हता तिथि 1 जनवरी 2027 तय की गई है।
अधिक जानकारी के लिए
मतदाता सूची और चुनाव से जुड़ी आधिकारिक जानकारी के लिए आप भारत निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर विज़िट कर सकते हैं।
जिन राज्यों में SSR होगा उनमें उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा, पंजाब, मणिपुर, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात, केरल, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और कुछ केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं। जिन राज्यों में SIR चल रहा है या हाल ही में पूरा हुआ है, वहां SSR का कार्यक्रम बाद में घोषित किया जाएगा।
कांग्रेस इन फैसलों का क्रेडिट राहुल गांधी को दे रही है। राहुल गांधी लंबे समय से मशीन से पढ़ी जा सकने वाली मतदाता सूची की मांग कर रहे थे।
कांग्रेस के संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि ये कदम काफी नहीं है। उन्होंने ज्ञानेश कुमार से कहा— आपको इस्तीफा दे देना चाहिए और सरकारी गवाह बन जाना चाहिए। मोदी-शाह के इशारे पर जो नुकसान किया गया है, वह अधिसूचना के जरिए यू-टर्न लेने से ठीक नहीं होगा।
वेणुगोपाल ने आगे कहा कि 2025 से ही मशीन से पढ़े जा सकने वाली मतदाता सूची की मांग की जा रही है। पारदर्शिता तो बस न्यूनतम आवश्यकता है। ये ऐसा कुछ नहीं है जो पिछले गुनाहों से बरी कर दे। 13 करोड़ भारतीयों को उनके मताधिकार से वंचित करना देशद्रोह के समान है। आपको पद छोड़ देना चाहिए। शुरुआत SIR को रद्द करने और चुनाव आयोग में नियुक्तियों की प्रक्रिया में बदलाव से होनी चाहिए। ये कदम बहुत छोटा और बहुत देर से उठाया गया है।
चुनाव आयोग के इन दोनों फैसलों के बावजूद विपक्ष का रुख साफ है— ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना चाहिए और SIR प्रक्रिया पर व्यापक सुधार होना चाहिए।
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