जौनपुर। महराजगंज क्षेत्र के हनुमान जी माता दुर्गा मंदिर फक्तूपुर के प्रांगण में चल रही पांच दिवसीय श्री राम कथा के आज चतुर्थ दिन वाराणसी की धरती से पधारी मानस कोकिला पूज्य कथा व्यास डॉ. सुधा पांडे द्वारा बड़े ही मार्मिक ढंग से श्री राम कथा सुनाई जा रही है प्रह्लाद द्वारा विष्णु भक्ति करने पर हिरण्यकशिपु ने उन्हें मारने के कई प्रयास किए, जिसमें होलिका दहन का प्रयास भी शामिल था, जिसमें होलिका जल गई और प्रह्लाद बच गए।नरसिंह अवतार का वध: भगवान विष्णु ने नरसिंह रूप में अवतरित होकर, सांझ के समय, दहलीज पर, अपनी जांघों पर रखकर, नाखूनों से उसका वध किया।पौराणिक कथाओं के अनुसार, हिरण्यकशिपु और उसका भाई हिरण्याक्ष भगवान विष्णु के द्वारपाल ‘जय’ और ‘विजय’ थे, जो शाप के कारण राक्षस बने। वही शबरी और श्रीराम जी कथा का वर्णन करते हुए कहा कि नवधा भक्ति राम जी ने सुनाया लेकिन मैया शबरी रहती है कि है भगवान मैं बहुत बड़ी आत्मा हूं अधमा हूं वही सभी से निवेदन करते हुए यह कहा कि भगवान श्री रामचंद्र जी कहते हैं कि अगर कोई हमारी भक्ति करना नहीं जानता है भगवान ने कहा हमारे चरणों में गिर करके निश्चल भाव से स्तुति वंदना करना नहीं जानता तो शरणागत होकर केवल इतना कह दे की मैं आपकी स्तुति करना नहीं जानता हूं वही सबसे बड़ी स्तुति होगी तथा यह भी कहा भगवान के सामने अहंकार लेकर जाओगे तो कुछ नहीं मिलेगा जिसके जीवन में भक्ति नहीं उसके जीवन में कुछ नहीं हनुमान जी की कथा सुनाते हुए कहा कि लंका दहन करते समय उन्होंने अशोक वाटिका को नहीं जलाया था, क्योंकि वहां सीताजी रहती थीं। इसी तरह उन्होंने रावण के भाई विभीषण का भवन भी नहीं जलाया, क्योंकि विभीषण के भवन के द्वार पर तुलसी का पौधा लगा था। साथ ही भगवान विष्णु के चिन्ह शंख, चक्र और गदा भी बने हुए थे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि विभीषण के घर के ऊपर राम नाम अंकित था। उसी क्षण से विभीषण, हनुमान जी के प्रिय हो गए थे। यही कारण है कि जब विभीषण श्री राम की शरण में आये और सुग्रीव ने उनके प्रति आशंका प्रकट करते हुए दंड देने का सुझाव दिया, तो हनुमानजी ने उन्हें शिष्ट मान कर शरण में लेने का अनुरोध किया था और प्रभु राम ने उसे स्वीकार कर लिया था। वही वृंदावन की धरती से पधारे कथा व्यास माधव दास जी महाराज द्वारा भक्तों को सुंदर कथा सुनाई जा रही है जिसका सभी ने बखान किया कथा मंच का कुशल संचालन आशीष द्विवेदी द्वारा किया जा रहा है वहीं कथा प्रांगण में पहुंचे पत्रकार अमित पांडे का डा. सुधा पाण्डेय ने बखान कर आशीर्वाद दिया और कहा कि हर धार्मिक आयोजन में उपस्थित सराहनीय है। इस मौके पर कथा समिति के अध्यक्ष संदीप सिंह सभी आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त किया इस मौके पर दिनेश सिंह, धर्मेंद्र सिंह, अजय प्रताप सिंह, सुनील सिंह, चंदन सिंह, राहुल सिंह, मंदिर पुजारी ओंकार नाथ मिश्रा, गिरीश चंद्र उपाध्याय, विनोद सेठ सच्चिदानंद त्रिपाठी, राजेश तिवारी सहित सैकड़ो की संख्या में कथा प्रेमी उपस्थित रहे।
भगवान के सामने अहंकार लेकर जाओगे तो कुछ नहीं मिलेगा : डॉ सुधा पांडे

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