उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में शुक्रवार को विधान परिषद के शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में मतदान जारी है। इसी दौरान सोशल मीडिया पर एक आरोप तेजी से चर्चा में आ गया है। आरोप यह है कि मतदान केंद्र पर पहुंचे एक मतदाता को पीठासीन अधिकारी ने बताया कि उनका वोट पहले ही डाल दिया गया है। मूल पहचान पत्र होने के बावजूद उन्हें दस्तावेजों के मिलान के नाम पर शाम 4 बजे दोबारा आने को कहा गया।
क्या कहा जा रहा है?
समाजवादी पार्टी के आधिकारिक हैंडल और कई सोशल मीडिया यूजर्स ने इस घटना का वीडियो और शिकायत पोस्ट की है। पोस्ट में दावा किया गया है कि मतदाता मतदान करने पहुंचा। जब अधिकारियों ने दस्तावेज मिलाए तो पता चला कि उनका वोट पहले ही दर्ज हो चुका है। मतदाता ने हैरानी जताई कि बिना उनके पहुंचे वोट कैसे पड़ गया।
पीठासीन अधिकारी ने कथित तौर पर दस्तावेजों की जांच का हवाला देते हुए उन्हें शाम 4 बजे फिर आने को कहा। यह घटना सदर ब्लॉक क्षेत्र के मतदान केंद्र से जुड़ी बताई जा रही है। समाजवादी पार्टी ने चुनाव आयोग, मुख्य निर्वाचन अधिकारी उत्तर प्रदेश और मैनपुरी के जिलाधिकारी से संज्ञान लेने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि मामले की तत्काल जांच हो और मतदाता का मताधिकार सुनिश्चित किया जाए।
चुनाव का संदर्भ
मैनपुरी में आज आगरा खंड के शिक्षक और स्नातक विधान परिषद चुनाव के लिए मतदान हो रहा है। जिले में कुल 25 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। इनमें स्नातक के लिए 16 और शिक्षक के लिए 9 केंद्र शामिल हैं। कुल करीब 14,746 मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने वाले हैं। मतदान सुबह 8 बजे शुरू हुआ और शाम 4 बजे तक चलेगा। यह चुनाव बैलेट पेपर से हो रहा है।
जिला प्रशासन ने मतदान को लेकर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की है। सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही है। मतदाताओं की तलाशी के बाद ही प्रवेश दिया जा रहा है। मोबाइल फोन केंद्र के अंदर ले जाने पर रोक है। जिलाधिकारी डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी और एसपी गणेश प्रसाद साहा ने कई बूथों का निरीक्षण भी किया।
आधिकारिक जानकारी
निर्वाचन संबंधी आधिकारिक सूचनाओं के लिए मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तर प्रदेश की वेबसाइट देखें।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
समाजवादी पार्टी की अन्य शिकायतों (कुछ बूथों पर बिना पहचान पत्र के मतदान कराने के आरोप) पर जिला प्रशासन ने संज्ञान लिया। उप जिला निर्वाचन अधिकारी और एसपी सिटी ने संबंधित बूथों का संयुक्त निरीक्षण किया। प्रशासन ने कहा कि पीठासीन अधिकारियों और सभी पार्टियों के पोलिंग एजेंटों से बातचीत के बाद मतदान प्रक्रिया शांतिपूर्ण और निष्पक्ष पाई गई।
इस विशिष्ट मतदाता वाले आरोप पर प्रशासन की तरफ से अभी कोई अलग आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
सोशल मीडिया पर चर्चा
यह आरोप सोशल मीडिया पर तेजी से फैला। कई यूजर्स ने इसे “वोट चोरी” का सबूत बताया। कुछ पोस्ट में पूछा गया कि बिना मतदाता के पहुंचे वोट कैसे पड़ गया। विपक्षी दलों और समर्थकों ने चुनाव आयोग से तत्काल कार्रवाई की मांग की।
मैनपुरी में मतदाता सूची को लेकर पिछले कुछ हफ्तों से चर्चा चल रही थी। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान कई नाम काटे गए थे, जिनकी घर-घर सत्यापन प्रक्रिया भी चली। विपक्ष पहले भी मतदाता सूची में अनियमितताओं के आरोप लगा चुका है।
जांच की मांग
मतदान के दौरान ऐसे आरोप सामने आने से निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। चुनाव आयोग और स्थानीय प्रशासन से उम्मीद की जा रही है कि इस शिकायत की तुरंत जांच हो। अगर कोई अनियमितता पाई जाती है तो दोषियों पर कार्रवाई हो और संबंधित मतदाता को मताधिकार का इस्तेमाल करने का मौका दिया जाए।
मैनपुरी में मतदान अभी जारी है। प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है। इस आरोप की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पूरी तस्वीर साफ होगी। फिलहाल यह एक राजनीतिक आरोप है, जो सोशल मीडिया तथा राजनीतिक दलों के माध्यम से सामने आया है। चुनाव आयोग का रुख क्या होता है, यह देखना बाकी है।
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