By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
Akhand Rashtra NewsAkhand Rashtra NewsAkhand Rashtra News
  • होम
  • राज्य
    • उत्तराखंड
    • बिहार
    • पश्चिम बंगाल
    • मध्य प्रदेश
    • गुजरात
    • महाराष्ट्र
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • अपराध
  • साहित्य
  • धर्म
  • एक्सक्लूसिव
  • सम्पादकीय
  • ई पेपर
Reading: लोकतंत्र का शवदाह: 18 जुलाई वो काला दिन और तानाशाही का चरम अहंकार!
Share
Notification Show More
Font ResizerAa
Akhand Rashtra NewsAkhand Rashtra News
Font ResizerAa
  • होम
  • राज्य
    • उत्तराखंड
    • बिहार
    • पश्चिम बंगाल
    • मध्य प्रदेश
    • गुजरात
    • महाराष्ट्र
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • अपराध
  • साहित्य
  • धर्म
  • एक्सक्लूसिव
  • सम्पादकीय
  • ई पेपर
Have an existing account? Sign In
Follow US
© 2008 - 2026 Akhand Rashtra News All Rights Reserved. Proudly Made By Akshant Media Solution
Akhand Rashtra News > सम्पादकीय > लोकतंत्र का शवदाह: 18 जुलाई वो काला दिन और तानाशाही का चरम अहंकार!
सम्पादकीयएक्सक्लूसिवताज़ा ख़बरेंराजनीति

लोकतंत्र का शवदाह: 18 जुलाई वो काला दिन और तानाशाही का चरम अहंकार!

Omkar Tripathi
Last updated: July 18, 2026 11:16 pm
Omkar Tripathi
4 weeks ago
Share
लोकतंत्र का शवदाह: 18 जुलाई वो काला दिन और तानाशाही का चरम अहंकार!
SHARE

अपनी भाषा चुने।

नई दिल्ली, 18 जुलाई। आज स्वतंत्र भारत के इतिहास में एक ऐसा काला पन्ना लिखा गया है, जिसने यह साबित कर दिया कि इस देश में अब जनता की आवाज़ सुनना तो दूर, उसे कुचल देना ही सत्ता का इकलौता धर्म बन चुका है। 18 जुलाई को देश की राजधानी में परीक्षा घोटालों और देश में लगातार हो रहे पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दों पर शांतिपूर्ण ढंग से आवाज़ उठा रहे सोनम वांगचुक को जिस बर्बरता से ज़बर्दस्ती डिटेन करके अस्पताल के कमरों में कैद किया गया, वह सीधे तौर पर लोकतंत्र की क्रूर हत्या है।

Contents
पेपर लीक की महामारी और ‘प्रधान’ की बेशर्मीप्रधानसेवक की चुप्पी और मीडिया का पहराआर-पार की लड़ाई: 20 जुलाई का फैसला

यह दमन सिर्फ एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं है, बल्कि देश के संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकार—’राइट टू प्रोटेस्ट’ (शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार)—का सरेआम गला घोंटना है। जब सरकारें अपने ही नागरिकों से डरने लगें, तो वे पुलिस को आगे कर देती हैं।

पेपर लीक की महामारी और ‘प्रधान’ की बेशर्मी

आज देश का युवा सड़कों पर है। तमाम बड़ी परीक्षाओं में जो धांधली और पेपर लीक का संगठित खेल चल रहा है, उसने देश के करोड़ों छात्रों का भविष्य अंधकार में डाल दिया है। लेकिन इस पूरे तंत्र के मुखिया, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के माथे पर जूं तक नहीं रेंग रही। इस विरोध प्रदर्शन की सबसे मुख्य और जायज़ मांग ही यही है कि धर्मेंद्र प्रधान तुरंत अपने पद से इस्तीफा दें। जिसने देश की शिक्षा व्यवस्था को मजाक बना दिया हो, उसे एक पल भी अपनी कुर्सी पर बैठने का नैतिक अधिकार नहीं है।

मगर अफ़सोस, इस सरकार की डिक्शनरी में ‘नैतिकता’ और ‘जवाबदेही’ जैसे शब्द बचे ही नहीं हैं। सरकार की क्रेडिबिलिटी (विश्वसनीयता) आज पूरी तरह शून्य हो चुकी है। देश में चाहे रेलवे हादसे हों, पेपर लीक हो या सीमा पर संकट हो, सरकार का कोई भी नुमाइंदा मुंह खोलने को तैयार नहीं होता।

- Advertisement -
anaya's kitchenanaya's kitchen

प्रधानसेवक की चुप्पी और मीडिया का पहरा

इस पूरे तमाशे के बीच सबसे शर्मनाक भूमिका देश के प्रधानमंत्री की है। प्रधानमंत्री अपने कार्यकर्ताओं के सम्मेलनों में व्यस्त हैं, विदेशों के दौरों और हर गैर-ज़रूरी चीज़ों पर उनकी नजर है, लेकिन देश के युवा, किसान और सोनम वांगचुक जैसे देशभक्तों को वो लगातार इग्नोर (अनदेखा) कर रहे हैं। प्रधानमंत्री की यह चुप्पी कोई सामान्य चुप्पी नहीं है, यह जनता को अवॉयड करने की एक सोची-समझी रणनीति है।

जनता के बुनियादी सवालों से भागने के लिए मीडिया को ढाल बनाया गया है। अगर कोई साहसी पत्रकार इस तंत्र से सवाल पूछने की हिम्मत करता है, तो उसकी आवाज़ को दबा दिया जाता है, उसे मुकदमों में फंसा दिया जाता है। इस तानाशाही निज़ाम में सवाल पूछना सबसे बड़ा अपराध बन चुका है।

“जब हुकूमतें जनता के सवालों से डरकर मीडिया का मुंह बंद करने लगें और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को अपराधियों की तरह अस्पतालों में नजरबंद करने लगें, तो समझ जाना चाहिए कि सत्ता का अहंकार अपने आखिरी दौर में है।”

आर-पार की लड़ाई: 20 जुलाई का फैसला

18 जुलाई की इस बर्बर कार्रवाई ने पूरे देश के आक्रोश को भड़का दिया है। लद्दाख से लेकर दिल्ली तक, छात्रों से लेकर बुद्धिजीवियों तक, अब हर कोई इस दमन के खिलाफ उठ खड़ा हुआ है। लाठी, पुलिस और प्रशासनिक शक्तियों के दुरुपयोग से आप कुछ समय के लिए आवाज़ों को कैद कर सकते हैं, लेकिन उस वैचारिक क्रांति को नहीं रोक सकते जो संसद की दीवारों को हिलाने का दम रखती है।

अब पानी सिर से ऊपर जा चुका है। अब इसका फैसला 20 जुलाई को आकर रहेगा कि लोकतंत्र की जीत होती है और सरकार घुटने टेकती है, या फिर जंतर-मंतर से चलकर लोकतंत्र की लाश को संसद भवन पहुंचने से पहले ही दफना दिया जाएगा, जिसकी कल 18 जुलाई को हत्या कर दी गई थी।

You Might Also Like

डॉ विजय तिवारी की चाची पुष्पा देवी का निधन
‘Vijay Thalapathy की जीत ऐतिहासिक…’, तमिलनाडु चुनावी रिजल्ट पर पिता चंद्रशेखर हुए भावुक, बोले- बेटे पर गर्व है
धनबाद–रांची पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में प्रिंस खान गिरोह पर बड़ा एक्शन, दो गुर्गों को लगी गोली
वरिष्ठ समाजसेवी पंचू यादव के आकस्मिक निधन से शोक की लहर
Chhattisgarh के कांकेर में बड़ा हादसा: IED ब्लास्ट में DRG के 3 जवान शहीद, तलाशी अभियान के दौरान हुई घटना
TAGGED:CjpModiSonam wangchukलोकतांत्र
Share This Article
Facebook Email Print
Omkar Tripathi
ByOmkar Tripathi
Follow:
ओमकार त्रिपाठी राजनीतिक विश्लेषक है, इसी के साथ पिछले कई वर्षों से उत्तर प्रदेश की जमीनी राजनीति, प्रशासनिक हलचल और खोजी पत्रकारिता (Crime & Investigative Reporting) में सक्रिय। 19 वर्ष पुराने प्रतिष्ठित अखबार दैनिक अखंड राष्ट्र (Akhand Rashtra) के स्थानीय संपादक है, Omkar Tripathi विशेष तौर पर निष्पक्ष आवाज और पारदर्शी गवर्नेंस के लिए प्रतिबद्ध है
Previous Article Delhi Delhi जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक के अनशन में पहुंचे पवन खेड़ा और अरविंद केजरीवाल, बोले मोदी को.. .
Next Article दिहाड़ी मजदूर की बेटी पूनम बनी प्रेरणा, नीट में शानदार सफलता पर उपायुक्त ने किया सम्मानित दिहाड़ी मजदूर की बेटी पूनम बनी प्रेरणा, नीट में शानदार सफलता पर उपायुक्त ने किया सम्मानित
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent Posts

  • हर घर तिरंगा अभियान: 13 अगस्त को दिल्ली में विशेष देशभक्ति मुशायरा
  • 2027 में फिर बनेगी योगी के नेतृत्व में भाजपा सरकार : शकील सैफी
  • “भरपूर नशा हुआ है…..!”
  • लखनऊ विकास प्राधिकरण के अधिवक्ता पैनल में आशुतोष पाण्डेय का हुआ चयन
  • गुरु पूर्णिमा पर डॉ. वेद प्रकाश ने 7 मंदिरों में टेका माथा, महंतों का किया अभिनंदन; रोपे पौधे

Recent Comments

  1. Akhand Rashtra on उत्कृष्ट शिक्षा की अलख जगाने के लिए मुंबई के वकील ने गांव में खोला स्कूल
  2. Akhand Rashtra on चलती ट्रेन में गोलीबारी, RPF के ASI और 3 यात्रियों की मौत, जयपुर-मुंबई ट्रेन में पालघर के पास फायरिंग
  3. Bhaskar Singh on माता भाग्यलक्ष्मी के दर्शनोपरांत रामराज्य सभा का समापन
  4. Ryan F on चलती ट्रेन में गोलीबारी, RPF के ASI और 3 यात्रियों की मौत, जयपुर-मुंबई ट्रेन में पालघर के पास फायरिंग
  5. AlyciaH on उत्कृष्ट शिक्षा की अलख जगाने के लिए मुंबई के वकील ने गांव में खोला स्कूल
about us

Akhand Rashtra एक राष्ट्रीय दैनिक अख़बार है, जो 18 वर्षों से निष्पक्ष, सटीक और जिम्मेदार पत्रकारिता करते हुए प्रिंट व डिजिटल माध्यमों पर सक्रिय है।

Important Category

  • उत्तर प्रदेश
  • मध्य प्रदेश
  • उत्तराखंड
  • गुजरात
  • पश्चिम बंगाल
  • बिहार
  • महाराष्ट्र

Important Links

  • देश
  • विदेश
  • एक्सक्लूसिव
  • अपराध
  • राजनीति
  • साहित्य

Quick Link

  • About Us
  • Privacy Policy
  • Terms & Conditions – Akhand Rashtra
  • Disclaimer
  • GDPR
  • Contact

Find Us on Socials

© 2008 - 2026 Akhand Rashtra News All Rights Reserved. Proudly Made By Akshant Media Solution
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?

Not a member? Sign Up