इंदौर (मध्य प्रदेश): “देश का सिस्टम छात्रों से डरता है, क्योंकि छात्र सवाल पूछते हैं। आज इस व्यवस्था को सवाल करने वाले स्टूडेंट नहीं, बल्कि आँख बंद करके हर बात स्वीकार करने वाले ‘अंधभक्त’ चाहिए।”
डिजिटल डेस्क | अखंड राष्ट्र (akhandrashtra.com)
विशेष रिपोर्ट: इंदौर
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शनिवार (19 सितंबर 2026) को मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के भारत जोड़ो मैदान (IDA ग्राउंड) में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ के पांचवें संस्करण में सीधे ‘सिस्टम’ और शीर्ष सत्ता पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला। जन-जी (Gen-Z) और युवाओं से सीधे संवाद के इस मंच पर राहुल गांधी ने ‘अंधभक्त’ शब्द को केंद्र में रखते हुए आरोप लगाया कि सत्ता में बैठे लोग युवाओं से उनकी जिज्ञासा छीनकर उन्हें एक खास विचारधारा में ढालना चाहते हैं।
करीब 15,000 छात्रों की उपस्थिति में हुए इस कार्यक्रम में प्रदेश भर से आए युवाओं ने जब नौकरियों पर 13% होल्ड, व्यापमं/पटवारी घोटाले और हॉस्टलों की बदहाली पर ग्राउंड रियलिटी का डेटा रखा, तो पूरा मैदान तालियों और नारों से गूंज उठा।

1. ‘अंधभक्त बनाम स्टूडेंट’: राहुल गांधी का ‘सिस्टम’ पर तीखा प्रहार
राहुल गांधी ने कार्यक्रम के दौरान मंच से एक विस्तृत स्लाइड प्रदर्शित करते हुए देश की शासन व्यवस्था और उसके शीर्ष नियंत्रकों पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पूरा सिस्टम शीर्ष स्तर पर बैठे कुछ चुनिंदा लोगों द्वारा चलाया जा रहा है।
राहुल गांधी ने ‘अंधभक्त’ शब्द को परिभाषित करते हुए कहा:
“एक स्टूडेंट और अंधभक्त में सबसे बड़ा अंतर ‘जिज्ञासा’ और ‘ईमानदारी’ का होता है। स्टूडेंट सवाल पूछता है, वह जानना चाहता है कि उसके स्कूल और कॉलेज क्यों खस्ताहाल हैं, उसके पेपर क्यों लीक हो रहे हैं और पढ़ाई का बजट कहाँ जा रहा है। लेकिन अंधभक्त कभी सवाल नहीं पूछता; वह नफरत फैलाता है और जो कहा जाए उसे सच मान लेता है। यही वजह है कि सिस्टम छात्रों को दबाने के लिए तंत्र का इस्तेमाल करता है।”

राहुल गांधी द्वारा उजागर किए गए 4 बड़े आर्थिक व शैक्षणिक आंकड़े:
- शिक्षा बजट में ऐतिहासिक गिरावट: देश के कुल जीडीपी (GDP) का शिक्षा बजट जो 2014 में 4.6% हुआ करता था, वह 2026 में घटकर महज 2.6% रह गया है।
- 1 लाख से अधिक सरकारी स्कूल बंद: बीते वर्षों में देश भर में 1 लाख से ज्यादा सरकारी स्कूल बंद किए जा चुके हैं, जिनमें से 55% स्कूल अकेले मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के हैं।
- छात्रों की स्कॉलरशिप पर कैंची: पिछले 10 वर्षों के दौरान देश भर के 1.5 करोड़ से अधिक वंचित और मेधावी छात्रों की स्कॉलरशिप रोक दी गई या समाप्त कर दी गई।
- 10 लाख से अधिक पद खाली: देश भर के सरकारी स्कूलों और विश्वविद्यालयों में शिक्षकों तथा प्रोफेसरों के 10 लाख से अधिक पद रिक्त पड़े हैं, लेकिन नियुक्तियाँ नहीं की जा रही हैं।
2. ‘सर, हम सिस्टम से हार गए’: छात्रों के दर्द से बेनकाब हुआ तंत्र
- 13% होल्ड का दर्द: एक एमबीबीएस और एमपीपीएससी अभ्यर्थियों ने बताया कि मध्य प्रदेश में पिछले 8 वर्षों से सभी सरकारी भर्तियों के 13% परिणाम कोर्ट केस का बहाना बनाकर ‘होल्ड’ पर डाल दिए जाते हैं। इससे 1.87 लाख से अधिक योग्य उम्मीदवार परीक्षा पास करने के बावजूद ओवरएज होकर डिप्रेशन में जी रहे हैं।
- व्यापमं और केस दर्ज करने की धमकी: देवास से आए एक छात्र ने आरोप लगाया कि जब छात्र लोक सेवा आयोग के बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करते हैं या पारदर्शिता की मांग करते हैं, तो उन्हें रोजगार देने के बजाय पुलिस केस (FIR) दर्ज कर जेल भेज दिया जाता है।
- आदिवासी हॉस्टल और मिर्च की चटनी: बड़वानी की एक आदिवासी छात्रा ने भावुक होते हुए बताया कि सरकारी हॉस्टलों में खाना और शिक्षक नहीं हैं। छात्रों को घर से मिर्च की चटनी लाकर पेट भरना पड़ता है और हॉस्टल न मिलने पर माता-पिता को खेत और गहने गिरवी रखकर निजी कमरे का किराया चुकाना पड़ता है।
छात्रों के इन सवालों पर जब राहुल गांधी ने पूछा कि क्या युवा निराश हैं, तो सामने बैठी भीड़ से आवाज आई— “सर, हम मेहनत करके थक चुके हैं, हम इस सिस्टम से हार गए हैं।“
3. रेडिसन होटल से IDA ग्राउंड तक: राहुल गांधी का मिनट-टू-मिनट शेड्यूल
राहुल गांधी का यह दौरा काफी व्यस्त और रणनीतिक रहा:
- आगमन (दोपहर 2:15 बजे): राहुल गांधी विशेष विमान से इंदौर के देवी अहिल्याबाई होल्कर एयरपोर्ट पहुंचे, जहाँ प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, विवेक तन्खा और वरिष्ठ नेताओं ने उनका स्वागत किया।
- रेडिसन में विश्राम: एयरपोर्ट से उनका काफिला सीधे रेडिसन होटल पहुंचा, जहाँ उन्होंने विश्राम किया और स्थानीय छात्र प्रतिनिधियों से अनौपचारिक चर्चा की।
- संवाद सत्र (शाम 5:30 – 8:00 बजे): IDA ग्राउंड पहुंचकर उन्होंने 2 घंटे से अधिक समय तक ‘छात्रों की गूंज’ सत्र में भाग लिया और सीधे सवालों के जवाब दिए।
- वापसी (देर रात): कार्यक्रम समाप्त करने के पश्चात वे देर रात विशेष विमान से दिल्ली लौट गए।
4. इंदौर में राजनीतिक घमासान: ‘झूठ की गूंज’ के पोस्टर और ट्रैफिक डायवर्जन

राहुल गांधी के दौरे से ठीक पहले इंदौर में भारी राजनीतिक गहमागहमी देखने को मिली:
- पोस्टर वॉर (झूठ की गूंज): शहर के प्रमुख चौराहों पर ‘झूठ की गूंज’ नाम से राहुल गांधी विरोधी होर्डिंग्स और फ्लेक्स लगाए गए थे, जिनमें उनके पुराने दावों पर सवाल उठाए गए थे। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सुबह ही इन पोस्टरों को हटाया। वहीं, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी इस दौरे पर हमला बोलते हुए इसे कांग्रेस की राजनीतिक ड्रामेबाज़ी करार दिया।
- सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था: आयोजन स्थल IDA ग्राउंड पर 40 से अधिक CCTV कैमरों से निगरानी की गई। सुरक्षा कारणों से इंदौर पुलिस ने शहर के 13 प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया था।
- सिख समुदाय का लंगर: बाहर से आए हजारों छात्रों के लिए इंदौर के सिख समाज ने लगातार 3 दिनों की तैयारी के बाद विशाल लंगर और पानी की व्यवस्था की थी।
5. 2029 चुनाव और 37 करोड़ युवा: ‘छात्रों की गूंज’ का राजनीतिक अर्थ
कोटा, देहरादून, प्रयागराज और पुणे के बाद इंदौर में हुआ यह पाँचवाँ ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम सिर्फ एक छात्र संवाद नहीं, बल्कि कांग्रेस की एक बड़ी चुनावी रणनीति का हिस्सा है।
देश में 15 से 29 वर्ष की आयु के लगभग 37 करोड़ युवा हैं, जो 2029 के आम चुनाव में करीब 26% वोटबैंक का प्रतिनिधित्व करेंगे। राहुल गांधी इस देशव्यापी अभियान के माध्यम से पेपर लीक, बेरोजगारी और शिक्षा के निजीकरण को सीधे 2029 का सबसे बड़ा राष्ट्रीय मुद्दा बनाने की कोशिश में हैं।
डिजिटल भुगतान की दिशा और टिकाऊ नकद का भविष्य
इंदौर में छात्रों का यह आक्रोश और राहुल गांधी द्वारा ‘अंधभक्त बनाम सवाल पूछते स्टूडेंट’ की बनाई गई यह नई राजनीतिक बहस आने वाले दिनों में मध्य प्रदेश और देश की राजनीति में एक नया मोड़ ला सकती है। या तो व्यवस्था को युवाओं के इन तीखे सवालों के जवाब देने होंगे, या फिर Gen-Z की यह ‘गूंज’ चुनावी नतीजों में तब्दील होगी।

