‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के खुलासे के बाद देश भर में उबाल; CJP का बड़ा ऐलान—48 घंटे में दें इस्तीफा वरना ‘जंतर-मंतर 2.0’।
डिजिटल डेस्क | अखंड राष्ट्र (akhandrashtra.com)
विशेष रिपोर्ट: नई दिल्ली
भारत के चुनावी इतिहास में मतदाता सूचियों (Electoral Rolls) के शुद्धिकरण को लेकर खड़ा हुआ विवाद अब तक के सबसे बड़े प्रशासनिक व राजनीतिक संकट में बदल चुका है। चुनाव आयोग (ECI) द्वारा चलाए जा रहे ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) अभियान और मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के फैसले ने देश की सियासत को पूरी तरह गर्मा दिया है। इसी कड़ी में राजधानी दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने एक आपातकालीन प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सीधी जंग का ऐलान कर दिया है।
CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके, सह-संयोजक आशुतोष रांका और सौरव दास ने संयुक्त रूप से CEC ज्ञानेश कुमार को 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए उनके तुरंत इस्तीफे की मांग की है। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समयसीमा के भीतर मुख्य चुनाव आयुक्त पद नहीं छोड़ते हैं, तो देशव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू किए जाएंगे, जिसकी परिणति दिल्ली में अनिश्चितकालीन ‘जंतर-मंतर 2.0’ आंदोलन के रूप में होगी।
क्या है ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) और क्यों भड़का विवाद?
निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूचियों को पारदर्शी बनाने और फर्जी/दोहरे वोटरों को हटाने के उद्देश्य से जून 2025 में बिहार से ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) की शुरुआत की थी, जिसे बाद में 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किया गया। इस अभियान के तहत करीब 13 करोड़ (130 मिलियन) मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं

विपक्ष और नागरिक अधिकार संगठनों का आरोप है कि इस प्रक्रिया में ब्लॉक लेवल अधिकारियों (BLO) द्वारा घर-घर जाकर किए जाने वाले भौतिक सत्यापन (Physical Verification) के नियमों की अनदेखी की गई। इसके कारण आजीविका के लिए प्रवास करने वाले मजदूरों, युवाओं (Gen Z) और सीमांत वर्गों के वैध नागरिकों के नाम बिना किसी पूर्व नोटिस के मतदाता सूची से गायब कर दिए गए हैं।
‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट का खुलासा: 10 महीनों में 14 बार आंतरिक आपत्तियां
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान CJP नेताओं ने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक खोजी रिपोर्ट का हवाला देते हुए चुनाव आयोग के भीतर चल रही खींचतान को उजागर किया। रिपोर्ट के अनुसार:
- पिछले 10 महीनों के दौरान चुनाव आयोग के दो अन्य चुनाव आयुक्तों—सुखबीर सिंह संधु और विवेक जोशी—ने SIR प्रक्रिया और फॉर्म-6 (नए वोटर रजिस्ट्रेशन) के नियमों में मनमाने बदलावों को लेकर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां (Written Dissent) दर्ज कराई थीं।

“जब तीन सदस्यीय संवैधानिक आयोग के भीतर ही 14 बार लिखित विरोध दर्ज कराया गया हो, तो साफ है कि फैसले निष्पक्ष नहीं थे। ज्ञानेश कुमार हमारे वोट देने के अधिकार को छीनने वाले कौन होते हैं? अगर 48 घंटे में इस्तीफा नहीं आया तो पूरा देश सड़कों पर होगा।”
— अभिजीत दिपके (संस्थापक, CJP)
प्रेस कॉन्फ्रेंस में CJP का 4-सूत्रीय मांग-पत्र
प्रेस वार्ता में CJP के सह-संयोजक आशुतोष रांका और सौरव दास ने पार्टी की ओर से देश के सामने चार प्रमुख मांगें रखीं:
- CEC का इस्तीफा व आपराधिक मामला: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तुरंत अपने पद से इस्तीफा दें और उन पर संवैधानिक अधिकारों के हनन व लोकतांत्रिक प्रक्रिया से खिलवाड़ के तहत आपराधिक मुकदमा दर्ज हो।
- SIR फ्रीज व चुनावों पर रोक: देश में होने वाले सभी आगामी चुनावों को तुरंत प्रभाव से रोका जाए, SIR प्रक्रिया को पूरी तरह फ्रीज किया जाए और मतदाता सूची को जनवरी 2025 की स्थिति में वापस बहाल किया जाए।
- सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में फाइलों की जब्ती: सर्वोच्च न्यायालय तुरंत हस्तक्षेप करते हुए ECI के SIR से जुड़े सभी दस्तावेजों, डिजिटल रिकॉर्ड्स और फाइलों को अपनी कस्टडी में ले ताकि साक्ष्यों के साथ कोई छेड़छाड़ न हो सके।
- 2023 का नियुक्ति कानून रद्द हो: मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए बने 2023 के विवादास्पद कानून को निरस्त कर एक स्वतंत्र और निष्पक्ष चयन प्रणाली बनाई जाए।
‘जंतर-मंतर 2.0’ का रोडमैप और विपक्षी दलों से बहिष्कार की अपील
CJP प्रमुख अभिजीत दिपके ने आंदोलन की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि 48 घंटे की समयसीमा समाप्त होते ही देश के हर राज्य और जिले में CJP कार्यकर्ता सड़कों पर उतरेंगे। राज्यों में बड़े प्रदर्शनों के बाद दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा, जिसे ‘जंतर-मंतर 2.0’ का नाम दिया गया है।
इसके साथ ही CJP ने देश के तमाम विपक्षी राजनीतिक दलों से अपील की है कि यदि चुनाव आयोग की निष्पक्षता खत्म हो चुकी है और वोटर लिस्ट सुरक्षित नहीं है, तो उन्हें आगामी सभी चुनावों का पूर्ण बहिष्कार (Election Boycott) करना चाहिए।
सियालदह से कोलकाता तक उबला जनसैलाब: सड़कों पर उतरा ‘Gen Z’

SIR विवाद और नाम काटे जाने की आंच अब सीधे ग्राउंड पर पहुंच चुकी है:
- सियालदह और कोलकाता में छात्रों का हंगामा: पश्चिम बंगाल के सियालदह रेलवे स्टेशन और कोलकाता की मुख्य सड़कों पर छात्रों और युवाओं का भारी हुजूम (जनसैलाब) उमड़ पड़ा है। मताधिकार की सुरक्षा की मांग को लेकर प्रदर्शनकारी सड़कों पर डटे हुए हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में रेल और सड़क यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
- संसद और अदालतों में हलचल: विपक्षी दलों द्वारा सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल करने की तैयारी की जा रही है, जिसमें 13 करोड़ हटाए गए नामों के स्वतंत्र री-वेरिफिकेशन की मांग की गई है।
चुनाव आयोग (ECI) का आधिकारिक रुख

चौतरफा घिरे निर्वाचन आयोग ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए अपना रुख स्पष्ट किया है। आयोग के अनुसार:
- आंतरिक चर्चाएं स्वाभाविक: किसी भी बहु-सदस्यीय संवैधानिक निकाय (Multi-member Constitutional Body) के भीतर नीतिगत मुद्दों पर मतभेद या विचार-विमर्श होना एक स्वस्थ लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है।
- कानूनी प्रक्रिया का पालन: SIR और मतदाता सूची अपडेशन के सभी अंतिम फैसले नियमों के तहत और तीनों आयुक्तों की सहमति से ही लिए गए हैं।
- दावे और आपत्तियां खुली हैं: आयोग का कहना है कि जारी की गई सूची केवल एक ‘ड्राफ्ट रोल’ है। जिन नागरिकों के नाम छूटे हैं, वे फॉर्म-6 या फॉर्म-8 के माध्यम से अपने नाम पुनः दर्ज करा सकते हैं।
मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट: आगे क्या?
इस बीच, कई सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों ने इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल करना शुरू कर दिया है। याचिकाओं में मांग की गई है कि:
- मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए।
- हटाए गए 13 करोड़ नामों का सार्वजनिक री-वेरिफिकेशन कराया जाए।
- प्रत्येक नागरिक को नाम हटाने का स्पष्ट लिखित कारण बताया जाए।
देश के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इस संवेदनशील और बड़े मामले पर जल्द सुनवाई किए जाने की संभावना है। आगामी राज्य विधानसभा चुनावों और राष्ट्रीय राजनीति के दृष्टिकोण से यह मुद्दा बेहद महत्वपूर्ण मोड़ ले चुका है।


