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West Bengal Election 2026: सुप्रीम कोर्ट से TMC को बड़ा झटका, मतगणना में केंद्रीय कर्मचारियों की तैनाती पर दखल देने से किया इनकार

Digital Desk - Lucknow
Last updated: May 2, 2026 5:36 pm
Digital Desk - Lucknow
6 months ago
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West Bengal
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West Bengal Election की मतगणना से ठीक पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) को सुप्रीम कोर्ट से एक बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने मतगणना में केंद्र सरकार के कर्मचारियों की नियुक्ति को चुनौती देने वाली टीएमसी की याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में किसी भी प्रकार के अतिरिक्त आदेश की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि चुनाव आयोग का निर्णय पूरी तरह से नियमों के अनुरूप है।

Contents
सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणीचुनाव आयोग का रुखहाईकोर्ट ने भी खारिज की थी याचिका

सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

जस्टिस पी एस नरसिम्हा और जस्टिस जोयमाल्या बागची की बेंच ने शनिवार को तृणमूल कांग्रेस की याचिका पर विशेष सुनवाई की। टीएमसी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने चुनाव आयोग पर मनमानी का आरोप लगाया, लेकिन बेंच ने इसे स्वीकार नहीं किया।

  • बेंच का रुख: जस्टिस बागची ने कहा कि चुनाव आयोग के सर्कुलर में ऐसा कहीं नहीं लिखा है कि कर्मचारी सिर्फ केंद्र का ही होगा। यदि ऐसा लिखा भी गया होता, तब भी अदालत इसे गलत नहीं ठहराती।

  • पारदर्शिता का आश्वासन: जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि मतगणना केंद्र पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे और सभी राजनीतिक पार्टियों के एजेंट वहां मौजूद रहेंगे। इसलिए, याचिकाकर्ता की आशंकाओं का कोई ठोस आधार नहीं है।

चुनाव आयोग का रुख

चुनाव आयोग के वकील, वरिष्ठ वकील डी एस नायडू ने अदालत को बताया कि यह याचिका बिना किसी ठोस आधार और केवल आशंकाओं के तहत दायर की गई है।

  • रिटर्निंग ऑफिसर की भूमिका: नायडू ने स्पष्ट किया कि सर्कुलर में ऐसा कहीं नहीं कहा गया है कि मतगणना में राज्य सरकार के कर्मचारियों की कोई भूमिका नहीं होगी। इसके अलावा, मतगणना के लिए कर्मचारियों की नियुक्ति रिटर्निंग ऑफिसर करता है, जो स्वयं राज्य सरकार का ही अधिकारी होता है।

  • नियमों का पालन: आयोग के वकील ने आश्वासन दिया कि पूरी प्रक्रिया तय नियमों के मुताबिक होगी और सर्कुलर की सभी बातों का पूरी तरह से पालन किया जाएगा।

हाईकोर्ट ने भी खारिज की थी याचिका

सुप्रीम कोर्ट से पहले तृणमूल कांग्रेस ने यही मामला कलकत्ता हाईकोर्ट के समक्ष उठाया था। 30 अप्रैल को हाईकोर्ट ने उनकी दलीलों को खारिज कर दिया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि कर्मचारियों की नियुक्ति करना चुनाव आयोग का विशेषाधिकार है। अदालत ने यह भी माना था कि सिर्फ आशंकाओं के आधार पर कोई आदेश पारित नहीं किया जा सकता। यदि मतगणना के दौरान कोई अनियमितता होती है, तो उसके लिए बाद में उचित कानूनी रास्ता अपनाया जा सकता है।

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