इमरान मसूद बनाए गए कार्यकारी अध्यक्ष, देवेंद्र निषाद और आलोक प्रसाद को वरिष्ठ उपाध्यक्ष की कमान; जानिए पूरी इनसाइड स्टोरी
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। साल 2027 के विधानसभा चुनाव की बिसात बिछने से ठीक पहले अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) ने राज्य संगठन में बड़ा फेरबदल किया है। कांग्रेस आलाकमान ने अजय राय का कार्यकाल समाप्त करते हुए रामपुर खास से लगातार तीन बार की विधायक आराधना मिश्रा उर्फ ‘मोना’ के सिर UPCC (उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी) का ताज सजा दिया है। इसके साथ ही पार्टी ने संगठन में संतुलन साधने के लिए सहारनपुर से लोकसभा सांसद इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया है। वहीं देवेंद्र निषाद और आलोक प्रसाद को प्रदेश संगठन में वरिष्ठ उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है। राजनीतिक पंडित इसे केवल एक सांगठनिक फेरबदल नहीं, बल्कि यूपी में खोई जमीन वापस पाने के लिए कांग्रेस का बड़ा ‘सोशल इंजीनियरिंग मास्टरस्ट्रोक’ मान रहे हैं।
कौन हैं आराधना मिश्रा ‘मोना’? जानिए प्रोफाइल और राजनीतिक रसूख
आराधना मिश्रा ‘मोना’ दो दशक से अधिक समय से सक्रिय राजनीति में हैं और उत्तर प्रदेश कांग्रेस की सबसे मुखर व कद्दावर महिला नेताओं में गिनी जाती हैं।
पारिवारिक विरासत: मोना कांग्रेस के दिग्गज राज्यसभा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रमोद तिवारी की बेटी हैं। प्रमोद तिवारी के नाम प्रतापगढ़ की रामपुर खास सीट से लगातार 9 बार विधायक रहने का रिकॉर्ड दर्ज है।
संसदीय अनुभव: पिता की विरासत को आगे बढ़ाते हुए आराधना मिश्रा रामपुर खास विधानसभा सीट से लगातार तीन बार (2014 उपचुनाव, 2017, और 2022) विधायक चुनी जा चुकी हैं।
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सदन में आक्रामक नेतृत्व: वे उत्तर प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता के रूप में पार्टी की कमान संभालती रही हैं और योगी सरकार को सदन में घेरने का काम मजबूती से किया है।
प्रियंका गांधी की करीबी: आराधना मिश्रा को कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा का बेहद करीबी माना जाता है। प्रियंका गांधी के नेतृत्व में चलाए गए ऐतिहासिक ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ अभियान में भी उन्होंने अग्रणी भूमिका निभाई थी।
ब्राह्मण-मुस्लिम-दलित-OBC: क्या कांग्रेस में लौट रहा है पुराना ‘सुरक्षित वोटबैंक’?
इस फेरबदल के जरिए कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में अपना पुराना और मजबूत सामाजिक समीकरण पुनर्जीवित करने का सीधा संदेश दिया है।
ब्राह्मण चेहरे पर फिर भरोसा: 90 के दशक से पहले यूपी में ब्राह्मण समुदाय कांग्रेस का मुख्य आधार हुआ करता था। अजय राय के बाद एक बार फिर आराधना मिश्रा जैसी सौम्य और शिक्षित ब्राह्मण महिला चेहरे को आगे करके पार्टी ने संदेश दिया है कि सवर्णों, खासकर ब्राह्मण वर्ग का सम्मान कांग्रेस में सर्वोपरि है। पार्टी की नजर असंतुष्ट सवर्ण वोटरों पर भी है।
मुस्लिम नेतृत्व की मजबूत मौजूदगी: पश्चिमी यूपी के कद्दावर नेता और सहारनपुर से सांसद इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर पार्टी ने मुस्लिम मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ को और मजबूत करने का दांव चला है। इमरान मसूद इससे पहले भी प्रदेश उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।
OBC और दलित समाज का प्रतिनिधित्व: देवेंद्र निषाद और आलोक प्रसाद को वरिष्ठ उपाध्यक्ष बनाकर पार्टी ने निषाद/ओबीसी समाज और दलित वर्ग को संगठन की शीर्ष टीम में जगह दी है।
प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम का ‘दलित कनेक्ट’: उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम पहले से ही राज्य में अंबेडकरवादी विचारधारा के जरिए दलित समुदाय के बीच पार्टी का जनाधार मजबूत करने में जुटे हैं। इस प्रकार नई टीम ब्राह्मण, मुस्लिम, दलित और OBC का सशक्त गुलदस्ता पेश करती है।
SP के ‘PDA’ के सामने कांग्रेस का संतुलन कार्ड और 2027 की रणनीति
SP से बारगेनिंग पावर मजबूत करना: अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी जहां ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के नारे के साथ मैदान में है, वहीं कांग्रेस अपनी इस नई ‘सोशल इंजीनियरिंग’ के जरिए अपने कोर वोटबैंक को वापस लाकर 2027 के विधानसभा चुनाव में ‘इंडिया’ गठबंधन के तहत सीटों के बंटवारे पर मजबूती से अपनी बात रख सकेगी।
संगठन में नई ऊर्जा का संचार: अजय राय का कार्यकाल खत्म होने के बाद अब आराधना मिश्रा की अगुवाई में जिला, ब्लॉक और बूथ स्तर पर नई कमेटियों का गठन किया जाएगा ताकि जमीनी कार्यकर्ताओं और कैडर में नई जान फूंकी जा सके।
महिला कार्ड: ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ के बाद एक महिला नेता के हाथ में प्रदेश की कमान सौंपना राज्य की आधी आबादी (महिला वोटरों) को सीधे जोड़ने की रणनीति का हिस्सा है।
2027 का संग्राम करीब आते ही कांग्रेस ने यह साफ कर दिया है कि वह केवल गठबंधन के भरोसे रहने के बजाय अपने सांगठनिक ढांचे को सवर्ण, अल्पसंख्यक, दलित और पिछड़ा वर्ग के सटीक तालमेल से मजबूत करके उतरेगी। अब देखना यह होगा कि आराधना मिश्रा ‘मोना’ और इमरान मसूद की यह नई जोड़ी यूपी में कांग्रेस को मुख्य मुकाबले में कितनी तेजी से वापस ला पाती है।


