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इलेक्ट्रिकल उपकरणों के निर्यात में यूपी की लंबी छलांग: 8 वर्षों में 9 गुना बढ़ा कारोबार

Digital Desk - Lucknow
Last updated: May 27, 2025 2:08 am
Digital Desk - Lucknow
1 year ago
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इलेक्ट्रिकल उपकरणों के निर्यात में यूपी की लंबी छलांग: 8 वर्षों में 9 गुना बढ़ा कारोबार
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–अजय प्रताप सिंह

लखनऊ, 26 मई 2025: उत्तर प्रदेश ने इलेक्ट्रिकल उपकरणों के नियत (एक्सपोर्ट) के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। राज्य ने पिछले आठ वर्षों में इस सेक्टर में जबरदस्त प्रगति की है, जिसमें नियत का आंकड़ा 2017-18 के 4,056 करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में 38,756 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह लगभग नौ गुना की वृद्धि है, जो यूपी की आर्थिक तरक्की और औद्योगिक विकास की एक मिसाल बन गया है। यह जानकारी यूपी सरकार और संबंधित औद्योगिक संगठनों द्वारा जारी आंकड़ों से सामने आई है।

यूपी का इलेक्ट्रिकल सेक्टर: एक नई उड़ान

उत्तर प्रदेश, जो कभी अपनी कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था के लिए जाना जाता था, अब औद्योगिक क्षेत्र में भी अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। इलेक्ट्रिकल उपकरणों का नियत इस बदलाव का एक बड़ा उदाहरण है। 2017-18 में जहां राज्य से इलेक्ट्रिकल उपकरणों का नियत 4,056 करोड़ रुपये का था, वहीं 2024-25 में यह आंकड़ा 38,756 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इस दौरान राज्य ने रेफ्रिजरेटर, वॉशिंग मशीन, एयर कंडीशनर, टेलीविजन जैसे कई उत्पादों का नियत किया, जो वैश्विक बाजार में अपनी जगह बना रहे हैं।
इस वृद्धि के पीछे कई कारण हैं। सबसे पहले, यूपी सरकार की औद्योगिक नीतियों में सुधार और निवेश को बढ़ावा देने वाली योजनाओं ने राज्य को एक आकर्षक गंतव्य बनाया है। ‘मेक इन इंडिया’ और ‘मेक इन यूपी’ जैसी पहलों ने स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा दिया, जिससे नियत में भी तेजी आई। इसके अलावा, राज्य में बुनियादी ढांचे का विकास, जैसे बेहतर सड़कें, बंदरगाहों तक पहुंच और बिजली आपूर्ति में सुधार, ने भी इस सेक्टर को गति दी।

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निवेश और रोजगार के नए अवसर

इलेक्ट्रिकल उपकरणों के सेक्टर में इस उछाल का सबसे बड़ा फायदा स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार के क्षेत्र में देखने को मिला है। विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले आठ वर्षों में इस सेक्टर में करीब 2 लाख से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। नोएडा, ग्रेटर नोएडा, लखनऊ और कानपुर जैसे शहर इस सेक्टर के प्रमुख केंद्र बनकर उभरे हैं। कई बड़ी कंपनियों ने इन क्षेत्रों में अपनी मैन्युफैक्चरिंग इकाइयां स्थापित की हैं, जिससे न केवल नियत बढ़ा है, बल्कि स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिला है।
यूपी के एक उद्यमी, सचिन अग्रवाल, जो नोएडा में एक वॉशिंग मशीन मैन्युफैक्चरिंग यूनिट चलाते हैं, ने बताया, “पिछले कुछ सालों में सरकार ने हमें बहुत सपोर्ट किया है। सब्सिडी, आसान लोन और बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर ने हमें अपने कारोबार को बढ़ाने में मदद की। आज हम अपने प्रोडक्ट्स मध्य पूर्व और अफ्रीका तक नियत कर रहे हैं।

वैश्विक बाजार में यूपी की बढ़ती पहचान

यूपी से नियत होने वाले इलेक्ट्रिकल उपकरणों की मांग में वैश्विक स्तर पर भी इजाफा हुआ है। मध्य पूर्व, अफ्रीका, दक्षिण एशिया और यूरोप के कई देशों में यूपी में बने रेफ्रिजरेटर, टेलीविजन और अन्य उपकरणों की डिमांड बढ़ी है। इसकी वजह यह है कि यूपी में बने उत्पाद न केवल किफायती हैं, बल्कि गुणवत्ता के मामले में भी वैश्विक मानकों को पूरा करते हैं।
एक व्यापार विशेषज्ञ, डॉ. अनिल शर्मा, ने कहा, “यूपी ने अपनी लागत और गुणवत्ता के दम पर वैश्विक बाजार में अपनी जगह बनाई है। राज्य सरकार की नीतियों और केंद्र सरकार के समर्थन ने इसे संभव बनाया है। लेकिन अभी और काम करने की जरूरत है, खासकर तकनीकी नवाचार और स्किल डेवलपमेंट के क्षेत्र में।

चुनौतियां और भविष्य की राह

हालांकि यह उपलब्धि प्रभावशाली है, लेकिन इस सेक्टर के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं। तकनीकी नवाचार की कमी, कुशल श्रमिकों की अपर्याप्त उपलब्धता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा जैसे मुद्दों पर अभी काम करने की जरूरत है। इसके अलावा, पर्यावरणीय नियमों का पालन और सस्टेनेबल प्रोडक्शन भी एक बड़ा मुद्दा है, जिसे अनदेखा नहीं किया जा सकता।
यूपी सरकार ने इन चुनौतियों से निपटने के लिए कई कदम उठाए हैं। राज्य में स्किल डेवलपमेंट सेंटर स्थापित किए गए हैं, जहां युवाओं को इलेक्ट्रिकल मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी ट्रेनिंग दी जा रही है। साथ ही, सरकार ने हरित ऊर्जा और सस्टेनेबल प्रोडक्शन को बढ़ावा देने के लिए भी नीतियां बनाई हैं।

निष्कर्ष

उत्तर प्रदेश का इलेक्ट्रिकल उपकरणों के नियत में यह उछाल न केवल आर्थिक विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह राज्य की बदलती छवि को भी दर्शाता है। आठ वर्षों में नौ गुना की वृद्धि एक ऐसी कहानी है, जो यूपी के औद्योगिक भविष्य को उज्ज्वल बनाती है। अगर यह गति बरकरार रही, तो आने वाले वर्षों में यूपी न केवल भारत, बल्कि वैश्विक स्तर पर इलेक्ट्रिकल मैन्युफैक्चरिंग का एक बड़ा हब बन सकता है।

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