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मोहम्मद रफ़ी के 100 साल, बेस्टी एज्यूकेशन ने सजाया सुरों की महफ़िल

Digital Desk - Lucknow
Last updated: December 25, 2024 6:03 am
Digital Desk - Lucknow
2 years ago
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मोहम्मद रफ़ी के 100 साल, बेस्टी एज्यूकेशन ने सजाया सुरों की महफ़िल
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कतर। साहित्यिक, सामाजिक व सांस्कृतिक संस्था बेस्टी मंच पर 23 दिसंबर को मशहूर गायक मोहम्मद रफी की 100वीं जयंती पर एक ऑनलाइन सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में देवभूमि ऋषिकेश (भारत) के मशहूर कलाकार गोपाल भटनागर साहब ने रफ़ी साहब के अमर गीतों को शानदार आवाज़ में प्रस्तुत किया। रफ़ी साहब के बारे में कुछ कहना सूरज को दीपक दिखने जैसा है। मैं वही रफ़ी साहब की बात कर रहा हूँ जो हम सब के दिलों में आज भी ज़िंदा हैं। वही रफ़ी साहब जिनका जन्म अमृतसर के पास कोटला सुल्तान सिंह में हाजी अली मोहम्मद के घर हुआ था। बारह साल की उम्र में रफ़ी अपने पिता हाजी अली मोहम्मद व परिवार के साथ 1926 में लाहौर चले गए। एक तरफ़ रफ़ी साहब को संगीत से बहुत लगाव था तो दूसरी तरफ़ उनके पिता हाजी अली संगीत के सख़्त ख़िलाफ़ थे इसके बावजूद भी अपने धुन के पक्के रफ़ी साहब पिता हाजी अली से चोरी-छिपे ही गीत गाया करते थे। समय बितता गया और उन्हें रेडियो में काम करने का मौक़ा मिला। आगे चलकर तत्कालीन मशहूर संगीत निर्देशक श्याम सुंदर साहब ने उन्हें मुंबई आने का सलाह दिया। और फिर क्या था मुंबई आते ही मुहम्म्मद रफ़ी अपनी आवाज़ से सभी के दिलों में बस गये। रफ़ी साहब ने ही कहा है – ये इश्क़ इश्क़ है इश्क़ इश्क़…… इश्क़ आज़ाद है, इश्क़ आज़ाद है, हिंदू न मुसलमान है इश्क़।
आज हम वही रफ़ी साहब को याद कर रहे हैं जिन्होंने कहा – ‘मन तपड़त हरि दर्शन को आज…’ आज भी भक्ति रस से ओतप्रोत इस गीत के लिए मो॰ रफ़ी याद किया जाता है। ये रफ़ी ही हैं जो गाते हैं, ‘जिन्हें नाज़ है हिंद पर, वो कहाँ हैं…’ ये सब मशहूर गायक मोहम्मद रफ़ी की गायकी के महज़ चंद रंग हैं। गायकी के अलावा जिस बात के लिए अकसर लोग मोहम्मद रफ़ी की तारीफ़ किया करते हैं, वह था उनका शांत और विनम्र अंदाज़। एक वक़्त था जब फ़िल्मों के हिट गाने का मतलब मोहम्मद रफ़ी होता था। आज भी उनके न रहने के सालों बाद भी लोग उनके गीत सुनते-सुनाते नहीं थकते। रफ़ी साहब को उनकी 100वीं जयंती के अवसर पर ‘बेस्टी एज्यूकेशन एंड चेरिटेबल ट्रस्ट, दोहा-क़तर इकाई’ द्वारा भी ‘एक शाम-रफ़ी के नाम’ ऑनलाइन संगीत संध्या कार्यक्रम आयोजित किया गया। गायक आ॰ गोपाल भटनागर साहब ने रफ़ी के गानों से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। कवि एवं पत्रकार विनय शर्मा दीप ने बताया कि उक्त कार्यक्रम का आयोजन बेस्टी एजूकेशन संस्था के संस्थापक डॉ॰ बैजनाथ शर्मा और राष्ट्रीय अध्यक्षा अफ़साना सैयद ने किया तथा रफ़ी साहब को याद किया व गोपाल भटनागर साहब की बेहतरीन गायकी के लिए मुबारकबाद पेश किया।

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