7 जून 2025 को PIB ने बताया कि भारत में शिक्षक-छात्र अनुपात (Pupil-Teacher Ratio) में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। प्राथमिक स्तर पर यह अनुपात 34:1 से घटकर 21:1, उच्च प्राथमिक स्तर पर 23:1 से 18:1, और माध्यमिक स्तर पर 30:1 से 16:1 हो गया है (वित्तीय वर्ष 2024 तक)। यह सुधार शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाने और प्रत्येक छात्र को व्यक्तिगत ध्यान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इस सुधार के पीछे सरकार की कई पहलें हैं, जैसे शिक्षक भर्ती अभियान और डिजिटल शिक्षण उपकरणों का उपयोग। हालांकि, सोशल मीडिया पर कुछ उपयोगकर्ताओं ने दावा किया है कि अभी भी कई सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी है। उदाहरण के लिए, एक X पोस्ट में कहा गया कि वरिष्ठ अध्यापक के 37,249 और व्याख्याता के 18,651 पद खाली हैं, जबकि भर्ती केवल 2,129 और 2,202 पदों के लिए निकली है। सरकार ने जवाब में कहा कि आगामी कैबिनेट मीटिंग में भर्ती में 50% पद बढ़ाने का प्रस्ताव है। यह मुद्दा शिक्षा व्यवस्था में मानव संसाधन प्रबंधन की चुनौतियों को उजागर करता है।

