21 जून 2025 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार की पुण्यतिथि पर देशभर में कई जगहों पर विवाद छिड़ गया। नागपुर में स्मृति मंदिर में आयोजित एक कार्यक्रम में RSS कार्यकर्ताओं पर कथित तौर पर भड़काऊ नारे लगाने का आरोप लगा। विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस और वामपंथी संगठनों ने इसे सांप्रदायिक तनाव भड़काने की कोशिश करार दिया। कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, “हेडगेवार की पुण्यतिथि के नाम पर RSS सामाजिक एकता को तोड़ने का काम कर रहा है।
हाल ही में, केरल में CPI(M) ने राजभवन में हेडगेवार की तस्वीर लगाने का विरोध किया, इसे “संवैधानिक मूल्यों का उल्लंघन” बताया। एक एक्स पोस्ट में दावा किया गया कि हेडगेवार ने अंग्रेजों से माफी मांगी थी, जिसे RSS ने “विपक्ष का दुष्प्रचार” कहा। आलोचकों ने RSS पर आरोप लगाया कि वह हेडगेवार की पुण्यतिथि का इस्तेमाल हिंदुत्व को बढ़ावा देने के लिए करता है, जो अल्पसंख्यक समुदायों के बीच असुरक्षा पैदा करता है।
इसके अलावा, एक विवादास्पद किताब में दावा किया गया कि हेडगेवार ने RSS को राजनीति से दूर रखने की बात कही थी, लेकिन आज संगठन का BJP के साथ गहरा रिश्ता है। विपक्ष ने इसे हेडगेवार के मूल सिद्धांतों से विचलन बताया। सोशल मीडिया पर भी बहस तेज है, जहां कुछ लोग RSS को “हिंदू एकता का प्रतीक” मानते हैं, तो अन्य इसे “सांप्रदायिकता का केंद्र” कहते हैं।
हालांकि RSS ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि हेडगेवार का मिशन सामाजिक एकता और राष्ट्रसेवा था, लेकिन पुण्यतिथि पर बढ़ते विवादों ने संगठन की छवि पर सवाल उठाए हैं।

