लखनऊ 2 जुलाई 2025. रिहाई मंच और इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र नेताओं ने करछना प्रयागराज में भीम आर्मी व आजाद समाज पार्टी के कार्यकर्ताओं के उत्पीड़न की कठोर निंदा करते हुए पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है.
रिहाई मंच अध्यक्ष मोहम्मद शोएब ने कहा कि पिछड़े समाज की 8 वर्षीय बेटी के साथ बलात्कार और दलित युवक को जिंदा जला देने की घटना को लेकर पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद को रोक कर पुलिस ने सुनियोजित तरीके से मामले को भड़काया. सरकार बताए कि लॉ एंड ऑर्डर लागू करना किसका काम है क्योंकि यहाँ पुलिस पक्षपाती भूमिका में दिख रही. इस मामले में पुलिस ने करछना थाने में आरोपियों से कान तक पकड़वाया. सरकार बताए कि यह किस कानून के तहत उसने यह करवाया और किसके आदेश पर. क्या यह गैर कानूनी कर्रवाई दलित होने के नाते की गई. उन्होंने आगे यह कहा कि पुलिस कह रही है कि वीडियो के आधार पर वह कार्रवाई कर रही है. ऐसे में सरकार वायरल होते उन विडियो जिसमें गाड़ियों की तोड़फोड़ करते हुए पुलिस कर्मी दिख रहे हैं उनके खिलाफ क्या कर्रवाई की.
इलाहाबाद विश्वविद्यालय में छात्र नेता रहे डॉ आरपी गौतम ने कहा कि देश के किसी भी सांसद को किसी भी पीड़ित परिवार से न मिलने देना, देश की संसद का अपमान है. उन्होंने कहा कि करछना थाने में दलित नौजवानों का उत्त्पीड़न करती पुलिस का जो वीडियो वायरल है, सरकार और अनुसचित जाति/जन जाति आयोग तत्काल संज्ञान लेकर कर्रवाई करे. सजा देने के लिए न्याय पालिका है, सजा देने का काम पुलिस कैसे कर सकती है.
रिहाई मंच महासचिव राजीव यादव ने कहा कि करछना के बताए जा रहे वायरल वीडियो में पुलिस कुछ लोगों के साथ गाड़ियों की तोड़फोड़ करती नजर आ रही है. इससे घटना में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठता है कि जिस पुलीस को कानून व्यवस्था क़ायम करना था वही तोड़फोड़ कर रही थी. उन्होंने कहा कि करछना में जिस तरह थाने में बैठाकर कान पकड़वाया गया क्या इटावा में अपने को ब्राह्मण कहकर कथा वाचक का अपमान करने वाले आरोपियों को भी कान पड़कर उठक बैठक करवाई गई! और क्या समाजवादी पार्टी के सांसद रामजीलाल सुमन पर हमला करने वाले करणी सेना के लोगों से कान पकड़वाकर माफी मंगवाई गई।

